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बरेली-सितारगंज हाईवे जमीन घोटाला- बाबू जी धीरे चलना.. साहब का पहले ही मुश्किल बचना

Mon, 09 Sep 2019 01:53 AM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Mon, 09 Sep 2019 01:53 AM IST
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Highway
बरेली। बरेली-सितारगंज हाईवे को चौड़ा करने के लिए जमीन के अधिग्रहण की प्रक्रिया के दौरान मुआवजा तय करने में बड़े पैमाने पर हुई घपलेबाजी की एक के बाद एक परतें खुल रही हैं। कृषि भूमि को व्यावसायिक दिखाकर सरकार का करोड़ों रुपया हड़पने में कई बड़े अफसर तो शामिल रहे ही, भ्रष्टाचार की बहती गंगा में कलक्ट्रेट एक बाबू ने भी हाथ धो लिए और अपने एक रिश्तेदार का हाईवे किनारे पेट्रोल पंप दिखाकर कई गुना मुआवजा दिला दिया। अफसरों की जोड़तोड़ से वैसे तो जमीन अधिग्रहण में हुए इस घोटाले की जांच शासन में काफी समय से लटकी हुई है, लेकिन हाल ही घोटालेबाज अफसरों का कच्चा चिट्ठा एक बार फिर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के पास पहुंचा दिए जाने के बाद उनकी बेचैनी फिर बढ़ गई है।
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बरेली-सितारगंज हाईवे को सात की जगह दस मीटर तक चौड़ा करने के लिए नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया यानी एनएचएआई और जिला प्रशासन ने 2012-13 में किसानों की जमीन का अधिग्रहण किया था। इसी दौरान आरोप लगे कि कई अफसरों ने बहेड़ी के पास हथमना, मोधापुर और सिरसा समेत तीन गांवों में तमाम लोगों से सांठगांठ कर उनकी कृषि भूमि को व्यावसायिक दिखा दिया और इसी आधार पर उन्हें कई गुना मुआवजा दिलाकर करोड़ों की रकम का बंदरबांट कर लिया। पूर्व कमिश्नर डॉ. पीवी जगनमोहन इस प्रकरण की जांच रिपोर्ट शासन को भेजी थी जो घोटालेबाज अफसरों ने शासन में ही डंप करा दी। हालांकि इस बीच इस घोटालें की नई-नई परतें खुलती जा रही हैं। सूत्रों के मुताबिक इस घोटाले में बड़े अफसरों के साथ कई कर्मचारियों ने भी अपना भला किया था। कलक्ट्रेट के एक बाबू ने भी अपनी एक रिश्तेदार का हाईवे किनारे पेट्रोल पंप दिखाकर व्यावसायिक दरों पर कई गुना मुआवजा ले लिया। मुख्यमंत्री को भेजी गई शिकायत में इस बाबू और रिश्तेदार दोनों का नाम है। शिकायत में दावा किया गया है कि जिस जगह पर पेट्रोल पंप बताया गया था, उस जगह अब तक खेती हो रही है।
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रिश्वत लेकर बनवाया आलीशान बंगला
मुख्यमंत्री को भेजी शिकायत में यह भी बताया गया है कि हाईवे के लिए भूमि अधिग्रहण के दौरान तैनात रहे कई अफसरों ने मोटी रिश्वत भी ली। एक अधिकारी इस रकम से दिल्ली के पास एक बड़े शहर में आलीशान बंगला बनवा लिया जबकि एक कर्मचारी ने कई पक्के मकान बनवाने के साथ अपने परिवार और रिश्तेदारों के नाम कई जमीनें खरीद लीं।
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भ्रष्टाचार में शामिल नहीं हुए तो कराया नुकसान
इस हाईवे के लिए जमीन अधिग्रहण के दौरान उन तमाम किसानों की जमीनों का कौड़ियों में मोल तय किया गया जिन्होंने अफसरों की साजिश में शामिल होने में दिलचस्पी न दिखाते हुए उन्हें रिश्वत देना कबूल नहीं किया। मुख्यमंत्री को भेजी शिकायत में ऐसे कई किसानों के गाटा नंबर और उनके नामों के उल्लेख करते हुए तय हुए सर्किल रेट का ब्योरा भी दिया गया है।
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