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शोध से लेकर प्रमाणपत्र तक... सब कुछ होगा ऑनलाइन
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MJP Rohilkhand university
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भारतीय और विदेशी प्रोफेसर ऑनलाइन ही करेंगे मूल्यांकन
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पीएचडी शोध समन्वयक की बैठक में लिए गए महत्वपूर्ण फैसले
बरेली। रुहेलखंड विश्वविद्यालय में सोमवार को आयोजित पीएचडी शोध समन्वयक की बैठक में कई महत्वपूर्ण फैसले लिए गए। तय किया गया कि शोध से लेकर प्रमाणपत्र तक सब कुछ ऑनलाइन होगा। पूरी प्रक्रिया पेपर लेस होगी। शोध के मूल्यांकन के लिए भारतीय प्रोफेसर के साथ विदेशी प्रोफेसर भी रहेंगे, जो ऑनलाइन ही मूल्यांकन करेंगे। शोधार्थियों को 400 से 600 शब्द का शोध प्रस्ताव कमेटी के समक्ष प्रस्तुत करना होगा।
बैठक की अध्यक्षता करते हुए कुलपति प्रो. केपी सिंह ने विश्वविद्यालय के नए शोध अध्यादेश पर चर्चा की। उन्होंने कहा कि गुणवत्ता पूर्ण थीसिस निश्चित समय में अवार्ड करना हमारा लक्ष्य है। नए शोध अध्यादेश के अनुसार अब पूरी शोध प्रक्रिया ऑनलाइन होगी। रिसर्च थिसिस सॉफ्ट कॉपी में जमा होगी, उसे चेक करने के बाद ऑनलाइन ही प्रमाणपत्र मिलेगा। मौखिक परीक्षा होने के पश्चात अंत में हार्ड कॉपी सुरक्षित की जाएगी। थीसिस का मूल्यांकन के लिए एक भारतीय और एक विदेशी प्रोफेसर या दोनों विदेशी या दोनों भारतीय का विकल्प रहेगा। सभी विभागाध्यक्ष को केंद्रीय पुस्तकालय में खास तैयार किए गए सॉफ्टवेयर का लिंक और पासवर्ड प्रदान किया जाएगा। इससे वह शोध को चेक कर सके। इसके अलावा विश्वविद्यालय के रिसर्च सेल के प्रभारी प्रोफेसर सुधीर कुमार द्वारा वर्ष 2019-20 में हुए शोध प्रवेश के साक्षात्कार के संबंध में निर्णय लिया गया। साथ ही319 पीएचडी सीटों पर एडमिशन की प्रक्रिया पर भी चर्चा की गई।
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पीएचडी शोध समन्वयक की बैठक में लिए गए महत्वपूर्ण फैसले बरेली। रुहेलखंड विश्वविद्यालय में सोमवार को आयोजित पीएचडी शोध समन्वयक की बैठक में कई महत्वपूर्ण फैसले लिए गए। तय किया गया कि शोध से लेकर प्रमाणपत्र तक सब कुछ ऑनलाइन होगा। पूरी प्रक्रिया पेपर लेस होगी। शोध के मूल्यांकन के लिए भारतीय प्रोफेसर के साथ विदेशी प्रोफेसर भी रहेंगे, जो ऑनलाइन ही मूल्यांकन करेंगे। शोधार्थियों को 400 से 600 शब्द का शोध प्रस्ताव कमेटी के समक्ष प्रस्तुत करना होगा।
बैठक की अध्यक्षता करते हुए कुलपति प्रो. केपी सिंह ने विश्वविद्यालय के नए शोध अध्यादेश पर चर्चा की। उन्होंने कहा कि गुणवत्ता पूर्ण थीसिस निश्चित समय में अवार्ड करना हमारा लक्ष्य है। नए शोध अध्यादेश के अनुसार अब पूरी शोध प्रक्रिया ऑनलाइन होगी। रिसर्च थिसिस सॉफ्ट कॉपी में जमा होगी, उसे चेक करने के बाद ऑनलाइन ही प्रमाणपत्र मिलेगा। मौखिक परीक्षा होने के पश्चात अंत में हार्ड कॉपी सुरक्षित की जाएगी। थीसिस का मूल्यांकन के लिए एक भारतीय और एक विदेशी प्रोफेसर या दोनों विदेशी या दोनों भारतीय का विकल्प रहेगा। सभी विभागाध्यक्ष को केंद्रीय पुस्तकालय में खास तैयार किए गए सॉफ्टवेयर का लिंक और पासवर्ड प्रदान किया जाएगा। इससे वह शोध को चेक कर सके। इसके अलावा विश्वविद्यालय के रिसर्च सेल के प्रभारी प्रोफेसर सुधीर कुमार द्वारा वर्ष 2019-20 में हुए शोध प्रवेश के साक्षात्कार के संबंध में निर्णय लिया गया। साथ ही319 पीएचडी सीटों पर एडमिशन की प्रक्रिया पर भी चर्चा की गई।
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