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सेहत की बात: शरीर में बन रही गांठों को बिल्कुल न करें अनदेखा, ये हैं लिंफोमा ब्लड कैंसर के लक्षण
Fri, 15 Sep 2023 12:06 PM IST
बरेली ब्यूरो
अमर उजाला ब्यूरो, बरेली
अमर उजाला ब्यूरो, बरेली
Published by: बरेली ब्यूरो
Updated Fri, 15 Sep 2023 12:06 PM IST
सार
विश्व लिंफोमा जागरूकता दिवस हर साल 15 सितंबर को मनाया जाता है। लिंफोमा कैंसर गंभीर बीमारी है।विशेषज्ञ चिकित्सक के मुताबिक इसके प्रति जागरूकता की कमी है। अक्सर शरीर में अगर कहीं कोई गांठ हैं तो उसको नजरअंदाज कर दिया जाता है। यह लिंफोमा का शुरुआती लक्षण हो सकता है।
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सांकेतिक तस्वीर
- फोटो : istock
विस्तार
शरीर की लसिका ग्रंथियां अगर सूखी होने के साथ गांठें बनने लगें, वजन घटे और रात में पसीना आए तो इसे नजरंदाज न करें। यह लिंफोमा ब्लड कैंसर हो सकता है। लेटलतीफी से जान सांसत में पड़ सकती है। इसलिए बिल्कुल लापरवाही न बरतें, तुरंत किसी विशेषज्ञ डॉक्टर को दिखाएं।
बरेली के वरिष्ठ कैंसर विशेषज्ञ डॉ. पवन मेहरोत्रा के मुताबिक लिंफोमा के प्रति जागरूकता की कमी है। अक्सर शरीर में अगर कहीं कोई गांठ हैं तो उसको नजरअंदाज कर दिया जाता है। यह लिंफोमा का शुरुआती लक्षण हो सकता है।
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समय से इलाज मिलने पर 60 से 70 फीसदी मरीज ठीक हो जाते हैं। अब तक के शोध में इस कैंसर की वजह प्रदूषण, अनुचित खानपान, खेती में पेस्टीसाइड के अधिक उपयोग को माना गया है। बायोप्सी से इसकी पहचान होती है। लिंफोमा के पहले स्टेज में कीमोथेरेपी व ऑपरेशन से मरीज के स्वस्थ होने की उम्मीद 99 फीसदी होती है।
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बरेली के वरिष्ठ कैंसर विशेषज्ञ डॉ. पवन मेहरोत्रा के मुताबिक लिंफोमा के प्रति जागरूकता की कमी है। अक्सर शरीर में अगर कहीं कोई गांठ हैं तो उसको नजरअंदाज कर दिया जाता है। यह लिंफोमा का शुरुआती लक्षण हो सकता है।
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समय से इलाज मिलने पर 60 से 70 फीसदी मरीज ठीक हो जाते हैं। अब तक के शोध में इस कैंसर की वजह प्रदूषण, अनुचित खानपान, खेती में पेस्टीसाइड के अधिक उपयोग को माना गया है। बायोप्सी से इसकी पहचान होती है। लिंफोमा के पहले स्टेज में कीमोथेरेपी व ऑपरेशन से मरीज के स्वस्थ होने की उम्मीद 99 फीसदी होती है।
प्रतिमाह चार मरीज आ रहे चपेट में
डॉ. पवन के मुताबिक ओपीडी में प्रतिमाह लिंफोमा की चपेट में तीन से चार मरीज मिल रहे हैं जो दूसरी-तीसरी स्टेज में होते हैं। पहले स्टेज में स्पष्ट लक्षण न होने और जागरूकता के अभाव में लोग बीमारी का अंदाजा नहीं लगा पाते। बीमारी बढ़ने पर आखिर में जांच के लिए पहुंचते हैं। हालांकि, इलाज से मरीजों के स्वस्थ होने की संभावना रहती है।
इस बीमारी के कारण
- किसी भी संक्रमित व्यक्ति का संपर्क।
- प्रतिरोधक क्षमता का असंतुलित होना।
- खानपान के उत्पादों में रसायनिक पदार्थों का उपयोग।
- धूम्रपान और तंबाकू का अधिक सेवन।