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अवैध बसेंः कई राज्यों के हर बड़े शहर तक नेटवर्क
सार
एक-एक रात लाखों की.. पुलिस और आरटीओ सब जेब में
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रुपये
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विस्तार
दिल्ली-पंजाब, हरियाणा और राजस्थान के साथ यूपी के तमाम शहरों के लिए चलती हैं बसें
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माफियागिरी की शुरुआत के बाद अब अलग-अलग बस संचालकों के बीच गैंगवार के हालात
बरेली। शाम को अंधेरा ढलने के बाद सुबह होने तक अवैध बसें चलाने वाले लोग लाखों का कारोबार कर लेते हैं। खासतौर पर स्लीपर बसों की एक ही रात की कमाई रोडवेज बसों से कई गुना ज्यादा होती है। शहर से लेकर देहात के प्रमुख इलाकों तक इन बसों के अड्डे हैं। सरकार को अवैध कारोबार से करोड़ों की क्षति होने के बावजूद न कभी आरटीओ की ओर से कार्रवाई होती है न पुलिस की तरफ से। हद यह है कि कई बार इन बसों के कारिंदे रोडवेज बसों के स्टॉपेज से भी यात्रियों को उठा ले जाते हैं।
अवैध निजी बसों का संचालन कई सालों से हो रहा है। हर बड़े शहर की तरह बरेली में भी मुख्यालय से लेकर देहात तक इन बसों के दर्जनों अड्डे हैं जहां खुलेआम बुकिंग ऑफिस खोलकर यात्रियों को टिकट बेचे जाते हैं। सूत्रों के मुताबिक हर महीने करोड़ों की कमाई वाला इस कारोबार में कई माफिया किस्म के लोग भी उतर आए हैं जिसके बाद अलग-अलग रूट पर दावेदारी शुरू हो गई है। अब तक अलग-अलग ग्रुपों के बीच पुलिस और आरटीओ के कुछ अफसर ही तालमेल कराते रहे हैं लेकिन अब इन ग्रुपों के बीच हालात गैंगवार जैसे बनने लगे हैं। रविवार रात हाफिजगंज में 90 सवारियों से भरी बस को अगवा कर घंटे भर तक अपने कब्जे में रखने की घटना इसी का नतीजा थी।
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सूत्रों के मुताबिक अगवा की गई बस के कंडक्टर की सूचना पर पुलिस रविवार हरकत में तो आई और बस को बरामद भी कर लिया लेकिन पुलिस का जोर मामले को रफादफा करने पर ज्यादा रहा। इसी वजह से इस मामले में किसी से कोई तहरीर लिए बगैर बस को बहराइच के लिए रवाना कर दिया गया। बताया जाता है कि पुलिस को अच्छी तरह यह जानकारी थी कि बस को अगवा करने वाले कौन लोग थे लेकिन फिर भी मामला रफादफा कर दिया गया।
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माफियाराज..! परिवहन मंत्री की डांट के बाद भी नहीं हुई सख्त कार्रवाई
बरेली/रिठौरा। हफ्ता भर भी नहीं गुजरा जब कुछ व्यापारी नेताओं की शिकायत पर परिवहन मंत्री अशोक कटारिया ने नाराजगी जताते हुए बरेली से दूसरे राज्यों के बीच चलाई जा रही अवैध बसों पर कार्रवाई का निर्देश दिया था। मंत्री की डांट पर परिवहन विभाग के अधिकारी रात में ही बसों को पकड़ने निकले, तमाम बसों को पकड़ा भी लेकिन ऐसी कार्रवाई नहीं हुई जो उनका संचालन रोक पाती। अगले ही दिन से फिर इन बसों का पहले की तरह संचालन शुरू हो गया।
नेपाल बार्डर, पीलीभीत, पूरनपुर, नवाबगंज, क्योलड़िया, हाफिजगंज और रिठौरा में अवैध बसों के अड्डे हैं। अवैध बस संचालकों ने खुलेआम बड़ा नेटवर्क हाईवे किनारे बड़े-बड़े बोर्ड लगाकर बना रखा है। अधिकारी सबकुछ देखकर भी बेखबर रहते हैं। इन अड्डों से राजस्थान, पंजाब, दिल्ली समेत तमाम स्थानों पर बसों का संचालन हो रहा है। करीब सप्ताह भर पहले परिवहन मंत्री की फटकार के बाद विभाग ने बरेली शहर से चल रही अवैध बसों पर कार्रवाई की थी लेकिन देहात में बसों के संचालन पर कोई फर्क नहीं पड़ा। न किसी अधिकारी ने कार्रवाई की जहमत उठाई।
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माफियागिरी की शुरुआत के बाद अब अलग-अलग बस संचालकों के बीच गैंगवार के हालात बरेली। शाम को अंधेरा ढलने के बाद सुबह होने तक अवैध बसें चलाने वाले लोग लाखों का कारोबार कर लेते हैं। खासतौर पर स्लीपर बसों की एक ही रात की कमाई रोडवेज बसों से कई गुना ज्यादा होती है। शहर से लेकर देहात के प्रमुख इलाकों तक इन बसों के अड्डे हैं। सरकार को अवैध कारोबार से करोड़ों की क्षति होने के बावजूद न कभी आरटीओ की ओर से कार्रवाई होती है न पुलिस की तरफ से। हद यह है कि कई बार इन बसों के कारिंदे रोडवेज बसों के स्टॉपेज से भी यात्रियों को उठा ले जाते हैं।
अवैध निजी बसों का संचालन कई सालों से हो रहा है। हर बड़े शहर की तरह बरेली में भी मुख्यालय से लेकर देहात तक इन बसों के दर्जनों अड्डे हैं जहां खुलेआम बुकिंग ऑफिस खोलकर यात्रियों को टिकट बेचे जाते हैं। सूत्रों के मुताबिक हर महीने करोड़ों की कमाई वाला इस कारोबार में कई माफिया किस्म के लोग भी उतर आए हैं जिसके बाद अलग-अलग रूट पर दावेदारी शुरू हो गई है। अब तक अलग-अलग ग्रुपों के बीच पुलिस और आरटीओ के कुछ अफसर ही तालमेल कराते रहे हैं लेकिन अब इन ग्रुपों के बीच हालात गैंगवार जैसे बनने लगे हैं। रविवार रात हाफिजगंज में 90 सवारियों से भरी बस को अगवा कर घंटे भर तक अपने कब्जे में रखने की घटना इसी का नतीजा थी।
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सूत्रों के मुताबिक अगवा की गई बस के कंडक्टर की सूचना पर पुलिस रविवार हरकत में तो आई और बस को बरामद भी कर लिया लेकिन पुलिस का जोर मामले को रफादफा करने पर ज्यादा रहा। इसी वजह से इस मामले में किसी से कोई तहरीर लिए बगैर बस को बहराइच के लिए रवाना कर दिया गया। बताया जाता है कि पुलिस को अच्छी तरह यह जानकारी थी कि बस को अगवा करने वाले कौन लोग थे लेकिन फिर भी मामला रफादफा कर दिया गया।
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माफियाराज..! परिवहन मंत्री की डांट के बाद भी नहीं हुई सख्त कार्रवाई
बरेली/रिठौरा। हफ्ता भर भी नहीं गुजरा जब कुछ व्यापारी नेताओं की शिकायत पर परिवहन मंत्री अशोक कटारिया ने नाराजगी जताते हुए बरेली से दूसरे राज्यों के बीच चलाई जा रही अवैध बसों पर कार्रवाई का निर्देश दिया था। मंत्री की डांट पर परिवहन विभाग के अधिकारी रात में ही बसों को पकड़ने निकले, तमाम बसों को पकड़ा भी लेकिन ऐसी कार्रवाई नहीं हुई जो उनका संचालन रोक पाती। अगले ही दिन से फिर इन बसों का पहले की तरह संचालन शुरू हो गया।नेपाल बार्डर, पीलीभीत, पूरनपुर, नवाबगंज, क्योलड़िया, हाफिजगंज और रिठौरा में अवैध बसों के अड्डे हैं। अवैध बस संचालकों ने खुलेआम बड़ा नेटवर्क हाईवे किनारे बड़े-बड़े बोर्ड लगाकर बना रखा है। अधिकारी सबकुछ देखकर भी बेखबर रहते हैं। इन अड्डों से राजस्थान, पंजाब, दिल्ली समेत तमाम स्थानों पर बसों का संचालन हो रहा है। करीब सप्ताह भर पहले परिवहन मंत्री की फटकार के बाद विभाग ने बरेली शहर से चल रही अवैध बसों पर कार्रवाई की थी लेकिन देहात में बसों के संचालन पर कोई फर्क नहीं पड़ा। न किसी अधिकारी ने कार्रवाई की जहमत उठाई।