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डीएम की जांच से घबराहट- एनएचएआई की टीम ने उधड़ते गड्ढों पर फिर डाला कोलतार
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बरेली/फरीदपुर। दिल्ली-लखनऊ के बीच बरेली-सीतापुर हाईवे पर अनगिनत खतरे होने के बावजूद एनएचएआई के अफसर प्रशासन को रोड गड्ढा मुक्त होने की रिपोर्ट भेजकर फंस गए हैं। एनएचएआई की टीम ने कुछ जगहों पर गड्ढे भरवाएं भी थे, उनमें लीपापोती होने से अब वे दोबारा उधड़ रहे हैं। डीएम इसकी जांच कराने की बात कह चुके हैं। इससे घबराए एनएचएआई की टीम ने पूर्व में भरवाए गड्ढों पर दोबारा कोलतार डालना शुरू कर दिया है। साथ ही गौसगंज में उस जगह पर रेडियम और लाइट सिग्नल लगाए जा रहे हैं, जहां हादसे में कुछ दिन पहले कई मौतें हो चुकी हैं।
बरेली-सीतापुर हाईवे की दशा दिन ब दिन खराब हो रही है। टूटते और धंसते हाईवे से आए दिन एक्सीडेंट हो रहे हैं। एनएचएआई को हाईवे की मरम्मत के नाम पर करीब छह करोड़ रुपये मिले थे। यह रकम खपने के साथ ही एनएचएआई के अधिकारियों ने डीएम वीरेंद्र कुमार सिंह को यह रिपोर्ट भेजी थी कि हाईवे पर सभी गड्ढे भर दिए गए हैं। साथ ही रोड सेफ्टी के काम भी हो गए हैं।
डीएम के गले जब यह रिपोर्ट नहीं उतरी तो उन्होंने प्रशासनिक अधिकारियों से इसकी जांच कराने की बात कही। इससे घबराई एनएचएआई की टीम ने उन जगहों पर कोलतार फिर से डाल दिया है जहां कुछ दिन पहले पैच वर्क हुए थे, लेकिन उस पर लीपापोती होेने से वे अब उधड़ रहे थे।
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फरीदपुर टोल प्लाजा से पहले गौसगंज में रूट डायवर्जन के पास कई हादसे हो चुके हैं। इसमें उत्तराखंड के एक मंत्री के बेटे सहित कई लोगों की मौत हो चुकी है। यहां भी गड्ढे भरने के साथ स्पीड ब्रेकर भी बनाए गए थे, लेकिन हैवी ट्रैफिक गुजरते ही ये फिर से टूटने लगे। डीएम की जांच शुरू होने से पहले टीम ने गौसगंज सहित कई जगहों पर भरे गए गड्ढों पर फिर से कोलतार डाल दिया है। इसके साथ एक्सीडेंट जोन गौसगंज में स्पीड ब्रेकर पर रेडियम लगाने साथ सौर ऊर्जा से संचालित दो सिग्नल लाइटें भी लगा दी गई हैं। इसके अलावा कई और जगहों पर भी ऐसे काम करा दिए गए हैं।
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बरेली-सीतापुर हाईवे की दशा दिन ब दिन खराब हो रही है। टूटते और धंसते हाईवे से आए दिन एक्सीडेंट हो रहे हैं। एनएचएआई को हाईवे की मरम्मत के नाम पर करीब छह करोड़ रुपये मिले थे। यह रकम खपने के साथ ही एनएचएआई के अधिकारियों ने डीएम वीरेंद्र कुमार सिंह को यह रिपोर्ट भेजी थी कि हाईवे पर सभी गड्ढे भर दिए गए हैं। साथ ही रोड सेफ्टी के काम भी हो गए हैं।
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डीएम के गले जब यह रिपोर्ट नहीं उतरी तो उन्होंने प्रशासनिक अधिकारियों से इसकी जांच कराने की बात कही। इससे घबराई एनएचएआई की टीम ने उन जगहों पर कोलतार फिर से डाल दिया है जहां कुछ दिन पहले पैच वर्क हुए थे, लेकिन उस पर लीपापोती होेने से वे अब उधड़ रहे थे।
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फरीदपुर टोल प्लाजा से पहले गौसगंज में रूट डायवर्जन के पास कई हादसे हो चुके हैं। इसमें उत्तराखंड के एक मंत्री के बेटे सहित कई लोगों की मौत हो चुकी है। यहां भी गड्ढे भरने के साथ स्पीड ब्रेकर भी बनाए गए थे, लेकिन हैवी ट्रैफिक गुजरते ही ये फिर से टूटने लगे। डीएम की जांच शुरू होने से पहले टीम ने गौसगंज सहित कई जगहों पर भरे गए गड्ढों पर फिर से कोलतार डाल दिया है। इसके साथ एक्सीडेंट जोन गौसगंज में स्पीड ब्रेकर पर रेडियम लगाने साथ सौर ऊर्जा से संचालित दो सिग्नल लाइटें भी लगा दी गई हैं। इसके अलावा कई और जगहों पर भी ऐसे काम करा दिए गए हैं।