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महंगाई के आगे ‘रावण’ का कद भी पड़ गया छोटा

Tue, 12 Oct 2021 02:08 AM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Tue, 12 Oct 2021 02:08 AM IST
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In front of inflation, the stature of 'Ravana' also got smaller.
मलूकपुर में रावण का पुतला बनाते कारीगर।

अब महज बीस फुट के बनाए जा रहे पुतले, पहले बनते थे 40 फुट के

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बरेली। रामलीला में फूंके जाने वाले रावण, मेघनाद और कुंभकर्ण के पुतले भी महंगाई का शिकार हो चले है। ज्यादातर रामलीला के आयोजनों में सिर्फ रावण का पुतला फूंककर ही काम चला लिया जाता है। खर्च बचाने के लिए मेघनाद और कुंभकर्ण के पुतलों का दहन नहीं किया जाता। पुतलों की ऊंचाई पर भी महंगाई का असर हुआ है। पहले 40 से 50 फुट के पुतले बनाए जाते थे, जो अब महज 20-25 फुट के ही रह गए हैं।
पिछले दो साल से कोरोना के चलते रामलीला का मंचन कम ही हुआ है। इस वजह से पुतला बनाने वाले लोगों को आर्डर भी ना के बराबर मिले। शहर में पुतला बनाने का काम करने वाले कई परिवार अब मुफलिसी में दिन गुजारने को मजबूर है। मुनाफा न होने से पीढ़ियों से इस काम को कर रहे लोग अब इसे छोड़ने की तैयारी में है। कई परिवार इस काम से किनारा कर भी चुके हैं। मलूकपुर में पुतला बनाने का काम करने वाले संजय ने बताया हमारे परिवार में पीढ़ियों से रावण का पुतला बनाने का काम होता चला आ रहा था। पिछले साल से जितने बुरे हालात बने हैं, वैसा समय कभी नहीं आया। उन्होंने बताया पहले सभी भाई इस काम से जुड़े हुए थे, अब परिवार के बाकी सदस्य नौकरी छोड़कर पुतला बनाने के लिए आते ही नहीं हैं। उन्होंने बताया कोरोना संक्रमण के चलते रामलीला मंचन में कमी आई है। कई गांव में अब रामलीला का मंचन बंद कर दिया गया। पिछले साल तो ज्यादातर जगहों पर रामलीला का मंचन पूरी तरह से बंद रहा। इस वजह से आर्डर में भी गिरावट आई है। उन्होंने बताया इस साल अब तक सिर्फ तीन आर्डर मिले हैं। जो लोग पुतला खरीदने आ भी रहे हैं, वह छोटे और सस्ते दाम वाले पुतले की डिमांड कर रहे हैं।
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20 से 25 फिट तक सिमटी पुतले की लंबाई

गणेशनगर में पुतला बनाने का काम करने वाले कारीगर सोनू ने बताया कि पहले 40 से 50 फुट ऊंचाई वाले पुतले बनाए जाते थे। इसमें ज्यादा से ज्यादा पटाखे लगाने के साथ तरह-तरह से सजावट की जाती थी। अब सिर्फ 20 से 25 फुट ऊंचाई वाले पुतले की ही डिमांड है। कॉलोनियों में रावण दहन करने वाले लोग 10-10 फुट ऊंचाई वाले पुतलों की ही डिमांड करते हैं।
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गायब हो गए मेघनाथ और कुंभकर्ण के पुतले

कुछ समय पहले तक रामलीलाओं में रावण के साथ मेघनाथ और कुंभकर्ण के पुतले का भी दहन होता था। अब महंगाई के चलते ज्यादातर जगह सिर्फ एक ही पुतले के दहन को ही वरीयता दी जाती है। चुनिंदा बड़ी रामलीलाओं में ही तीनों के पुतले का दहन होता है।
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