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मसला पैसों का हो तो स्वदेशी को कौन याद रखे..

Wed, 18 Oct 2017 01:50 AM IST
बरेली।
बरेली। Updated Wed, 18 Oct 2017 01:50 AM IST
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If the issue is of money, then remember the indigenous people.
बाजार में ख्‍ारीदारी
बरेली कॉलेज रोड पर लगा दिवाली का बाजार चाइना की ही झालरों से करीब-करीब पटा हुआ है। लोग खरीदारी भी सबसे ज्यादा इन्हीं झालरों की करते नजर आ रहे थे। महीने भर पहले से इस दिवाली पर चाइना के उत्पादों का बहिष्कार करने के लिए चलाई जा रही मुहिम का यहां कोई असर नहीं दिखाई दिया। किसी से भी चाइनीज झालर खरीदने का कारण पूछो तो एक ही जवाब, स्वदेशी के नाम पर दुगने-तिगने दामों पर झालरें कौन खरीदे। चाइनीज प्रोडक्ट्स में भी एसएमडी पाइप लाइट की सबसे ज्यादा मांग है। यह 40 रुपये मीटर है। इसमें एक एडॉप्टर लगाना होता है, जो 40 रुपये का है। दुकानदार तालिब ने बताया कि इंडियन झालर इंदू है, जो 50 मीटर 300 रुपये की है। ऐसी ही झालर चाइना वाली 180 रुपये की है। ऐसे में ग्राहक चाइना वाली ही झालर खरीद रहा है। 
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कंदीलों में फाइबर वाले कंदीलों की मांग ज्यादा दिखी। हालांकि पहले कपड़े वाले कंदील ज्यादा बिकते थे। फाइबर वाले कंदीलों की कीमत 50 से 200 रुपये के बीच है। इसमें षटकोण, बीम, मटकी आदि आकार के कंदील ज्यादा मांग में हैं। 
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खूब बिकीं मूर्तियां और खील-खिलौने-बताशे
धनतेरस का बाजार
बरेली। धनतेरस पर लक्ष्मी गणेश की मूर्तियां और खील खिलौन और बताशे खूब बिके। झालरेम, कंदील, मोमबत्तियां और दीयों की दुकानों पर भी खूब भीड़ लगी रही। लोगों ने शगुन के लिए झाड़ू भी खरीदी। सुबह से शुरू हुई खरीदारी देर रात तक चलती रही। अधिकतर लोगों ने शुभ मुहूर्त का ध्यान रखा, लिहाजा शाम के समय बाजार में एकाएक भीड़ बढ़ गई। 
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शहामतगंज चौराहे पर पुलिस चौकी के बराबर मूर्तियों की दुकानें सजी थीं। यहां दुकानदार सोनू प्रजापति ने बताया कि उसके पास 60-1100 रुपये तक की मूर्तियां हैं। हालांकि अधिकतर लोग 100-200 तक की मूर्तियां खरीद रहे हैं। मिट्टी के दीये की फड़ लगाए बैठे वीरु ने बताया कि 40 रुपये सैकड़ा दिए और 10 रुपये की एक कुलिया है। 
बताशे वाली गली में बताशे बना रहे कारीगर अजय ने बताया कि इस समय बताशे की मांग तीन गुनी बढ़ गई है। थोक में 55 रुपये और रिटेल में 60 रुपये हैं। हडरी (बड़ा खिलौना) 30 रुपये का एक है। वहीं राजेंद्र नगर मार्केट में खील खिलौने सौ रुपये किलो के दाम में बिके। 

मोमबत्ती 180-200 रुपये किलो बिकी। ढाई सौ ग्राम से कम तो कोई नहीं ले रहा था। इसके अलावा धनतेरस के दिन झाड़ू खरीदने की परंपरा है। झाड़ू तो 90 फीसदी लोगों ने खरीदी होगी। फूल और सीकों वाली झाड़ू 70 रुपये से लेकर 110 रुपये के बीच खूब बिकी। मान्यता है कि नई झाड़ू घर में लान से घर की दरिद्रता दूर होती है, क्योंकि झाड़ू को लक्ष्मी का रूप माना जाता है। 
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