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नहीं कराई जांच, नष्ट कर दिए संदिग्ध कोरोना संक्रमितों के 10 हजार सैंपल

Mon, 22 Nov 2021 02:14 AM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Mon, 22 Nov 2021 02:14 AM IST
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Investigation not done, 10 thousand samples of suspected corona infected destroyed
टीकाकरण - फोटो : demo photo
15 दिन से रखे दस हजार सैंपल हो गए थे खराब, दस डिग्री तक ही सुरक्षित रहते हैं सैंपल
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स्टोर रूम में बगैर आइस पैक रखे गए थे सैंपल, रिपोर्ट पता करने के लिए भटक रहे लोग
बरेली। कोरोना महामारी की तीसरी लहर रोकने की कवायद के बीच स्वास्थ्य विभाग की बड़ी लापरवाही सामने आई है। पिछले दिनों सैंपल की जांच न कराने के प्रकरण में घिरे स्वास्थ्य विभाग ने आखिरकर दस हजार सैंपल को जांच न करा पाने पर नष्ट कर दिया है, लेकिन प्राप्त सैंपल के सापेक्ष सभी जांच करने के दावों वाली रिपोर्ट शासन को भेजी जा रही है। उधर, लोग रिपोर्ट पता करने के लिए भटक रहे हैं।
संक्रमण की रोकथाम के लिए जरूरी है कि संक्रमितों और उनके संपर्क में आए लोगों की समय रहते जांच हो। इसके लिए सभी स्वास्थ्य केंद्रों पर सैंपलिंग हो रही है, लेकिन सैंपल की जांच में स्वास्थ्य विभाग की ओर से बड़ी लापरवाही उजागर हुई है। दरअसल, एक नवंबर से 17 नवंबर तक तीन सौ बेड अस्पताल पहुंचे 15 हजार से ज्यादा सैंपल की जांच कराने के लिए उन्हें जिला अस्पताल की बीएसएल-2 लैब भेजा ही नहीं गया। प्रकरण का खुलासा होने के बाद आननफानन सीएमओ डॉ. बलबीर सिंह ने सैंपलिंग के नोडल अफसर की जिम्मेदारी डिप्टी एसीएमओ डॉ. सीपी सिंह से हटाकर एसीएमओ डॉ. सतीश चंद्रा को सौंप दी।
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सीएमओ ने निर्देश दिए कि खराब होने से बचे सैंपल को जांच के लिए लैब भेजा जाए। लिहाजा, नए नोडल अफसर ने सैंपल की स्थिति पता कराई तो एक नवंबर से 15 नवंबर तक तीन सौ बेड अस्पताल स्थित फ्लू कॉर्नर पर रखे गए सभी सैंपल के खराब होने की जानकारी मिली। उन्होंने सभी खराब सैंपल को कोविड प्रोटोकॉल के तहत नष्ट करा दिया और 16 से 18 नवंबर तक के सैंपल जांच के लिए लैब भेज दिए।
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गिनती नहीं की, अनुमान के मुताबिक 10 हजार
सैंपलिंग नोडल अफसर डॉ. चंद्रा के मुताबिक सैंपल खराब हैं या नहीं इसका पता लगाना कठिन नहीं था। आमतौर पर आरटीपीसीआर जांच के लिए भरे गए सैंपल को आइसपैक के साथ थर्माकोल बॉक्स में रखा जाता है। अगर यह प्रक्रिया नहीं अपनाई तो 24 घंटे में ही सैंपल खराब होने लगते हैं। इसके अगले 24 घंटे में वह पूरी तरह खराब हो जाते हैं, इसलिए आखिर के दो दिन यानी 16, 17 और 18 नवंबर के सैंपल को ही सही मानते हुए जांच के लिए लैब भेजा गया। इससे पहले के सभी सैंपल को खराब मानकर नष्ट करा दिया गया। इनकी गिनती तो नहीं कराई गई, लेकिन अनुमान के अनुसार करीब 10 हजार सैंपल नष्ट किए गए होंगे।
कहां से कितने पहुंचते हैं आरटीपीसीआर सैंपल
जानकारी के मुताबिक प्रतिदिन 16 ब्लॉकों से करीब सौ-सौ सैंपल, स्टेटिक और मेडिकल मोबाइल यूनिट से क रीब दो सौ सैंपल, तीन सौ बेड फ्लू कॉर्नर पर 50 सैंपल लिए जाते हैं। औसतन प्रतिदिन 25 सौ की सैंपलिंग की जा रही है। जो जांच प्रक्रिया के तहत तीन सौ बेड अस्पताल के फ्लू कॉर्नर पर भेजे जाते हैं। यहां सभी सैंपल का कन्साइनमेंट तैयार होता है। इसके बाद उन्हें जांच के लिए जिला अस्पताल की बीएसएल-2 लैब भेजा जाता है। जांच के बाद लैब से प्राप्त रिपोर्ट को पोर्टल पर अपडेट किया जाता है।
संदिग्ध संक्रमितों की फिर से होगी सैंपलिंग
सर्विलांस प्रभारी डॉ. अनुराग गौतम के मुताबिक पिछले दिनों कोविड पॉजिटिव मिले लाल फाटक तिरुपति विहार के रहने वाले युवक के संपर्क में आए लोगों के सैंपल की जांच रिपोर्ट अब तक पोर्टल पर अपडेट नहीं हुई है। ऐसे में कई दिन पुराने सैंपल होने की वजह से संदिग्ध संक्रमित रहे करीब 25 लोगों के सैंपल फिर से किए जाने पर विचार चल रहा है। बताया कि उन्हें सैंपल नष्ट करने की जानकारी नहीं है। जिनके सैंपल हुए हैं, वह लगातार कॉल करके रिपोर्ट पता कर रहे हैं।

मगर शासन को भेजी जा रही अपडेट रिपोर्ट
सैंपल की जांच भले ही न कराई गई हो पर शासन से वाहवाही लूटने में स्वास्थ्य विभाग आगे है। करीब दस हजार सैंपल बगैर जांच कराए नष्ट कर दिए गए, लेकिन शासन को भेजी जा रही मॉनीटरिंग शीट के अनुसार सभी सैंपल की जांच की गई है। स्वास्थ्य विभाग से प्राप्त मॉनीटरिंग शीट के अनुसार एक से 20 नवंबर तक 19915 सैंपल आरटीपीसीआर जांच के लिए लिए गए। इन सभी सैंपल की जांच कराई गई है। हालांकि सैंपलिंग के नोडल अफसर डॉ. चंद्रा और सर्विलांस सेल प्रभारी डॉ. गौतम ने इसकी जानकारी से इनकार किया है। आंकड़ों में खेल का सिलसिला नया नहीं, कोविड से मौत, आरआरटी ट्रैंकिंग के आंकड़ों में भी खेल हो चुका है।
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