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Bareilly News: अंतिम दौर में जांच, दो दिन में आएगी रिपोर्ट
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सीडीओ की अध्यक्षता वाली टीम ने अभियंताओं, अधिकारियों व कर्मचारियों का लिया पक्ष
मंडलायुक्त की ओर से गठित टीम पीलीभीत से जुड़े मामलों की कर रही पड़ताल
बरेली। भूमि अधिग्रहण घोटाले की जांच अंतिम दौर में है। दो दिन में रिपोर्ट आ जाएगी। इसमें मूल्यांकनकर्ता निजी कंपनी के अधिकारियों-कर्मचारियों, सत्यापन करने वाले लोक निर्माण विभाग के अभियंताओं और लेखपालों तथा राजस्व विभाग के कुछ अधिकारियों की गर्दन फंस सकती है।
बरेली-सितारगंज हाईवे के चौड़ीकरण के लिए भूमि के अधिग्रहण के दौरान अधिक मूल्यांकन करके ज्यादा मुआवजा देने के छह मामले एनएचएआई की जांच में सामने आए थे। इनमें 37 करोड़ रुपये के भुगतान हुए थे। यह स्थिति सामने आने पर बाद मुख्य सचिव ने विस्तृत जांच कराने के आदेश दिए थे। जिलाधिकारी ने मुख्य विकास अधिकारी की अध्यक्षता में जांच टीम बनाई थी। सूत्रों के मुताबिक टीम ने अब तक दस ऐसे प्रकरण पकड़े हैं, जिनमें अधिक मुआवजा दिए जाने का संदेह है। टीम इन मामलों का परीक्षण कर रही है।
एनएचएआई, लोक निर्माण विभाग और लेखपालों से लेकर राजस्व अधिकारियों तक का पक्ष सुना गया है। अधिक मूल्यांकन और भू-उपयोग में परिवर्तन से जुड़े कुछ प्रकरण सामने आए हैं। इनमें सरकारी खजाने को कितना नुकसान हुआ और कौन-कौन कर्मचारी-अधिकारी इसके लिए जवाबदेह हैं, इसकी जांच चल रही है। इधर, मंडलायुक्त के निर्देश पर गठित टीम पीलीभीत से जुड़े मामलों को खंगाल रही है।
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अहम सवाल : मौके पर नहीं मिल रहे स्ट्रक्चर, कैसे हो मूल्यांकन
जिन स्ट्रक्चरों के बारे में अधिक मूल्यांकन का आरोप लग रहा है, वे मौके पर नहीं मिले। अब जांच टीम उनका मूल्यांकन कैसे करे? इस समस्या के समाधान के लिए एनएचएआई से पहले के फोटो और वीडियो तलब किए गए हैं। इसके आधार पर अभियंताओं से मूल्यांकन कराया जा रहा है। ब्यूरो
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मंडलायुक्त की ओर से गठित टीम पीलीभीत से जुड़े मामलों की कर रही पड़ताल
बरेली। भूमि अधिग्रहण घोटाले की जांच अंतिम दौर में है। दो दिन में रिपोर्ट आ जाएगी। इसमें मूल्यांकनकर्ता निजी कंपनी के अधिकारियों-कर्मचारियों, सत्यापन करने वाले लोक निर्माण विभाग के अभियंताओं और लेखपालों तथा राजस्व विभाग के कुछ अधिकारियों की गर्दन फंस सकती है।
बरेली-सितारगंज हाईवे के चौड़ीकरण के लिए भूमि के अधिग्रहण के दौरान अधिक मूल्यांकन करके ज्यादा मुआवजा देने के छह मामले एनएचएआई की जांच में सामने आए थे। इनमें 37 करोड़ रुपये के भुगतान हुए थे। यह स्थिति सामने आने पर बाद मुख्य सचिव ने विस्तृत जांच कराने के आदेश दिए थे। जिलाधिकारी ने मुख्य विकास अधिकारी की अध्यक्षता में जांच टीम बनाई थी। सूत्रों के मुताबिक टीम ने अब तक दस ऐसे प्रकरण पकड़े हैं, जिनमें अधिक मुआवजा दिए जाने का संदेह है। टीम इन मामलों का परीक्षण कर रही है।
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एनएचएआई, लोक निर्माण विभाग और लेखपालों से लेकर राजस्व अधिकारियों तक का पक्ष सुना गया है। अधिक मूल्यांकन और भू-उपयोग में परिवर्तन से जुड़े कुछ प्रकरण सामने आए हैं। इनमें सरकारी खजाने को कितना नुकसान हुआ और कौन-कौन कर्मचारी-अधिकारी इसके लिए जवाबदेह हैं, इसकी जांच चल रही है। इधर, मंडलायुक्त के निर्देश पर गठित टीम पीलीभीत से जुड़े मामलों को खंगाल रही है।
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अहम सवाल : मौके पर नहीं मिल रहे स्ट्रक्चर, कैसे हो मूल्यांकन
जिन स्ट्रक्चरों के बारे में अधिक मूल्यांकन का आरोप लग रहा है, वे मौके पर नहीं मिले। अब जांच टीम उनका मूल्यांकन कैसे करे? इस समस्या के समाधान के लिए एनएचएआई से पहले के फोटो और वीडियो तलब किए गए हैं। इसके आधार पर अभियंताओं से मूल्यांकन कराया जा रहा है। ब्यूरो