बरेलीः पुरानी गाड़ियों पर भी लगेगी हाई सिक्योरिटी रजिस्ट्रेशन प्लेट वर्ना पंजीकरण अवैध
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शासन के आदेश पर नई गाड़ियों पर हाई सिक्योरिटी रजिस्ट्रेशन प्लेट यानी एचएसआरपी लगाने की प्रक्रिया पहले से चल रही है, अब 15 साल से ज्यादा पुरानी गाड़ियों पर भी यह प्लेट लगाना अनिवार्य कर दिया गया है। ऐसी किसी भी पुरानी गाड़ी के आरटीओ में फिटनेस और रजिस्ट्रेशन के रिन्युवल पर रोक लगा दी गई है जिस पर यह प्लेट न हो। इसके अलावा बीमा और ट्रांसफर जैसे काम भी नहीं हो पाएंगे।
प्रमुख सचिव राजेश कुमार सिंह की ओर से यह आदेश जारी किया गया है। एआरटीओ प्रशासन आरपी सिंह ने बताया कि आदेश में एचएसआरपी को अनिवार्य कर दिया गया है। यह प्लेट ऑटोमोबाइल डीलरों के यहां ही लगाई जाएंगी। शासन की ओर से इसके लिए रेट भी फिक्स कर दिए गए हैं। उन्होंने बताया कि शासन के दिशा-निर्देश मिलने के बाद सभी डीलरों के साथ अफसरों और कर्मचारियों को भी निर्देश जारी कर दिए गए हैं। शासन ने नई गाड़ियों पर तत्काल प्लेट लगाने को कहा है जबकि पुरानी गाड़ियों के लिए समय सीमा तय की गई है। ऐसी गाड़ियां जिनके निर्माता और डीलर अब नहीं हैं, उन्हें प्लेट लगवाने के लिए आरटीओ कार्यालय में आवेदन करना होगा। आवेदन करने के महीने भर के अंदर प्लेट लगवा दी जाएगी।
क्या है हाई सिक्योरिटी रजिस्ट्रेशन प्लेट
यह आधुनिक नंबर प्लेट एल्यूमिनियम की बनी होती है। इसे सुरक्षा को ध्यान में रखकर बनाया गया है। इस पर एक होलोग्राम स्टिकर होता है जिस पर गाड़ी का इंजन नंबर, चेसिस नंबर और रजिस्ट्रेशन नंबर दर्ज रहता है। मशीन से लिखा रजिस्ट्रेशन नंबर इस प्लेट पर अलग से उभरा नजर आएगा। नंबर प्लेट की खासियत यह है कि इस पर लगे होलोग्राम को आसानी से हटाया नहीं जा सकता।
समय सीमा भी तय
- 2006 से पहले के रजिस्टर्ड सभी वाहन पर चार माह तक
- 2005 से 2010 के बीच रजिस्टर्ड वाहन पर छह माह तक
- 2010 से 2015 तक रजिस्टर्ड वाहन पर आठ माह तक
- 2015 से 2020 के बीच रजिस्टर्ड वाहन पर दस माह तक
हाई सिक्योरिटी रजिस्ट्रेशन प्लेट लगवाने के फायदे
- दुर्घटना होने पर नंबर प्लेट पर बने होलोग्राम की सहायता से वाहन मालिक और गाड़ी के विषय में जानकारी मिल जाएगी।
- नंबर प्लेट पर आईएनडी लिखा होगा। इसमें क्रोमियम प्लेटेड नंबर और इंबॉस रहते हैं, जिससे रात में भी देखा जा सकेगा।
- पहले दुर्घटना होने या अपराध की स्थिति में वाहन चालक नंबर प्लेट बदलने का प्रयास करते थे, मगर अब संभव नहीं होगा।
- डिटेक्टर कैमरे से गाड़ी के बारे में तत्काल पता चल जाएगा। साथ ही, वाहन के डाटा को नेशनल डाटाबेस से जोड़ा जाएगा।