{"_id":"67ba9179d332942e4d05b96f","slug":"ips-kalpana-saxena-story-who-was-attacked-by-up-police-constable-2025-02-23","type":"feature-story","status":"publish","title_hn":"UP: भ्रष्ट तंत्र को सुधारने में जुटी थीं एसपी, अपने ही बन बैठे दुश्मन; बरेली की IPS कल्पना सक्सेना की कहानी","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
UP: भ्रष्ट तंत्र को सुधारने में जुटी थीं एसपी, अपने ही बन बैठे दुश्मन; बरेली की IPS कल्पना सक्सेना की कहानी
Sun, 23 Feb 2025 10:18 AM IST
शाहरुख खान
अमर उजाला नेटवर्क, बरेली
अमर उजाला नेटवर्क, बरेली
Published by: शाहरुख खान
Updated Sun, 23 Feb 2025 10:18 AM IST
सार
बरेली के कैंट थाना क्षेत्र में वर्ष 2010 में तत्कालीन एसपी यातायात कल्पना सक्सेना पर हमला हुआ था। अवैध वसूली की शिकायत पर जांच करने पहुंचीं एसपी को सिपाहियों ने कार चढ़ाने की कोशिश की थी। उन्हें 200 मीटर तक घसीटा था।
विज्ञापन
IPS Kalpana Saxena
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
साल 2010 में एसपी यातायात रहीं कल्पना सक्सेना पर कार चढ़ाने व घसीटकर जान से मारने की कोशिश करने वाले तीन सिपाहियों सहित चार अभियुक्तों को अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश सुरेश कुमार गुप्ता ने दोषी करार दिया है। शुक्रवार को कोर्ट ने फैसला सुनाया। इसके बाद चारों दोषियों को जेल भेज दिया गया है। सजा पर सुनवाई 24 फरवरी को होगी।
आईपीएस कल्पना वर्तमान में गाजियाबाद में अतिरिक्त पुलिस आयुक्त हैं। वर्ष 2010 में वह बरेली में एसपी यातायात पद पर तैनात थीं। उन्होंने तैनाती के दौरान विभाग में व्याप्त भ्रष्टाचार के खिलाफ अभियान छेड़े हुए थीं। ऐसे में विभाग के अधीनस्थ ही उनकी जान के दुश्मन बन बैठे।
अगस्त 2010 में कल्पना सक्सेना को बरेली में एसपी यातायात के रूप में तैनाती मिली थी। यहां उन्हें पता लगा कि उनके ही कुछ सिपाही ड्यूटी छोड़कर दूसरी जगह पहुंच जाते हैं और ट्रक वालों से अवैध वसूली करते हैं। वह ऐसे कर्मचारियों को चिह्नित कर व्यवस्था में सुधार की कोशिश कर रही थीं कि सिपाहियों ने उन पर जानलेवा हमला कर दिया।
विज्ञापन
घटना दो सितंबर 2010 को कैंट थाना क्षेत्र में बरेली-शाहजहांपुर रोड स्थित मजार के पास हुई थी। एसपी यातायात ट्रक चालकों से अवैध वसूली कर रहे यातायात पुलिसकर्मियों को पकड़ने पहुंची थीं। तब सिपाही रविंद्र, रावेंद्र, मनोज और एक अन्य शख्स धर्मेंद्र ने कार से कुचलकर उनकी जान लेने की कोशिश की थी। पुलिस ने रिपोर्ट दर्ज कर विवेचना की।
विज्ञापन
आईपीएस कल्पना वर्तमान में गाजियाबाद में अतिरिक्त पुलिस आयुक्त हैं। वर्ष 2010 में वह बरेली में एसपी यातायात पद पर तैनात थीं। उन्होंने तैनाती के दौरान विभाग में व्याप्त भ्रष्टाचार के खिलाफ अभियान छेड़े हुए थीं। ऐसे में विभाग के अधीनस्थ ही उनकी जान के दुश्मन बन बैठे।
विज्ञापन
अगस्त 2010 में कल्पना सक्सेना को बरेली में एसपी यातायात के रूप में तैनाती मिली थी। यहां उन्हें पता लगा कि उनके ही कुछ सिपाही ड्यूटी छोड़कर दूसरी जगह पहुंच जाते हैं और ट्रक वालों से अवैध वसूली करते हैं। वह ऐसे कर्मचारियों को चिह्नित कर व्यवस्था में सुधार की कोशिश कर रही थीं कि सिपाहियों ने उन पर जानलेवा हमला कर दिया।
विज्ञापन
घटना दो सितंबर 2010 को कैंट थाना क्षेत्र में बरेली-शाहजहांपुर रोड स्थित मजार के पास हुई थी। एसपी यातायात ट्रक चालकों से अवैध वसूली कर रहे यातायात पुलिसकर्मियों को पकड़ने पहुंची थीं। तब सिपाही रविंद्र, रावेंद्र, मनोज और एक अन्य शख्स धर्मेंद्र ने कार से कुचलकर उनकी जान लेने की कोशिश की थी। पुलिस ने रिपोर्ट दर्ज कर विवेचना की।
पुलिस की विवेचना में स्पष्ट हुआ कि सिपाही रावेंद्र नकटिया का निवासी है। फर्रुखाबाद निवासी रविंद्र का उपनाम टाइगर तो सिपाही मनोज का उपनाम सुल्ताना है। धर्मेंद्र का ही निवासी और रावेंद्र का सगा भाई है। ये लोग ट्रकों को बैरियर पर रुकवाकर धर्मेंद्र से उगाही कराते थे। बाद में रुपयों का बंदरबांट होता था। पुलिस ने आरोपपत्र दाखिल किया। कोर्ट में 14 गवाह और 22 साक्ष्य पेश किए गए। दोनों पक्षों को सुनने के बाद कोर्ट ने चारों को दोषी करार दिया है।
विवेचना में रही झोल, भ्रष्टाचार का आरोप साबित नहीं
तीनों सिपाहियों को कोर्ट ने जानलेवा हमला व अन्य धाराओं में तो दोषी माना, पर भ्रष्टाचार के आरोप साबित नहीं हो सके। चौंकने वाली बात ये है कि भ्रष्टाचार से जुड़े मामले में मूल आरोप ही साबित नहीं हो सके। विभागीय सूत्रों ने बताया कि तत्कालीन सीओ कैंट एसपी सिंह विवेचना में सिपाहियों को भ्रष्टाचार का दोषी बनाने लायक साक्ष्य ही नहीं जुटा सके। यही वजह रही जो कोर्ट में मामला धराशायी हो गया।
तीनों सिपाहियों को कोर्ट ने जानलेवा हमला व अन्य धाराओं में तो दोषी माना, पर भ्रष्टाचार के आरोप साबित नहीं हो सके। चौंकने वाली बात ये है कि भ्रष्टाचार से जुड़े मामले में मूल आरोप ही साबित नहीं हो सके। विभागीय सूत्रों ने बताया कि तत्कालीन सीओ कैंट एसपी सिंह विवेचना में सिपाहियों को भ्रष्टाचार का दोषी बनाने लायक साक्ष्य ही नहीं जुटा सके। यही वजह रही जो कोर्ट में मामला धराशायी हो गया।
एक साल में लगी चार्जशीट, फिर किया बर्खास्त
पुलिस ने वर्ष 2010 में ही इस मामले में चार्जशीट लगा दी थी। एसएसपी ने तीनों सिपाहियों को निलंबित कर दिया था। वर्ष 2014 तक तीनों को बर्खास्त कर दिया गया था। वे जेल में काफी समय बंद रहे, फिर जमानत पर छूट गए थे।
पुलिस ने वर्ष 2010 में ही इस मामले में चार्जशीट लगा दी थी। एसएसपी ने तीनों सिपाहियों को निलंबित कर दिया था। वर्ष 2014 तक तीनों को बर्खास्त कर दिया गया था। वे जेल में काफी समय बंद रहे, फिर जमानत पर छूट गए थे।
मेरठ निवासी कल्पना आतंकियों से ले चुकी हैं लोहा
कल्पना सक्सेना वर्ष 1990 बैच की पीपीएस अधिकारी हैं, जिन्हें वर्ष 2010 में आईपीएस कैडर मिला है। वह इस समय डीआईजी रैंक की अधिकारी हैं। वह मेरठ की मूल निवासी हैं। उन्हें पिछली साल स्वतंत्रता दिवस पर राष्ट्रपति पदक मिल चुका है। वह 1995 में सहारनपुर जिले में सीओ रामपुर व नकुर पद पर रहते हुए आतंकियों से मुठभेड़ कर चुकी हैं।
कल्पना सक्सेना वर्ष 1990 बैच की पीपीएस अधिकारी हैं, जिन्हें वर्ष 2010 में आईपीएस कैडर मिला है। वह इस समय डीआईजी रैंक की अधिकारी हैं। वह मेरठ की मूल निवासी हैं। उन्हें पिछली साल स्वतंत्रता दिवस पर राष्ट्रपति पदक मिल चुका है। वह 1995 में सहारनपुर जिले में सीओ रामपुर व नकुर पद पर रहते हुए आतंकियों से मुठभेड़ कर चुकी हैं।