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विश्व रैबीज दिवस: कुत्ता-बंदर काटे तो 28 दिन में वैक्सीन की चारों डोज जरूरी, तभी पूरी तरह खत्म होगा वायरस
Sat, 28 Sep 2024 11:37 AM IST
मुकेश कुमार
अमर उजाला ब्यूरो, बरेली
अमर उजाला ब्यूरो, बरेली
Published by: मुकेश कुमार
Updated Sat, 28 Sep 2024 11:37 AM IST
सार
बरेली में रैबीज क्लीनिक के आंकड़ों के अनुसार प्रतिमाह दस हजार लोगों पर कुत्ता-बंदर हमला कर रहे हैं। इनमें से करीब सात हजार लोग ही वैक्सीन की चारों डोज लगवाते हैं। विशेषज्ञ के मुताबिक अगर किसी को कुत्ता या बंदर काट ले तो 28 दिन में एंटी रैबीज वैक्सीन की चारों डोज लगवाना जरूरी है।
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सांकेतिक तस्वीर
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
कुत्ते और बंदर हमारे डर को भांप लेते हैं। डरने पर हमारे शरीर में हार्मोन संबंधी बदलाव होते हैं। इसे पहचान कर ही वे हम पर हमला करते हैं। अगर हम बगैर प्रतिक्रिया दिए या आक्रामक प्रवृत्ति प्रदर्शित करते हुए चलते रहें तो वे हमें नुकसान नहीं पहुंचाते। कुत्ता-बंदर के काटने पर एंटी रैबीज वैक्सीन न लगे तो व्यक्ति के रैबीज की चपेट में आने की आशंका रहती है। भारतीय पशु चिकित्सा अनुसंधान संस्थान के प्रधान वैज्ञानिक डॉ अभिजीत पावड़े ने ये बातें कहीं।
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उन्होंने बताया कि पहले से डरा हुआ व्यक्ति कुत्ते-बंदरों के हमले का विरोध भी नहीं कर पाता। बंदर में भी अब व्यावहारिक परिवर्तन आ रहा है। उनके प्राकृतिक आवास खत्म हो रहे हैं। वे आबादी के बीच रहने के आदती हो गए हैं। भूख लगने पर भोजन की तलाश में भटकते बंदरों के हमलावर होने की आशंका ज्यादा रहती है।
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28 दिन में वैक्सीन की चार डोज जरूरी
राष्ट्रीय रैबीज नियंत्रण कार्यक्रम के नोडल अधिकारी डॉ. मीसम अब्बास के मुताबिक दस हजार में से करीब सात हजार लोग ही वैक्सीन की चारों डोज लगवाते हैं। ये बेपरवाही जान पर भारी पड़ सकती है, क्योंकि आखिरी डोज बूस्टर होती है। रैबीज के वायरस को पूरी तरह समाप्त करने के लिए यह बेहद जरूरी होती है।
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लार से भी संक्रमण का खतरा
डॉ. अब्बास के मुताबिक पशु अगर रैबीज की चपेट में है तो उसका चाटना और काटना दोनों खतरनाक है। यहां तक कि जमीन पर गिरी उसकी लार भी अगर किसी जख्म पर चिपक जाए तो व्यक्ति रैबीज की चपेट में आ सकता है। इसलिए पालतू पशुओं का टीकाकरण बेहद जरूरी है। घर में पाले गए कुत्ते, बिल्ली, बंदर आदि से उचित दूरी बनाते हुए साफ-सफाई का ध्यान रखना चाहिए।
2024 में पशुओं के काटने के आंकड़े
डॉ. अब्बास के मुताबिक पशु अगर रैबीज की चपेट में है तो उसका चाटना और काटना दोनों खतरनाक है। यहां तक कि जमीन पर गिरी उसकी लार भी अगर किसी जख्म पर चिपक जाए तो व्यक्ति रैबीज की चपेट में आ सकता है। इसलिए पालतू पशुओं का टीकाकरण बेहद जरूरी है। घर में पाले गए कुत्ते, बिल्ली, बंदर आदि से उचित दूरी बनाते हुए साफ-सफाई का ध्यान रखना चाहिए।
2024 में पशुओं के काटने के आंकड़े
| माह | कुत्ता | बिल्ली | बंदर | अन्य |
| अप्रैल | 11,500 | 768 | 3,739 | 185 |
| मई | 10,694 | 574 | 3,603 | 129 |
| जून | 9,902 | 853 | 3,820 | 138 |
| जुलाई | 11,356 | 1,262 | 4,478 | 307 |
| अगस्त | 11,531 | 1,196 | 4,737 | 588 |