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Bareilly News: कैसे हो बाल विकास, 56 आंगनबाड़ी तो खुलते ही नहीं

Fri, 01 Sep 2023 02:26 AM IST
बरेली ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, बरेली
संवाद न्यूज एजेंसी, बरेली Updated Fri, 01 Sep 2023 02:26 AM IST
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How should child development be done, 56 Anganwadis do not open at all
बरेली। नौनिहालों की देखभाल और उनके पोषण की जिम्मेदारी संभालने वाले बाल विकास सेवा एवं पुष्टाहार विभाग की ही सेहत ढीली है। शहर के 115 आंगनबाड़ी केंद्रों में से 56 ऐसे हैं, जो सिर्फ महीने में पुष्टाहार वितरण वाले दिन ही खुलते हैं। क्योंकि इन्हें खोलने के लिए आंगानबाड़ी कार्यकर्ता और सहायिका ही नहीं हैं।
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ये हाल शहर के आंगनबाड़ी केंद्रों का है, ग्रामीण इलाके के केंद्रों की स्थिति का अंदाजा सहज ही लगाया जा सकता है। प्रत्येक केंद्र पर एक-एक आंगनबाड़ी और सहायिका की नियुक्ति जरूरी है, लेकिन वर्ष 2012 से इनकी नई भर्ती नहीं हुई है। इसका विपरीत असर बच्चों और गर्भवती महिलाओं की सेहत पर पड़ रहा है। आंगनबाड़ी केंद्र सुबह 8 से 12 बजे तक खुलने चाहिए, लेकिन शहर के केंद्र प्रतिदिन संचालित नहीं होते। यह स्थिति तब है, जब विभागीय मंत्री से लेकर शासन स्तर तक के अफसर समीक्षा कर चुके हैं।
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ये कार्य हैं कार्यकर्ताओं के
- गर्भवती महिलाओं का समय पर टीकाकरण कराने में सहयोग
- कुपोषित बच्चों को पोषण देने के लिए पोषाहार वितरित करना
- जरूरत पड़ने पर बच्चों को अस्पताल में भर्ती करना।
- तीन से छह वर्ष तक के बच्चों के शारीरिक और मानसिक विकास

बिना भुगतान के अतिरिक्त कार्य का दबाव
आंगनबाड़ी कार्यकर्ता को 5500 रुपये और सहायिका को 2500 रुपये मानदेय मिलता है। एक केंद्र के मानदेय पर दो केंद्रों का काम लिया जा रहा है। अतिरिक्त कार्यभार पर अलग से कोई भुगतान नहीं मिलता। कार्य के दबाव के चलते सात आंगनबाड़ी पिछले छह महीनों में इस्तीफा दे चुकी हैं।
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केंद्रों की संख्या-115
तैनात आंगनबाड़ी 59
तैनात सहायिका 59

दोनों के रिक्त पद 56-56
पंजीकृत बच्चे 9000

रिक्त पदों को भरने की प्रक्रिया चल रही है। उपलब्ध संसाधनों में सिस्टम कैसे बेहतर से बेहतर चल सकता है, इसी पर काम किया जा रहा है। -नीता अहिरवार, जिला कार्यक्रम अधिकारी


अमेरिका से हुई थी शुरुआत

राष्ट्रीय पोषण सप्ताह की शुरुआत 1975 में अमेरिका से हुई थी। भारत सरकार ने 1982 में इसकी शुरुआत कराई। इसका मकसद बच्चों की सेहत के प्रति जागरूकता पैदा करना है।
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