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Bareilly News: मुर्गे-मुर्गियों को बर्सल रोग से बचाएगा स्वदेशी टीका

Thu, 07 Mar 2024 02:13 AM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Thu, 07 Mar 2024 02:13 AM IST
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Indigenous vaccine will protect chickens from bursal disease
बरेली। मुर्गे-मुर्गियां जल्द संक्रामक बर्सल रोग से सुरक्षित होंगे। आईवीआरआई (भारतीय पशु चिकित्सा अनुसंधान संस्थान) की वैज्ञानिक द्वारा विकसित स्वदेशी टीके (एसवीपी गंबोरो वैक) का फार्मूला अहमदाबाद की हेस्टर बायो साइंसेज कंपनी को हस्तांतरित किया गया है।
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आईवीआरआई के जैव प्रोद्योगिकी विभाग की प्रधान वैज्ञानिक डॉ. सोहिनी डे के मुताबिक बर्सल रोग से संक्रमित चूजों व मुर्गियों में अवसाद, दस्त, सांस लेने में परेशानी, बर्सल क्षति और बी कोशिकाओं की कमी हो जाती है। इससे उनमें दूसरे संक्रमण की आशंका भी बढ़ जाती है। रोग प्रतिरोधक क्षमता लगातार घटने से उनकी मौत हो जाती है। इस रोग से सुरक्षित करने के लिए टीके के विकास में जैव प्रौद्योगिकी विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. मदन मोहन, वैज्ञानिक आर सरवनन व अन्य सहयोगी रहे। करीब 10 वर्षों के अनवरत शोध के बाद सफलता मिली है।
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विकसित टीका बाजार में मौजूद वैक्सीन से कई गुना प्रभावी है। इसे वयस्क मुर्गे-मुर्गियों के बजाय एक दिन की उम्र के चूजे को भी लगाकर सुरक्षित किया जा सकता है। बताया कि यह देश का पहला जीन आधारित पुन: संयोजक टीका है।
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वायरस से बचाता है मजबूत प्रतिरक्षा तंत्र
डॉ. सोहिनी डे ने बताया कि यह टीका प्रतिरक्षा तंत्र के अहम अंग बी-लिम्फोसाइट्स उत्पन्न करने वाले बर्सा फैब्रिसियस को बगैर नुकसान पहुंचाए सक्रिय करता है। टीका चूजों में मौजूद एंटीबॉडी को बरकरार रखता है। भारत सरकार के जैव प्रौद्योगिकी विभाग द्वारा प्रदत्त फंड के तहत मेक इन इंडिया अवधारणा पर टीके को विकसित किया है।


नई दिल्ली में समारोह के दौरान हुआ हस्तांतरण
विकसित टीका नई दिल्ली में आयोजित एग्री इनोवेट समारोह के दौरान हस्तांतरित किया गया। तकनीकी प्रबंधन इकाई के प्रभारी डाॅ. अनुज चौहान ने बताया कि टीके को 35 लाख रुपये लाइसेंस शुल्क, पांच फीसदी रॉयल्टी व लाइसेंस की शर्तों के साथ 15 साल के लिए हस्तांतरित किया गया है। समझौते पर आईवीआरआई निदेशक डॉ. त्रिवेणी दत्त और हेस्टर बायो साइंसेज के सीनियर प्रेसिडेंट डॉ. राम प्रकाश ने हस्ताक्षर किए।
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