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सिस्टम जाम में.. और उसे चलाने वाले भी
बरेली।
Updated Wed, 01 Nov 2017 02:18 AM IST
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जाम में पऊफंसे लगे लाोग
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कहते हैं जो बोते हैं, उसे काटना भी पड़ता है। बरेली शहर में जाम का मर्ज ऐसा ही हो चुका है। शहर में जाम के बीज उस सिस्टम ने ही बोए हैं जिसके ऊपर शहर को समस्याओं से बचाकर रखने की जिम्मेदारी है। ट्रैफिक पुलिस हो या थानों की, नगर निगम हो या शहर की व्यवस्थाएं संभालने वाले प्रशासनिक अधिकारी, सभी ने अपनी जिम्मेदारियों से मुंह चुराकर किसी न किसी कारण शहर को जाम करने में भूमिका अदा की है। आमतौर पर तो शहरवासी ही इस समस्या से दो-चार होते हैं, लेकिन मंगलवार को डीएम राघवेंद्र विक्रम सिंह चौपुला चौराहे से गुजरे तो उनकी गाड़ी भी यहां लगे भीषण जाम में फंस गई। डीएम की गाड़ी जाम में फंसने की खबर मिली तो यहां पहले से तमाशाई बने खड़े ट्रैफिक पुलिस के सिपाहियों में हड़कंप मच गया। डीएम के एस्कार्ट के पुलिस वालों के साथ उन्होंने भी डीएम की गाड़ी को जाम से निकलवाने की काफी कोशिश की, लेकिन जाम इतना जबर्दस्त था कि उनकी कोशिश का भी कोई नतीजा नहीं निकला। काफी देर डीएम जाम में फंसे रहे। जब जाम थोड़ा हल्का पड़ा तब उनकी गाड़ी निकल पाई।
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डेढ़ महीने बाद भी नहीं उठा सड़क पर गिरा पेड़
सिस्टम की बेपरवाही का एक नजारा डेलापीर-सौफुटा रोड तिराहे पर भी देखा जा सकता है। यहां पाकड़ का एक विशाल पेड़ करीब डेढ़ महीने पहले छह गया था, जो दो दिन तो ऐसे ही पड़ा रहा। सड़क भी दो दिन बंद रही। इसके बाद वन विभाग ने एक ठेकेदार के जरिये उसका ऊपरी हिस्सा तो कटवा दिया लेकिन पेड़ का विशालकाय तना डेढ़ महीने बाद भी आधी सड़क घेरकर वैसे ही पड़ा है। इसकी वजह से एक तो सड़क पर ट्रैफिक फंसकर निकल रहा है, दूसरी तरफ तने की आड़ में फल और सब्जियों के ठेलों के साथ टेंपो और डग्गामार गाड़ियां भी खड़ी होने लगी हैं। सिस्टम की बेपरवाही ने इस सड़क से गुजरने वालों के लिए एक नई समस्या को जन्म दे दिया है।
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अगर यह एचटी लाइन टूट गई तो क्या होगा
करीब दो महीने बीत चुके, नवरात्र शुरू होने से पहले आई आंधी के दौरान पीलीभीत रोड पर आवास विकास कॉलोनी के पास एक बड़े पेड़ की मोटी शाखा टूटकर यहां से गुजर रही हाईटेंशन लाइन पर गिरी और तारों के बीच फंसकर रह गई। दो महीने से यह शाखा हाईटेंशन लाइन के तारों में यूं ही फंसी पड़ी है लेकिन बिजली विभाग के लोगों ने इसे निकलवाने की जरूरत नहीं महसूस की। जब तेज हवा चलती है तो पेड़ की शाखा के वजन से हाईटेंशन लाइन के तार तेजी से झूलने लगते हैं। ऐसे में डर पैदा हो जाता है कि कहीं वे टूटकर न गिर पड़ें और कोई हादसा न हो जाए, लेकिन सिस्टम को इससे क्या मतलब।
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डेढ़ महीने बाद भी नहीं उठा सड़क पर गिरा पेड़
सिस्टम की बेपरवाही का एक नजारा डेलापीर-सौफुटा रोड तिराहे पर भी देखा जा सकता है। यहां पाकड़ का एक विशाल पेड़ करीब डेढ़ महीने पहले छह गया था, जो दो दिन तो ऐसे ही पड़ा रहा। सड़क भी दो दिन बंद रही। इसके बाद वन विभाग ने एक ठेकेदार के जरिये उसका ऊपरी हिस्सा तो कटवा दिया लेकिन पेड़ का विशालकाय तना डेढ़ महीने बाद भी आधी सड़क घेरकर वैसे ही पड़ा है। इसकी वजह से एक तो सड़क पर ट्रैफिक फंसकर निकल रहा है, दूसरी तरफ तने की आड़ में फल और सब्जियों के ठेलों के साथ टेंपो और डग्गामार गाड़ियां भी खड़ी होने लगी हैं। सिस्टम की बेपरवाही ने इस सड़क से गुजरने वालों के लिए एक नई समस्या को जन्म दे दिया है।
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अगर यह एचटी लाइन टूट गई तो क्या होगा
करीब दो महीने बीत चुके, नवरात्र शुरू होने से पहले आई आंधी के दौरान पीलीभीत रोड पर आवास विकास कॉलोनी के पास एक बड़े पेड़ की मोटी शाखा टूटकर यहां से गुजर रही हाईटेंशन लाइन पर गिरी और तारों के बीच फंसकर रह गई। दो महीने से यह शाखा हाईटेंशन लाइन के तारों में यूं ही फंसी पड़ी है लेकिन बिजली विभाग के लोगों ने इसे निकलवाने की जरूरत नहीं महसूस की। जब तेज हवा चलती है तो पेड़ की शाखा के वजन से हाईटेंशन लाइन के तार तेजी से झूलने लगते हैं। ऐसे में डर पैदा हो जाता है कि कहीं वे टूटकर न गिर पड़ें और कोई हादसा न हो जाए, लेकिन सिस्टम को इससे क्या मतलब।
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