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भगवा रंग में रंगा दिखेगा हुरियारों का जुलूस
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होली पर निकलता जुलूस। फाइल फोटो
- फोटो : BADAUN
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बदायूं। होली पर निकलने वाला हुरियारों का जुलूस इस बार भगवा रंग में रंगा नजर आएगा। विधानसभा चुनावों के ऐन बाद शुक्रवार को रंगों की वर्षा के बीच 72 वें जुलूस की तैयारी शुरू हो गई है। जुलूस सुबह आठ बजे पुराना सराफा बाजार गौरी शंकर मंदिर से शुरू होने के बाद शहर के प्रमुख इलाकों में भ्रमण के बाद मंदिर पर ही समाप्त होगा। 72 साल पहले 1950 में आनंद कुमार रस्तोगी, सूरज रस्तोगी और विद्याराम ने होली पर जुलूस की परंपरा शुरू की थी। ब्रिटिश हुकूमत में जुलूस नहीं निकलता था। अब तीसरी पीढ़ी जुलूस का आयोजन कर रही है।
सात दशक से ज्यादा पुराना होली का यह जुलूस 1975 में आपातकाल के दौरान भी नहीं रुका। महेंद्र कुमार, अजयपाल, अवनेश वर्मा, मनोज वर्मा, अमित वर्मा, नितिन वर्मा, सचिन वर्मा आदि अब इस जुलूस का नेतृत्व करते हैं। 1990 के दशक में दंगों और सांप्रदायिक तनाव के माहौल के बीच भी जुलूस की परंपरा कायम रही। इस बार आयोजकों ने जुलूस को भगवा रंग देने की तैयारी की है। 1950 में चंद लोगों के साथ शुरू होने वाले जुलूस में अब हजारों लोग शामिल होते हैं।
इस बार जुलूस में कई खास झांकियों को शामिल किया जाएगा। अबीर- गुलाल और रंगों की बौछार के लिए आयोजक अभी से जुट गए हैं।
अवनेश वर्मा, महेंद्र कुमार, अजयपाल ने बताया कि जूलूस निर्धारित समय से शुरू होकर तय मार्गों पर भ्रमण करेगा। जुलूस में इस बार हुरियारे घोड़ों पर भी नजर आएंगे। कई ट्रैक्टर ट्रॉली और डनलप आदि पर झांकियां रहेंगी। इधर, जुलूस को लेकर सुरक्षा बंदोबस्त के मद्देनजर पुलिस ने भी तैयारी शुरू कर दी है।
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रंगों से सराबोर होगा जिले का सबसे बड़ा जुलूस
भले ही 1950 में तीन लोगों ने मिल कर छोटा सा जुलूस निकाला हो, लेकिन 72 साल में ये जुलूस होली पर निकलने वाले जिले का सबसे बड़ा जुलूस बना गया है। जिले में होली पर दस जुलूस निकलते हैं। इनमें सबसे बड़ा जुलूस शहर के सराफा बाजार स्थित गौरी शंकर मंदिर से निकलता है। उझानी में एक, जरीफनगर में एक, वजीरगंज में दो, सिविल लाइंस में एक और सबसे ज्यादा अलापुर में हुुरियारों के चार जुलूस निकलते हैं।
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होली का जुलूस किसी तपस्या से कम नहीं है। गौर करने की बात ये है कि कभी न तो इस जुलूस का कोई विरोध हुआ और न ही कभी यह फसाद की वजह बना। इसके बाद भी लोग कहते हैं कि जुलूस का स्वरूप बदल गया है। हम तो इस बात को नहीं मानते।
-अवनेश वर्मा
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होली पर हुरियारों का जुलूस भाईचारे का संदेश देता है। जिले का यह होली पर निकलने वाला सबसे बड़ा जुलूस है। किसी परंपरा को लगातार कायम रखना आसान नहीं है। इसके अलावा जुलूस को हर बार नया रूप भी देना बड़ी बात है। समाज को एकजुटता का संदेश मिलता है।
-महेंद्र वर्मा
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72 साल पहले शुरू हुआ होली जुलूस का अब तीसरी पीढ़ी नेतृत्व कर रही है। होली का जुलूस समाज को सौहार्द और एकजुटता का संदेश देता है। इस बार चुनाव के बाद फिर से भाजपा की सत्ता में पूर्ण बहुमत से वापसी के चलते जुलूस भगवा रंग में नजर आएगा।
-नितिन वर्मा
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अच्छी बात यह है कि होली के जुलूस की परंपरा लगातार 72 साल से कायम है। अब जुलूस में युवाओं की संख्या ज्यादा रहती है। हालांकि, जुलूस का मार्गदर्शन अब भी बुजुर्ग ही करते हैं। जुलूस के बाद क्षत्रिय धर्मशाला हुसैनी गली में शाम को होली मिलन होता है।
-अमित वर्मा
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सुभाष चौक पर यज्ञ का आयोजन आज
बदायूं। होली यज्ञ आयोजक मंडल की ओर से होली से एक दिन पहले बृहस्पतिवार को सुभाष चौक पर सुबह सात बजे स्वच्छ भारत- प्रदूषण मुक्त भारत की कामना के लिए यज्ञ का आयोजन किया जाएगा। संयोजक आर्येंद्र प्रकाश ने बताया कि फाल्गुन पूर्णिमा पर आयोजित होने वाले यज्ञ में हर वर्ष की तरह इस वर्ष भी लोगों को आहुति और पूजन के लिए निशुल्क सामग्री उपलब्ध कराई जाएगी। संवाद
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सात दशक से ज्यादा पुराना होली का यह जुलूस 1975 में आपातकाल के दौरान भी नहीं रुका। महेंद्र कुमार, अजयपाल, अवनेश वर्मा, मनोज वर्मा, अमित वर्मा, नितिन वर्मा, सचिन वर्मा आदि अब इस जुलूस का नेतृत्व करते हैं। 1990 के दशक में दंगों और सांप्रदायिक तनाव के माहौल के बीच भी जुलूस की परंपरा कायम रही। इस बार आयोजकों ने जुलूस को भगवा रंग देने की तैयारी की है। 1950 में चंद लोगों के साथ शुरू होने वाले जुलूस में अब हजारों लोग शामिल होते हैं।
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इस बार जुलूस में कई खास झांकियों को शामिल किया जाएगा। अबीर- गुलाल और रंगों की बौछार के लिए आयोजक अभी से जुट गए हैं।
अवनेश वर्मा, महेंद्र कुमार, अजयपाल ने बताया कि जूलूस निर्धारित समय से शुरू होकर तय मार्गों पर भ्रमण करेगा। जुलूस में इस बार हुरियारे घोड़ों पर भी नजर आएंगे। कई ट्रैक्टर ट्रॉली और डनलप आदि पर झांकियां रहेंगी। इधर, जुलूस को लेकर सुरक्षा बंदोबस्त के मद्देनजर पुलिस ने भी तैयारी शुरू कर दी है।
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रंगों से सराबोर होगा जिले का सबसे बड़ा जुलूस
भले ही 1950 में तीन लोगों ने मिल कर छोटा सा जुलूस निकाला हो, लेकिन 72 साल में ये जुलूस होली पर निकलने वाले जिले का सबसे बड़ा जुलूस बना गया है। जिले में होली पर दस जुलूस निकलते हैं। इनमें सबसे बड़ा जुलूस शहर के सराफा बाजार स्थित गौरी शंकर मंदिर से निकलता है। उझानी में एक, जरीफनगर में एक, वजीरगंज में दो, सिविल लाइंस में एक और सबसे ज्यादा अलापुर में हुुरियारों के चार जुलूस निकलते हैं।
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होली का जुलूस किसी तपस्या से कम नहीं है। गौर करने की बात ये है कि कभी न तो इस जुलूस का कोई विरोध हुआ और न ही कभी यह फसाद की वजह बना। इसके बाद भी लोग कहते हैं कि जुलूस का स्वरूप बदल गया है। हम तो इस बात को नहीं मानते।
-अवनेश वर्मा
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होली पर हुरियारों का जुलूस भाईचारे का संदेश देता है। जिले का यह होली पर निकलने वाला सबसे बड़ा जुलूस है। किसी परंपरा को लगातार कायम रखना आसान नहीं है। इसके अलावा जुलूस को हर बार नया रूप भी देना बड़ी बात है। समाज को एकजुटता का संदेश मिलता है।
-महेंद्र वर्मा
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72 साल पहले शुरू हुआ होली जुलूस का अब तीसरी पीढ़ी नेतृत्व कर रही है। होली का जुलूस समाज को सौहार्द और एकजुटता का संदेश देता है। इस बार चुनाव के बाद फिर से भाजपा की सत्ता में पूर्ण बहुमत से वापसी के चलते जुलूस भगवा रंग में नजर आएगा।
-नितिन वर्मा
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अच्छी बात यह है कि होली के जुलूस की परंपरा लगातार 72 साल से कायम है। अब जुलूस में युवाओं की संख्या ज्यादा रहती है। हालांकि, जुलूस का मार्गदर्शन अब भी बुजुर्ग ही करते हैं। जुलूस के बाद क्षत्रिय धर्मशाला हुसैनी गली में शाम को होली मिलन होता है।
-अमित वर्मा
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सुभाष चौक पर यज्ञ का आयोजन आज
बदायूं। होली यज्ञ आयोजक मंडल की ओर से होली से एक दिन पहले बृहस्पतिवार को सुभाष चौक पर सुबह सात बजे स्वच्छ भारत- प्रदूषण मुक्त भारत की कामना के लिए यज्ञ का आयोजन किया जाएगा। संयोजक आर्येंद्र प्रकाश ने बताया कि फाल्गुन पूर्णिमा पर आयोजित होने वाले यज्ञ में हर वर्ष की तरह इस वर्ष भी लोगों को आहुति और पूजन के लिए निशुल्क सामग्री उपलब्ध कराई जाएगी। संवाद