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फरीदपुर के गांव पचौमी में मिली गुप्त काल की शिव प्रतिमा
बरेली
Updated Tue, 21 Apr 2015 01:14 AM IST
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फरीदपुर से सटे पचौमी गांव में एक मकान की नींव की खुदाई के दौरान भगवान शिव की प्राचीन प्रतिमा मिली है। इतिहासकारों की राय है कि यह पाषाण प्रतिमा 15 सौ साल से ज्यादा पुरानी गुप्तकाल की हो सकती है। प्रतिमा को फिलहाल एमजेपी रुहेलखंड विश्वविद्यालय के प्राचीन इतिहास एवं संस्कृति विभाग के संरक्षण में रखा गया है। विभाग ने पचौमी गांव की साइट के वैज्ञानिक सर्वे के लिए भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) से लाइसेंस भी मांगा है। इतिहासकारों का मानना है कि इस साइट के सर्वे में और कई पुरानिधियां मिल सकती हैं।
पचौमी गांव के किसान रामपाल मिश्र को मकान की नींव खुदाई के दौरान मिली यह यह शिव प्रतिमा जमीन में तीन फीट नीचे गड़ी हुई थी। रामपाल मिश्रा ने मजदूरों से इसे निकलवाने के बाद विश्वविद्यालय के प्राचीन इतिहास विभाग को सूचना दी। इसके बाद विभागाध्यक्ष प्रो. श्याम बिहारी लाल ने टीम के साथ पचौमी जाकर प्रतिमा अपने संरक्षण में ले लिया और उसे लाकर विश्वविद्यालय के पांचाल संग्रहालय में सुरक्षित रखवा लिया है। प्रो. श्याम बिहारी लाल ने बताया कि यह प्रतिमा गुप्त काल की होने का अनुमान है। गुप्त काल पांचवी शताब्दी में था। ऐसे में यह प्रतिमा 15 सौ साल पुरानी हो सकती है। यह प्रतिमा मिलने के बाद प्राचीन इतिहास विभाग ने पचौमी में वैज्ञानिक सर्वे कराने का निर्णय लिया है। प्रो. लाल ने बताया कि सर्वे के लाइसेंस के लिए एएसआई को आवेदन कर रहे हैं। इससे सर्वे से साइट को सुरक्षित कराया जाएगा।
इंसेट...
पहले भी मिल चुकी हैं प्रतिमाएं
शाहजहांपुर रोड पर फरीदपुर से लगभग पांच किमी आगे पचौमी गांव टीले पर बसा हुआ है। यहां पहले भी प्राचीन मूर्तियां मिल चुकी हैं। इतिहासकार डॉ. लाल के अनुसार यहां पहली प्रतिमा भगवान विष्णु की मिली थी जो आदमकद थी। ग्रामीणों ने मंदिर बनवाकर उसे वहीं स्थापित करा दिया लेकिन कुछ समय बाद ही यह प्रतिमा चोरी हो गई। इसके कुछ सालों बाद यहां ब्रह्मा की प्रतिमा मिली थी जो अभी भी वहां के मंदिर में सुरक्षित है। अब शिव प्रतिमा मिलने के बाद इतिहासकारों का ध्यान भी इस गांव की ओर गया है।
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:::वर्जन...
शिव प्रतिमा को विश्वविद्यालय के पांचाल संग्रहालय में सुरक्षित रख लिया गया है। एएसआई को भी इससे अवगत करा दिया है। अगर वह लाइसेंस देते हैं तो पचौमी का वैज्ञानिक सर्वे कराएंगे। इस गांव में और भी पुरानिधियां मिलने की संभावना है। -डॉ. श्याम बिहारी लाल, अध्यक्ष प्राचीन इतिहास एवं संस्कृति विभाग रुहेलखंड विश्वविद्यालय
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पचौमी गांव के किसान रामपाल मिश्र को मकान की नींव खुदाई के दौरान मिली यह यह शिव प्रतिमा जमीन में तीन फीट नीचे गड़ी हुई थी। रामपाल मिश्रा ने मजदूरों से इसे निकलवाने के बाद विश्वविद्यालय के प्राचीन इतिहास विभाग को सूचना दी। इसके बाद विभागाध्यक्ष प्रो. श्याम बिहारी लाल ने टीम के साथ पचौमी जाकर प्रतिमा अपने संरक्षण में ले लिया और उसे लाकर विश्वविद्यालय के पांचाल संग्रहालय में सुरक्षित रखवा लिया है। प्रो. श्याम बिहारी लाल ने बताया कि यह प्रतिमा गुप्त काल की होने का अनुमान है। गुप्त काल पांचवी शताब्दी में था। ऐसे में यह प्रतिमा 15 सौ साल पुरानी हो सकती है। यह प्रतिमा मिलने के बाद प्राचीन इतिहास विभाग ने पचौमी में वैज्ञानिक सर्वे कराने का निर्णय लिया है। प्रो. लाल ने बताया कि सर्वे के लाइसेंस के लिए एएसआई को आवेदन कर रहे हैं। इससे सर्वे से साइट को सुरक्षित कराया जाएगा।
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पहले भी मिल चुकी हैं प्रतिमाएं
शाहजहांपुर रोड पर फरीदपुर से लगभग पांच किमी आगे पचौमी गांव टीले पर बसा हुआ है। यहां पहले भी प्राचीन मूर्तियां मिल चुकी हैं। इतिहासकार डॉ. लाल के अनुसार यहां पहली प्रतिमा भगवान विष्णु की मिली थी जो आदमकद थी। ग्रामीणों ने मंदिर बनवाकर उसे वहीं स्थापित करा दिया लेकिन कुछ समय बाद ही यह प्रतिमा चोरी हो गई। इसके कुछ सालों बाद यहां ब्रह्मा की प्रतिमा मिली थी जो अभी भी वहां के मंदिर में सुरक्षित है। अब शिव प्रतिमा मिलने के बाद इतिहासकारों का ध्यान भी इस गांव की ओर गया है।
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शिव प्रतिमा को विश्वविद्यालय के पांचाल संग्रहालय में सुरक्षित रख लिया गया है। एएसआई को भी इससे अवगत करा दिया है। अगर वह लाइसेंस देते हैं तो पचौमी का वैज्ञानिक सर्वे कराएंगे। इस गांव में और भी पुरानिधियां मिलने की संभावना है। -डॉ. श्याम बिहारी लाल, अध्यक्ष प्राचीन इतिहास एवं संस्कृति विभाग रुहेलखंड विश्वविद्यालय