{"_id":"57eec10e4f1c1bcb4b5742ac","slug":"if-they-improve-not-ready-to-babu-afsr","type":"story","status":"publish","title_hn":"ये अफसर- बाबू तो सुधरने को तैयार ही नहीं","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
ये अफसर- बाबू तो सुधरने को तैयार ही नहीं
ब्ययूराो, अमर उजाला बरेली।
Updated Sat, 01 Oct 2016 01:16 AM IST
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डीएम पंकज यादव तो निर्धारित समय पर अपने दफ्तर में बैठकर काम निपटा रहे हैं लेकिन अन्य विभागों के अफसरों और कर्मचारियों पर इसका असर पड़ता नहीं दिख रहा है। उनकी अपनी कार्यशैली है। जब चाहें आएंगे, जब चाहें जाएंगे। शुक्रवार को सुबह अमर उजाला की टीम ने फिर कई सरकारी दफ्तरों के खुलने के समय और उसके बाद की स्थिति देखी तो सच सामने आया। कई विभागों में अधिकारी और कर्मचारी अपनी कुर्सियों से नदारद थे।
विकास भवन के लोग छापे से भी नहीं सुधरे
विकास भवन में अफसर और कर्मचारी डीएम के छापा मार कार्रवाई के बाद भी नहीं सुधरे। अब भी स्टाफ तय समय से लेट पहुंच रहा है। डीएम ने कुछ दिन पहले छापा मारा था। इसमें 11 अफसर समेत 56 कर्मचारी गायब मिले थे। 27 लेट आए थे। अमर उजाला ने शुक्रवार को सुबह 10 से 10. 45 बजे तक विकास भवन मेें दफ्तरों का जायजा लिया तो हालात बदले नजर नहीं आ रहे थे-
10.05 बजे डीआरडीए परियोजना निदेशक साहित्य प्रकाश मिश्र रोजमर्रा का काम काज निपटा रहे थे। डीडीओ राम रक्षपाल की कुर्सी खाली थी। उनके विभाग का ज्यादातर स्टाफ भी नदारद दिखा। डीपीआरओ टीसी पांडेय मौजूद मिले। डीएसटीओ नरेंद्र यादव भी मौजूद थे।
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10.10 बजे तक जिला कार्यक्रम अधिकारी बुद्धि मिश्रा की कुर्सी खाली थी। एक कर्मचारी मेज के पास खड़ी थी। कुछ अन्य कर्मचारी भी थे। समाज कल्याण विभाग में न तो समाज कल्याण अधिकारी आए थे। कर्मचारियों के पटल भी खाली थी।
10.15 बजे आरईएस के एक्सईएन मोहम्मद अकरम का कक्ष खाली था। एई, जेई भी नहीं आए थे। कक्ष के बाहर चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी मौजूद थे। फोटो खींचने पर कर्मचारी बोले- ऐसा मत करो। साहब नाराज होेंगे।
10.20 बजे सीवीओ डा. विनोद कुमार अपनी सीट पर मौजूद थे। इस समय तक उनका ज्यादातर स्टाफ भी पहुंच चुका था। एआर कोआपरेटिव वीर विक्रम की कुर्सी खाली थी। वह इस समय तक दफ्तर नहीं आए थे।
10.25 बजे जिला कृषि रक्षा अधिकारी रामतेज यादव की कुर्सी खाली थी। उनके कर्मचारियों ने बताया कि साहब के पास जिला कृषि अधिकारी का चार्ज भी है। बाद में पता चला कि वह अपने दूसरे दफ्तर में मौजूद थे। मत्स्य विभाग के कार्यकारी अधिकारी जीएस गंगवार अपनी सीट पर थे।
10.30 बजे लघु सिंचाई विभाग में सहायक अभियंता वीर सिंह मौजूद नहीं थे। युवा कल्याण अधिकारी विवेक श्रीवास्तव की सीट खाली थी। उनके स्टाफ ने बताया कि वह ब्लाक का काम निपटाने गए हैं क्योंकि उनके पास वहां का चार्ज है।
.......................
नगर निगम में अपर नगर आयुक्त को छोड़ सब गायब
10:15 बजे नगर निगम में अधिकतर विभागों में सन्नाटा पसरा था। नगर आयुक्त और मेयर कक्ष पर ताला लटका था। बताया गया कि नगर आयुक्त शीलधर यादव शहर से बाहर हैं। पर्यावरण अभियंता का कक्ष खुला था, इसमें कर्मचारी बैठे थे। शिकायत प्रकोष्ठ में कर्मचारी ड्यूटी पर दिखे। कर विभाग में प्रधानमंत्री आवास योजना के फार्म जमा करने वालों की भीड़ थी। अधिशासी अभियंता कक्ष, उद्यान विभाग, रिकार्ड विभाग में ताला लटका था। स्वास्थ्य अधिकारी के कक्ष में कोई कर्मचारी नहीं था। निर्माण विभाग में सिर्फ एक कर्मी सुरैया आई थीं। केवल अपर नगर आयुक्त ईश शक्ति सिंह ही सुबह 10 बजे से ड्यूटी पर मौजूद रहे। फरियादियों को इन्हीं ने सुना।
बीएसए दफ्तर
10.20 बजे जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी कार्यालय में बीएसए ऐश्वर्या लक्ष्मी यादव का चैंबर खाली था। तीन कर्मचारी गैरहाजिर थे, जिनके बारे में बताया गया- जगदीश ड्राइवर बीएसए के साथ गाड़ी पर हैं। रियासत हुसैन की नाइट ड्यूटी बताई गई। चतुर्थश्रेणी कर्मचारी द्रोपदी के बारे में बताया कि गया वह सीएल पर हैं। वहीं बड़े बाबू नरेश कुमार भी सीएल पर बताए गए। इसके अलावा भी हाजिरी लगाने वाले कुछ कर्मचारी अपनी कुर्सियों से नदारद थे। बाद में बीएसए ने बताया कि कुछ काम था इसलिए वह शुक्रवार को अपने दफ्तर में देरी से पहुंचीं।
डीआईओएस दफ्तर :
10.25 बजे जिला विद्यालय निरीक्षक कार्यालय में सात कर्मचारी गैर हाजिर थे। उनके बारे में बताया गया कि कुछ सीएल पर हैं और कुछ हाईकोर्ट गए हुए हैं। कलीम खां पिछले कुछ दिनों से सीएल पर बताए गए। अजीत सक्सेना और राजेंद्र कुमार के बारे में बताया गया कि वह डीआईओएस के साथ हाईकोर्ट गए हैं। डीआईओएस जीआईसी प्रधानाचार्य रामपाल सिंह को चार्ज देकर गए थे, वह भी चैंबर में नहीं थे। प्रशासनिक अधिकारी राजकमल सक्सेना के बारे में बताया गया कि वह पितृ विसर्जन के लिए अप्लीकेशन लगाकर गए हुए हैं। अधिकारी के न होने से कई कर्मचारी अपनी कुर्सी पर नहीं बैठे पाए गए इसलिए पूरा दफ्तर खाली जैसा नजर आ रहा था।
............
बिजली विभाग: साहब 11 बजे बाद मिलेंगे
ग्रामीण खंड प्रथम में 10.25 बजे कार्यालय बंद था। कुछ लोग अपने बिल आदि समस्या लेकर खड़े हुए थे। पूछने पर एक कर्मचारी ने बताया कि ‘बड़े’ साहब लोकेश जुनेजा (अधिशासी अभियंता) तो 11 बजे से पहले नहीं मिलेंगे। अन्य अफसर भी नदारद मिले।
चीफ इंजीनियर कार्यालय परिसर में ही ग्रामीण मीटर सेक्शन है। इसके अधिशासी अभियंता निसार अहमद हैं। यहां 10.30 बजे कार्यालय खुला था। लाइट और फैन चालू था लेकिन कुर्सी खाली पड़ी थी। यहां के ‘बड़े’ साहब निसार अहमद के बारे में बताया गया कि वह रामपुर बाग में विद्युत उपभोक्ता व्यथा निवारण फोरम में मिलेंगे क्योंकि वह फोरम में सदस्य भी हैं। 10.45 बजे वहां पहुंचे तो पूरा ऑफिस ही बंद था।
कलक्ट्रेट
10.15 बजे एफएसडीए आफिस में जिला अभिहित अधिकारी और औषधि निरीक्षक नवनीत यादव नहीं थे। जबकि इनके यहां रजिस्ट्रेशन कराने लिए कुछ लोग इंतजार करते देखे गए।
10.17 तक सहायक आयुक्त (वित्त) कार्यालय में दो चतुर्थश्रेणी कर्मचारी ही थे। जो कि टेबल और कुर्सियों की सफाई कर रहे थे। वहां आठ लिपिकों के बैठने के लिए कुर्सिंया हैं, उनमें से किसी पर कोई भी कर्मचारी नहीं था। यहां तक इस विभाग के अधिकारी भी मौजूद नहीं थे।
तहसील परिसर
10.20 तहसील सदर के प्रशासनिक अधिकारी का कार्यालय खुला था लेकिन वह नहीं थे। लेखपालों के कार्यालयों की पूरी लाइन में ताले लगे हुए थे। बताया गया कि 11 बजे के आस-पास ही लेखपाल और उनके कारिंदे आते हैं। उसी के बाद ही प्रमाणपत्रों की जांच और उनके आधार पर रिपोर्ट लगाने का काम शुरू होता है। रजिस्ट्रार कानूनगो आफिस में एक दो कर्मचारी ही थे, जबकि यहां सात कर्मचारियों के बैठने की व्यवस्था है।
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विकास भवन के लोग छापे से भी नहीं सुधरे
विकास भवन में अफसर और कर्मचारी डीएम के छापा मार कार्रवाई के बाद भी नहीं सुधरे। अब भी स्टाफ तय समय से लेट पहुंच रहा है। डीएम ने कुछ दिन पहले छापा मारा था। इसमें 11 अफसर समेत 56 कर्मचारी गायब मिले थे। 27 लेट आए थे। अमर उजाला ने शुक्रवार को सुबह 10 से 10. 45 बजे तक विकास भवन मेें दफ्तरों का जायजा लिया तो हालात बदले नजर नहीं आ रहे थे-
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10.05 बजे डीआरडीए परियोजना निदेशक साहित्य प्रकाश मिश्र रोजमर्रा का काम काज निपटा रहे थे। डीडीओ राम रक्षपाल की कुर्सी खाली थी। उनके विभाग का ज्यादातर स्टाफ भी नदारद दिखा। डीपीआरओ टीसी पांडेय मौजूद मिले। डीएसटीओ नरेंद्र यादव भी मौजूद थे।
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10.10 बजे तक जिला कार्यक्रम अधिकारी बुद्धि मिश्रा की कुर्सी खाली थी। एक कर्मचारी मेज के पास खड़ी थी। कुछ अन्य कर्मचारी भी थे। समाज कल्याण विभाग में न तो समाज कल्याण अधिकारी आए थे। कर्मचारियों के पटल भी खाली थी।
10.15 बजे आरईएस के एक्सईएन मोहम्मद अकरम का कक्ष खाली था। एई, जेई भी नहीं आए थे। कक्ष के बाहर चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी मौजूद थे। फोटो खींचने पर कर्मचारी बोले- ऐसा मत करो। साहब नाराज होेंगे।
10.20 बजे सीवीओ डा. विनोद कुमार अपनी सीट पर मौजूद थे। इस समय तक उनका ज्यादातर स्टाफ भी पहुंच चुका था। एआर कोआपरेटिव वीर विक्रम की कुर्सी खाली थी। वह इस समय तक दफ्तर नहीं आए थे।
10.25 बजे जिला कृषि रक्षा अधिकारी रामतेज यादव की कुर्सी खाली थी। उनके कर्मचारियों ने बताया कि साहब के पास जिला कृषि अधिकारी का चार्ज भी है। बाद में पता चला कि वह अपने दूसरे दफ्तर में मौजूद थे। मत्स्य विभाग के कार्यकारी अधिकारी जीएस गंगवार अपनी सीट पर थे।
10.30 बजे लघु सिंचाई विभाग में सहायक अभियंता वीर सिंह मौजूद नहीं थे। युवा कल्याण अधिकारी विवेक श्रीवास्तव की सीट खाली थी। उनके स्टाफ ने बताया कि वह ब्लाक का काम निपटाने गए हैं क्योंकि उनके पास वहां का चार्ज है।
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नगर निगम में अपर नगर आयुक्त को छोड़ सब गायब
10:15 बजे नगर निगम में अधिकतर विभागों में सन्नाटा पसरा था। नगर आयुक्त और मेयर कक्ष पर ताला लटका था। बताया गया कि नगर आयुक्त शीलधर यादव शहर से बाहर हैं। पर्यावरण अभियंता का कक्ष खुला था, इसमें कर्मचारी बैठे थे। शिकायत प्रकोष्ठ में कर्मचारी ड्यूटी पर दिखे। कर विभाग में प्रधानमंत्री आवास योजना के फार्म जमा करने वालों की भीड़ थी। अधिशासी अभियंता कक्ष, उद्यान विभाग, रिकार्ड विभाग में ताला लटका था। स्वास्थ्य अधिकारी के कक्ष में कोई कर्मचारी नहीं था। निर्माण विभाग में सिर्फ एक कर्मी सुरैया आई थीं। केवल अपर नगर आयुक्त ईश शक्ति सिंह ही सुबह 10 बजे से ड्यूटी पर मौजूद रहे। फरियादियों को इन्हीं ने सुना।
बीएसए दफ्तर
10.20 बजे जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी कार्यालय में बीएसए ऐश्वर्या लक्ष्मी यादव का चैंबर खाली था। तीन कर्मचारी गैरहाजिर थे, जिनके बारे में बताया गया- जगदीश ड्राइवर बीएसए के साथ गाड़ी पर हैं। रियासत हुसैन की नाइट ड्यूटी बताई गई। चतुर्थश्रेणी कर्मचारी द्रोपदी के बारे में बताया कि गया वह सीएल पर हैं। वहीं बड़े बाबू नरेश कुमार भी सीएल पर बताए गए। इसके अलावा भी हाजिरी लगाने वाले कुछ कर्मचारी अपनी कुर्सियों से नदारद थे। बाद में बीएसए ने बताया कि कुछ काम था इसलिए वह शुक्रवार को अपने दफ्तर में देरी से पहुंचीं।
डीआईओएस दफ्तर :
10.25 बजे जिला विद्यालय निरीक्षक कार्यालय में सात कर्मचारी गैर हाजिर थे। उनके बारे में बताया गया कि कुछ सीएल पर हैं और कुछ हाईकोर्ट गए हुए हैं। कलीम खां पिछले कुछ दिनों से सीएल पर बताए गए। अजीत सक्सेना और राजेंद्र कुमार के बारे में बताया गया कि वह डीआईओएस के साथ हाईकोर्ट गए हैं। डीआईओएस जीआईसी प्रधानाचार्य रामपाल सिंह को चार्ज देकर गए थे, वह भी चैंबर में नहीं थे। प्रशासनिक अधिकारी राजकमल सक्सेना के बारे में बताया गया कि वह पितृ विसर्जन के लिए अप्लीकेशन लगाकर गए हुए हैं। अधिकारी के न होने से कई कर्मचारी अपनी कुर्सी पर नहीं बैठे पाए गए इसलिए पूरा दफ्तर खाली जैसा नजर आ रहा था।
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बिजली विभाग: साहब 11 बजे बाद मिलेंगे
ग्रामीण खंड प्रथम में 10.25 बजे कार्यालय बंद था। कुछ लोग अपने बिल आदि समस्या लेकर खड़े हुए थे। पूछने पर एक कर्मचारी ने बताया कि ‘बड़े’ साहब लोकेश जुनेजा (अधिशासी अभियंता) तो 11 बजे से पहले नहीं मिलेंगे। अन्य अफसर भी नदारद मिले।
चीफ इंजीनियर कार्यालय परिसर में ही ग्रामीण मीटर सेक्शन है। इसके अधिशासी अभियंता निसार अहमद हैं। यहां 10.30 बजे कार्यालय खुला था। लाइट और फैन चालू था लेकिन कुर्सी खाली पड़ी थी। यहां के ‘बड़े’ साहब निसार अहमद के बारे में बताया गया कि वह रामपुर बाग में विद्युत उपभोक्ता व्यथा निवारण फोरम में मिलेंगे क्योंकि वह फोरम में सदस्य भी हैं। 10.45 बजे वहां पहुंचे तो पूरा ऑफिस ही बंद था।
कलक्ट्रेट
10.15 बजे एफएसडीए आफिस में जिला अभिहित अधिकारी और औषधि निरीक्षक नवनीत यादव नहीं थे। जबकि इनके यहां रजिस्ट्रेशन कराने लिए कुछ लोग इंतजार करते देखे गए।
10.17 तक सहायक आयुक्त (वित्त) कार्यालय में दो चतुर्थश्रेणी कर्मचारी ही थे। जो कि टेबल और कुर्सियों की सफाई कर रहे थे। वहां आठ लिपिकों के बैठने के लिए कुर्सिंया हैं, उनमें से किसी पर कोई भी कर्मचारी नहीं था। यहां तक इस विभाग के अधिकारी भी मौजूद नहीं थे।
तहसील परिसर
10.20 तहसील सदर के प्रशासनिक अधिकारी का कार्यालय खुला था लेकिन वह नहीं थे। लेखपालों के कार्यालयों की पूरी लाइन में ताले लगे हुए थे। बताया गया कि 11 बजे के आस-पास ही लेखपाल और उनके कारिंदे आते हैं। उसी के बाद ही प्रमाणपत्रों की जांच और उनके आधार पर रिपोर्ट लगाने का काम शुरू होता है। रजिस्ट्रार कानूनगो आफिस में एक दो कर्मचारी ही थे, जबकि यहां सात कर्मचारियों के बैठने की व्यवस्था है।