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फायर ब्रिगेड वाले शटर तोड़ देते तो इतनी विकराल न होती आग
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आग बुझाते दमकल कर्मी। फाइल फोटो
गली नवाबान का अग्निकांड: पीड़ित परिवार का आरोप, फायर फाइटिंग टीम ने दिखाई बेपरवाही वर्ना इतना भीषण न होता हादसा
भतीजे ने कहा- दोस्तों के साथ खुद काटना पड़ा शटर, बस पानी डालती रही दमकल टीम
बरेली। बड़ा बाजार की गली नवाबान में पंकज अरोड़ा के टेंट गोदाम में लगी भीषण आग में उनकी पत्नी अलका की मौत और भारी नुकसान के बाद उनका परिवार फायर ब्रिगेड की भूमिका से खुश नहीं है। पंकज के भतीजे तनिष्क का कहना है कि जिस गोदाम में आग लगी थी, फायर कर्मियों ने उसका शटर तक नहीं काटा वर्ना आग को जल्द बुझाया जा सकता था। उन्हें दोस्तों की मदद से खुद शटर काटना पड़ा। इसमें आधा घंटा लग गया और इस बीच आग काफी विकराल हो गई।
तनिष्क ने बताया कि आग गोदाम में लगी थी इसलिए सबसे पहले उसका शटर का खुलना जरूरी था मगर फायर ब्रिगेड के पास शटर खोलने के लिए कोई इंतजाम ही नहीं था। वे लोग सिर्फ पानी डालने में लगे रहे और आग लगातार भीषण होती गई। उनके कहने के बावजूद कर्मचारियों ने कोई ध्यान नहीं दिया तो उन्होंने अपने दोस्त कुनाल, संतोष आदि की मदद से हथौड़ा और कटर मंगाकर खुद शटर काटा। भीषण आग होने की वजह से इसमें आधे घंटे से भी ज्यादा समय लगा और इतनी ही देर में आग काफी ज्यादा विकराल हो गई।
तनिष्क ने कहा कि अगर फायर ब्रिगेड वालों के पास शटर खोलने का इंतजाम होता तो आग पर जल्दी काबू पा लिया जाता। शटर काटने की कोशिश में उनके हाथ तक जख्मी हो गए। आग बुझाने के दौरान पंकज के बड़े भाई हेमंत भी झुलस गए। उनकी पत्नी आरुषि की भी तबीयत बिगड़ गई थी जिसके बाद दोनों को अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा। तनिष्क ने बताया कि दोनों की स्थिति में सुधार है और वे खतरे से बाहर हैं।
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टीम ने गोदाम का पीछे गली में लगा लकड़ी का दरवाजा तोड़ लिया था और उसी के जरिए हम आग बुझाने में लगे हुए थे। लोहे के शटर को तोड़ने की कोई जरूरत ही नहीं थी इसलिए हमने उसे नहीं तोड़ा। - संजीव यादव, एफएसओ
दिवाली बाद नया घर बनाने की थी तैयारी
इसी महीने थी पंकज और अलका की सालगिरह
तनिष्क ने बताया कि उनके परिवार ने डीडीपुरम में घर बनाने के लिए जमीन खरीदी थी जहां दिवाली बाद निर्माण शुरू कराने की तैयारी थी। दिवाली पर घर में हंसी खुशी का माहौल था। शाम को सभी ने मिलकर पूजा की थी, अचानक दुकान से धुआं उठने की सूचना मिली। कुछ समझ पाने से पहले ही आग ने विकराल रूप ले लिया और सबकुछ जलकर खाक हो गया। तनिष्क ने बताया कि उनके चाचा पंकज और चाची अलका की सालगिरह नवंबर में ही थी। दोनों घूमने-फिरने के शौकीन थे। मगर उनकी खुशियों को किसी की नजर लग गई। सालगिरह से पहले ही जोड़ी बिछड़ गई।
पंकज की हालत ठीक होने के बाद होगी जांच
एफएसओ संजीव यादव ने बताया कि आग लगने का कारण अब तक स्पष्ट नहीं हुआ है। टेंट हाउस मालिक पंकज की हालत अभी ठीक नहीं है। वह गहरे सदमे में हैं। हालत सुधरने के बाद उनके बयान दर्ज कर जांच शुरू की जाएगी।
20 दमकल वाहनों के भरोसे 45 लाख आबादी की सुरक्षा
बरेली। अग्निशमन भी आधीअधूरी व्यवस्था और सीमित संसाधनों के साथ आग से लड़ रहा है। जिले की 45 लाख से ज्यादा आबादी के लिए पांच फायर स्टेशन तहसीलों में और दो शहर में हैं। मगर नियतन के सापेक्ष यहां तमाम पद लंबे समय से खाली चल रहे हैं। 45 लाख की आबादी पर जहां छोटी-बड़ी सिर्फ 20 गाड़ियां हैं और स्टाफ भी काफी कम है। ऐसे में इन इंतजामों के भरोसे आग से सुरक्षा के दावे बेमानी हैं। यही वजह है कि पूरे जिले में अगर कहीं भी आग लगने की कोई बड़ी घटना होती तो फायर ब्रिगेड की गाड़ियां एक स्टेशन से दूसरे स्टेशन तक दौड़ती नजर आती हैं। इसमें काफी समय भी बर्बाद होता है।
ऊंची इमारतों पर आग बुझाने का नहीं कोई इंतजाम
शहर में अब तमाम मल्टीस्टोरी बिल्डिंग बन चुकी हैं लेकिन अगर इनमें से कहीं भी कोई हादसा हो जाए तो उससे निपटने का अग्नि शमन विभाग के पास कोई इंतजाम नहीं है। इन इमारतों में राहत कार्य करने के लिए हाइड्रोलिक प्लेटफार्म की मांग करीब दो साल पहले मुख्यालय को भेजी गई थी लेकिन इस बार अब तक कोई सुनवाई नहीं हुई। इसके अलावा कुछ फायर टेंडर की डिमांड भी भेजी गई है।
स्टाफ
पद : निर्धारण : तैनाती
एफएसओ : 07 : 00
एफएसएसओ : 09 : 03
लीडिंग फायरमैन : 19 : 14
चालक 31 : 14
फायरमैन : 136 : 58
मौजूद संसाधन
बड़ी गाड़ी : 11
छोटी वाउजर : 01, 7000 लीटर क्षमता
वाटर टेंडर टाइप डी : 04
छोटी वाटर टेंडर टाइप थ्री : 01
हाई प्रेशर वाटर टेंडर : 01
बुलेट मोटर साइकिल : 02
हमारे पास इस समय जिले में 20 दमकल वाहन मौजूद हैं लेकिन स्टाफ की काफी कमी है। ऊंची इमारतों में आग बुझाने के लिए हाइड्रोलिक प्लेटफार्म समेत कुछ अन्य मांग की गई हैं लेकिन अभी मंजूरी नहीं मिली है। - चंद्रमोहन शर्मा, सीएफओ
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भतीजे ने कहा- दोस्तों के साथ खुद काटना पड़ा शटर, बस पानी डालती रही दमकल टीम
बरेली। बड़ा बाजार की गली नवाबान में पंकज अरोड़ा के टेंट गोदाम में लगी भीषण आग में उनकी पत्नी अलका की मौत और भारी नुकसान के बाद उनका परिवार फायर ब्रिगेड की भूमिका से खुश नहीं है। पंकज के भतीजे तनिष्क का कहना है कि जिस गोदाम में आग लगी थी, फायर कर्मियों ने उसका शटर तक नहीं काटा वर्ना आग को जल्द बुझाया जा सकता था। उन्हें दोस्तों की मदद से खुद शटर काटना पड़ा। इसमें आधा घंटा लग गया और इस बीच आग काफी विकराल हो गई।
तनिष्क ने बताया कि आग गोदाम में लगी थी इसलिए सबसे पहले उसका शटर का खुलना जरूरी था मगर फायर ब्रिगेड के पास शटर खोलने के लिए कोई इंतजाम ही नहीं था। वे लोग सिर्फ पानी डालने में लगे रहे और आग लगातार भीषण होती गई। उनके कहने के बावजूद कर्मचारियों ने कोई ध्यान नहीं दिया तो उन्होंने अपने दोस्त कुनाल, संतोष आदि की मदद से हथौड़ा और कटर मंगाकर खुद शटर काटा। भीषण आग होने की वजह से इसमें आधे घंटे से भी ज्यादा समय लगा और इतनी ही देर में आग काफी ज्यादा विकराल हो गई।
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तनिष्क ने कहा कि अगर फायर ब्रिगेड वालों के पास शटर खोलने का इंतजाम होता तो आग पर जल्दी काबू पा लिया जाता। शटर काटने की कोशिश में उनके हाथ तक जख्मी हो गए। आग बुझाने के दौरान पंकज के बड़े भाई हेमंत भी झुलस गए। उनकी पत्नी आरुषि की भी तबीयत बिगड़ गई थी जिसके बाद दोनों को अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा। तनिष्क ने बताया कि दोनों की स्थिति में सुधार है और वे खतरे से बाहर हैं।
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टीम ने गोदाम का पीछे गली में लगा लकड़ी का दरवाजा तोड़ लिया था और उसी के जरिए हम आग बुझाने में लगे हुए थे। लोहे के शटर को तोड़ने की कोई जरूरत ही नहीं थी इसलिए हमने उसे नहीं तोड़ा। - संजीव यादव, एफएसओ
दिवाली बाद नया घर बनाने की थी तैयारी
इसी महीने थी पंकज और अलका की सालगिरह
तनिष्क ने बताया कि उनके परिवार ने डीडीपुरम में घर बनाने के लिए जमीन खरीदी थी जहां दिवाली बाद निर्माण शुरू कराने की तैयारी थी। दिवाली पर घर में हंसी खुशी का माहौल था। शाम को सभी ने मिलकर पूजा की थी, अचानक दुकान से धुआं उठने की सूचना मिली। कुछ समझ पाने से पहले ही आग ने विकराल रूप ले लिया और सबकुछ जलकर खाक हो गया। तनिष्क ने बताया कि उनके चाचा पंकज और चाची अलका की सालगिरह नवंबर में ही थी। दोनों घूमने-फिरने के शौकीन थे। मगर उनकी खुशियों को किसी की नजर लग गई। सालगिरह से पहले ही जोड़ी बिछड़ गई।
पंकज की हालत ठीक होने के बाद होगी जांच
एफएसओ संजीव यादव ने बताया कि आग लगने का कारण अब तक स्पष्ट नहीं हुआ है। टेंट हाउस मालिक पंकज की हालत अभी ठीक नहीं है। वह गहरे सदमे में हैं। हालत सुधरने के बाद उनके बयान दर्ज कर जांच शुरू की जाएगी।
20 दमकल वाहनों के भरोसे 45 लाख आबादी की सुरक्षा
बरेली। अग्निशमन भी आधीअधूरी व्यवस्था और सीमित संसाधनों के साथ आग से लड़ रहा है। जिले की 45 लाख से ज्यादा आबादी के लिए पांच फायर स्टेशन तहसीलों में और दो शहर में हैं। मगर नियतन के सापेक्ष यहां तमाम पद लंबे समय से खाली चल रहे हैं। 45 लाख की आबादी पर जहां छोटी-बड़ी सिर्फ 20 गाड़ियां हैं और स्टाफ भी काफी कम है। ऐसे में इन इंतजामों के भरोसे आग से सुरक्षा के दावे बेमानी हैं। यही वजह है कि पूरे जिले में अगर कहीं भी आग लगने की कोई बड़ी घटना होती तो फायर ब्रिगेड की गाड़ियां एक स्टेशन से दूसरे स्टेशन तक दौड़ती नजर आती हैं। इसमें काफी समय भी बर्बाद होता है।
ऊंची इमारतों पर आग बुझाने का नहीं कोई इंतजाम
शहर में अब तमाम मल्टीस्टोरी बिल्डिंग बन चुकी हैं लेकिन अगर इनमें से कहीं भी कोई हादसा हो जाए तो उससे निपटने का अग्नि शमन विभाग के पास कोई इंतजाम नहीं है। इन इमारतों में राहत कार्य करने के लिए हाइड्रोलिक प्लेटफार्म की मांग करीब दो साल पहले मुख्यालय को भेजी गई थी लेकिन इस बार अब तक कोई सुनवाई नहीं हुई। इसके अलावा कुछ फायर टेंडर की डिमांड भी भेजी गई है।
स्टाफ
पद : निर्धारण : तैनाती
एफएसओ : 07 : 00
एफएसएसओ : 09 : 03
लीडिंग फायरमैन : 19 : 14
चालक 31 : 14
फायरमैन : 136 : 58
मौजूद संसाधन
बड़ी गाड़ी : 11
छोटी वाउजर : 01, 7000 लीटर क्षमता
वाटर टेंडर टाइप डी : 04
छोटी वाटर टेंडर टाइप थ्री : 01
हाई प्रेशर वाटर टेंडर : 01
बुलेट मोटर साइकिल : 02
हमारे पास इस समय जिले में 20 दमकल वाहन मौजूद हैं लेकिन स्टाफ की काफी कमी है। ऊंची इमारतों में आग बुझाने के लिए हाइड्रोलिक प्लेटफार्म समेत कुछ अन्य मांग की गई हैं लेकिन अभी मंजूरी नहीं मिली है। - चंद्रमोहन शर्मा, सीएफओ