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Bareilly News: आवासीय भवन में शटर लगा है तो व्यावसायिक मानकर जारी कर दिया गृहकर का बिल

Tue, 06 Aug 2024 05:44 AM IST
बरेली ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, बरेली
संवाद न्यूज एजेंसी, बरेली Updated Tue, 06 Aug 2024 05:44 AM IST
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If a shutter is installed in a residential building, then the house tax bill is issued considering it to be commercial
बरेली। नगर निगम में गृहकर बिलों की गड़बड़ियां लगातार सामने आ रही हैं। अब आवासीय घर को उसमें लगे शटर के आधार पर व्यावसायिक भवन मानते हुए बिल भेजने का मामला सामने आया है। यही नहीं मृतकों के नाम से बिल भेजने और आवासीय को सर्वे के बाद भी व्यावसायिक मानने का मामला भी सामने आ रहा है। इन शिकायतों को लेकर रामपुर गार्डन के पार्षद के साथ पीड़िताें ने सोमवार को महापौर, अपर नगर आयुक्त व सीटीओ से मुलाकात की है।
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शिकायतकर्ताओं के साथ नगर निगम पहुंचे पार्षद राजेश अग्रवाल ने बताया कि निगम के कर्मचारी विभिन्न इलाकों में करदाताओं के घरों में मात्र शटर लगे होने पर भवन के उस भाग को व्यावसायिक मान ले रहे हैं, जबकि वहां कोई व्यावसायिक कार्य ही नहीं हो रहा। कोई गैराज तो कोई स्टोर के तौर पर उस हिस्से को इस्तेमाल कर रहा है। उन्होंने मांग उठाई कि मकान में लगे शटर के आधार पर करदाता का उत्पीड़न न किया जाए। अगर शटर घरेलू उपयोग में है तो उसे आवासीय माना जाए। उन्होंने बिना नाम लिए आरोप लगाते हुए ज्ञापन में लिखा है कि एक जोन का राजस्व निरीक्षक इन मामलों में अधिक उत्पीड़न कर रहा है।
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पार्षद व उनके साथ गए लोगों ने आरोप लगाया कि जोन के बाबू बिलों के संशोधन में कोई रोल अदा नहीं कर रहे, जबकि उनसे भी कार्य कराया जाना चाहिए। मांग उठाई कि जीआईएस सर्वे के बाद लगातार आ रहीं परेशानियों को दूर करने के लिए प्रतिदिन की रिपोर्ट जोनल प्रभारी से ली जाए। साथ ही आपत्ति व स्वयंकर के फॉर्म का विधिवत रिकॉर्ड रखा जाए जो वर्तमान में नहीं है। यही नहीं रिकॉर्ड मेनटेन करने के लिए आउटसोर्सिंग की जगह विभागीय कर्मचारियों को लगाने की मांग भी की गई। महापौर ने इस मामले में कार्रवाई का आश्वासन दिया है। मुख्य कर अधिकारी प्रदीप कुमार ने भी कहा है कि सिर्फ शटर से व्यावसायिक भवन नहीं माना जाएगा। आगे से ऐसी शिकायत नहीं आएगी।
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सर्वे के बाद भी बुजुर्ग को भेज दिया व्यावसायिक बिल
अधिकारियों से मिले पीड़ितों में 85 वर्षीय जीएस भिंडर भी शामिल थे। उन्होंने बताया कि उनकी दो आईडी बन गई थीं। इसमें एक व्यावसायिक और दूसरी आवासीय है। उन्होंने पार्षद राजेश के माध्यम से ही आपत्ति लगाई तो जीआईएस सर्वे हुआ। इसमें बताया कि शटर लगा हुआ है, लेकिन खंडहर पड़ा है, इसको आवासीय ही माना जाए। इसके बाद भी दोबारा बिल आने पर भूमि को व्यावसायिक ही माना गया।

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शांति विहार व सिठौरा के 90 फीसदी बिलों की आईडी नहीं
पार्षद राजेश अग्रवाल ने बताया कि सुभाषनगर के शांति विहार और सिठौरा में करीब 90 प्रतिशत बिल नो मैच (सॉफ्टवेयर में आईडी दिखाई ही नहीं देना) की श्रेणी में आ गए हैं। शांति विहार और सिठौरा व आसपास अन्य क्षेत्र की बात करें तो लगभग 10 हजार से अधिक लोग इससे परेशान हैं। सिठौरा की तो उनके पास पूरी लिस्ट मौजूद है। वहीं शांति विहार के लोग भी उनसे संपर्क कर रहे हैं। वहीं नो मैच की स्थिति में बिल सही होने में देरी होना भी बड़ी चिंता का विषय बना हुआ है।


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पूर्व डिप्टी एसपी की दिवंगत पत्नी के नाम से बिल
वसूली के लिए विभाग ने पूर्व डिप्टी एसपी सीएल शर्मा की दिवंगत पत्नी के. सुमित्रा शर्मा के नाम भेज दिया है, जबकि मकान उनके बेटे पराग कुमार के नाम से है। वर्ष 2023-24 का बिल भी पराग कुमार के नाम से दिया गया था। पीड़ित के मुताबिक उनका बिल 2320 रुपये आता था, जो जीआईएस सर्वे के बाद मृतक पत्नी के नाम से 10 हजार रुपये का आया है, जबकि उनकी पत्नी का 2021 में ही देहांत हो गया है।
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