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अफसर मेहरबान तो कौन बंद कराए सीओ की पत्नी के नाम चल रही दुकान
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शराब कारोबारी मनोज जायसवाल ने कराया था सीओ की पत्नी के नाम लाइसेंस
बरेली। अमरोहा में तैनात सीओ विजय राणा की पत्नी मधु राणा के नाम पर आवंटित शराब की दुकान लाइसेंस नवीनीकरण न होने बावजूद आबकारी अफसरों की मेहरबानी से अब भी संचालित हो रही है। यह दुकान शराब कारोबारी मनोज जायसवाल के गुर्गे संचालित कर रहे हैं। इससे आबकारी अफसरों और मनोज जायसवाल की मिलीभगत साफतौर पर सामने आ रही है।
पिछले दिनों टपरी डिस्टलरी में सौ करोड़ की एक्साइज ड्यूटी चोरी का मामला सामने आया था। इस मामले में डिस्टलरी के मालिक प्रणय अनेजा और उसके साथी शराब कारोबारी मनोज जायसवाल को मुख्य आरोपी बनाया गया था। कई आबकारी अफसर भी इस मामले में लपेटे में आए थे। प्रणय और मनोज समेत अब तक 17 लोग इस मामले में जेल भेजे जा चुके हैं। मनोज की गिरफ्तारी के बाद सामने आया कि बरेली जिले में उसकी 58 शराब की दुकानें संचालित हो रही हैं।
इनमें से एक दुकान अमरोहा में तैनात सीओ विजय राणा की पत्नी मधु राणा के नाम पर संचालित होने की बात सामने आई तो इसकी जांच कराई गई। जांच में मामला सही पाया गया तो सीओ ने इससे पल्ला झाड़ लिया और शराब की दुकान के लाइसेंस का नवीनीकरण न करने के संबंध में आबकारी विभाग को लिखकर दे दिया। इस पर आबकारी विभाग ने वित्तीय वर्ष की समाप्ति यानी 31 मार्च तक पुराने लाइसेंस की वैधता बताकर दुकान संचालित होने की बात कही थी। यह समय बृहस्पतिवार को पूरा हो गया, लेकिन दुकान का संचालन शुक्रवार को भी जारी रहा।
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मनोज के गुर्गे ही संचालित कर रहे हैं दुकान
पिछले दिनों सीओ विजय राणा ने स्पष्ट किया था कि मनोज जायसवाल से उनके पारिवारिक संबंध थे। इसका फायदा उठाकर उसने उनकी पत्नी के नाम पर शराब की दुकान का लाइसेंस उन्हें धोखे में रखकर ले लिया। इसका संचालन भी मनोज ही करता है। उन्हें काफी दिन बाद इसकी जानकारी हुई। उनकी तरह ही अन्य कई लोगों को भी मनोज ने धोखा देकर उनके नाम से दुकानें आवंटित करा लीं। लोगों का कहना है कि लाइसेंस का समय बीतने के बावजूद दुकान पर शराब की बिक्री होने से यह साफ है कि इसमें आबकारी अफसरों की मिलीभगत है।
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बरेली। अमरोहा में तैनात सीओ विजय राणा की पत्नी मधु राणा के नाम पर आवंटित शराब की दुकान लाइसेंस नवीनीकरण न होने बावजूद आबकारी अफसरों की मेहरबानी से अब भी संचालित हो रही है। यह दुकान शराब कारोबारी मनोज जायसवाल के गुर्गे संचालित कर रहे हैं। इससे आबकारी अफसरों और मनोज जायसवाल की मिलीभगत साफतौर पर सामने आ रही है।
पिछले दिनों टपरी डिस्टलरी में सौ करोड़ की एक्साइज ड्यूटी चोरी का मामला सामने आया था। इस मामले में डिस्टलरी के मालिक प्रणय अनेजा और उसके साथी शराब कारोबारी मनोज जायसवाल को मुख्य आरोपी बनाया गया था। कई आबकारी अफसर भी इस मामले में लपेटे में आए थे। प्रणय और मनोज समेत अब तक 17 लोग इस मामले में जेल भेजे जा चुके हैं। मनोज की गिरफ्तारी के बाद सामने आया कि बरेली जिले में उसकी 58 शराब की दुकानें संचालित हो रही हैं।
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इनमें से एक दुकान अमरोहा में तैनात सीओ विजय राणा की पत्नी मधु राणा के नाम पर संचालित होने की बात सामने आई तो इसकी जांच कराई गई। जांच में मामला सही पाया गया तो सीओ ने इससे पल्ला झाड़ लिया और शराब की दुकान के लाइसेंस का नवीनीकरण न करने के संबंध में आबकारी विभाग को लिखकर दे दिया। इस पर आबकारी विभाग ने वित्तीय वर्ष की समाप्ति यानी 31 मार्च तक पुराने लाइसेंस की वैधता बताकर दुकान संचालित होने की बात कही थी। यह समय बृहस्पतिवार को पूरा हो गया, लेकिन दुकान का संचालन शुक्रवार को भी जारी रहा।
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मनोज के गुर्गे ही संचालित कर रहे हैं दुकान
पिछले दिनों सीओ विजय राणा ने स्पष्ट किया था कि मनोज जायसवाल से उनके पारिवारिक संबंध थे। इसका फायदा उठाकर उसने उनकी पत्नी के नाम पर शराब की दुकान का लाइसेंस उन्हें धोखे में रखकर ले लिया। इसका संचालन भी मनोज ही करता है। उन्हें काफी दिन बाद इसकी जानकारी हुई। उनकी तरह ही अन्य कई लोगों को भी मनोज ने धोखा देकर उनके नाम से दुकानें आवंटित करा लीं। लोगों का कहना है कि लाइसेंस का समय बीतने के बावजूद दुकान पर शराब की बिक्री होने से यह साफ है कि इसमें आबकारी अफसरों की मिलीभगत है।