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अंतरराष्ट्रीय बालिका दिवसः बरेली में 1000 पुरुषों के सापेक्ष 912 महिलाएं
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Working Women
- फोटो : demo photo
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महिला अनुपात में प्रदेश के औसत से भी खराब है जिले का प्रदर्शन
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बरेली। महिलाओं और बेटियों के उत्थान के लिए सरकार तमाम कार्यक्रम चला रही है, लेकिन बरेली के लिंग अनुपात में महिलाओं व बच्चियों की संख्या अच्छी नहीं है। प्रदेश में 44वीं रैंक होने के साथ ही यहां बेटियों की औसत संख्या प्रदेश के औसत से कम है, जबकि जनसंख्या के मामले में बरेली प्रदेश में नौवें पायदान पर है। ऐसे में बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ के दावे बेमानी साबित हो जाते हैं।
जनगणना के आंकड़ों ने बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ के दावों की बरेली में सारी पोल खोल दी है। जनसंख्या में प्रदेश में नौवें नंबर पर रहे बरेली जिले के कुल निवासियों में 35.3 प्रतिशत लोग शहरी क्षेत्र में रहते हैं, जबकि अन्य शहरों में 22.3 प्रतिशत। लिंग अनुपात के मामले में यहां की स्थिति अच्छी नहीं है। प्रदेश में 1000 पुरुषों के सापेक्ष 912 महिलाओं का औसत है, लेकिन हमारे जिले में यह औसत 887 है, जो प्रदेश में 44वें नंबर पर है। हालांकि बरेली की यह स्थिति वर्ष 2011 में हुई जनगणना के आधार पर है, लेकिन अधिकारियों का कहना है कि इसके बाद भी स्थिति बहुत अच्छी नजर नहीं आती।
जनगणना के आंकड़ों ने बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ के दावों की बरेली में सारी पोल खोल दी है। जनसंख्या में प्रदेश में नौवें नंबर पर रहे बरेली जिले के कुल निवासियों में 35.3 प्रतिशत लोग शहरी क्षेत्र में रहते हैं, जबकि अन्य शहरों में 22.3 प्रतिशत। लिंग अनुपात के मामले में यहां की स्थिति अच्छी नहीं है। प्रदेश में 1000 पुरुषों के सापेक्ष 912 महिलाओं का औसत है, लेकिन हमारे जिले में यह औसत 887 है, जो प्रदेश में 44वें नंबर पर है। हालांकि बरेली की यह स्थिति वर्ष 2011 में हुई जनगणना के आधार पर है, लेकिन अधिकारियों का कहना है कि इसके बाद भी स्थिति बहुत अच्छी नजर नहीं आती।
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महिला सशक्तीकरण की योजनाएं
बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ, वूमेन हेल्पलाइन, उज्ज्वला, कामकाजी महिलाओं के लिए हॉस्टल, स्वधार गृह, महिलाओं के रोजगार के लिए स्टेप कार्यक्रम, नारी शक्ति पुरस्कार, राज्य व जिला महिला सम्मान, महिला शक्ति केंद्र और निर्भया आदि।
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