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Bareilly News: मौलाना तौकीर मामले में जिला जज कोर्ट ही करेगा सुनवाई
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बरेली। आईएमसी प्रमुख मौलाना तौकीर रजा खां और वर्ष 2010 के बरेली दंगे के अन्य आरोपियों से जुड़े मामले की सुनवाई अब जिला जज के कोर्ट में की जाएगी। जिला जज की अदालत ने इस मामले में सुनवाई के दौरान यह निर्णय लिया।
फास्ट ट्रैक कोर्ट के जज रवि कुमार दिवाकर की अदालत में पिछले दिनों मौलाना तौकीर रजा को लेकर कठोर टिप्पणी की गई थी और उन्हें दंगों का मास्टरमाइंड करार दिया गया था। तब से मौलाना फरार चल रहे हैं। इस मामले में पुलिस चार्जशीट लगा चुकी था जिसमें मौलाना का नाम नहीं था। विवेचक की गवाही के दौरान जानकारी मिलने पर कोर्ट ने स्वत: संज्ञान लिया। इसके साथ ही मौलाना तौकीर के खिलाफ पहले वारंट और फिर गैरजमानती वारंट जारी किए गए।
इसी मामले में आरोपी शाहरुख ने जिला जज की कोर्ट में अर्जी दाखिल की थी कि एडीजे फास्ट ट्रैक कोर्ट से उन्हें न्याय की उम्मीद नहीं है, उनके मामले की सुनवाई किसी अन्य कोर्ट में ट्रांसफर कर दी जाए। जिला जज कोर्ट में इस बात को लेकर पिछली तारीख में दोनों पक्षों की बहस हुई थी और फैसला सुरक्षित कर लिया गया था। बृहस्पतिवार को कोर्ट ने यह फैसला सुनाया अब अब आगे की सुनवाई जिला जज कोर्ट में ही होगी। जिला शासकीय अधिवक्ता सुनिति कुमार पाठक ने बताया कि जिला जज ने फाइल ट्रांसफर के लिए दी गई अर्जी पर यह आदेश किया।
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- वर्ष 2010 के दंगों से जुड़ा यह मामला अभी तक एडीजे फास्ट ट्रैक रवि कुमार दिवाकर के कोर्ट में था। इस मामले में एक अप्रैल की तारीख सुनवाई के लिए तय है। जाहिर है कि अब जिला जज के कोर्ट में एक अप्रैल को मामले की सुनवाई की जाएगी।
पिछले दिनों एडीजे कोर्ट की नाराजगी और दो गैर जमानती वारंट जारी होने के बाद भी मौलाना की गिरफ्तारी नहीं हो सकी थी। कोर्ट ने मौलाना की गिरफ्तारी की जिम्मेदारी सीधे तौर पर एसएसपी को और कानून व्यवस्था दुरुस्त करने की जिम्मेदारी डीएम को दी थी। मौलाना की तलाश में दो सीओ के नेतृत्व में करीब दस टीम लगाई गई थीं। चार राज्यों में दबिश के बाद भी मौलाना का सुराग नहीं मिल सका था।
- ताबड़तोड़ दबिश और बरेली में समर्थकों पर सख्ती के बाद मौलाना तौकीर रजा ने हाईकोर्ट का रुख किया था। उम्मीद थी वहां से राहत मिल जाएगी, लेकिन ऐसा नहीं हो सका। सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने इस मामले में 27 मार्च तक मौलाना तौकीर को स्थानीय कोर्ट में हाजिर होने का निर्देश दिया है।
एडीजे फास्ट ट्रैक कोर्ट से केस हटने को मौलाना तौकीर रजा पक्ष राहत के रूप में देख रहा है। हालांकि उनकी पार्टी के नेता खुलकर कुछ कहने से बच रहे हैं। आईएमसी प्रवक्ता मुनीर इदरीशी से बात की तो उन्होंने बताया कि केस के अन्य आरोपी ने यह अर्जी दी थी जिस पर कोर्ट ने निर्णय लिया है। हाईकोर्ट के आदेश व जिला जज कोर्ट के फैसलों को लेकर उनके वकील कानूनी पक्ष देख रहे हैं। मौलाना तौकीर रजा खां कानून का सम्मान करते हैं। विधिवत जो सही होगा, वही किया जाएगा।
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फास्ट ट्रैक कोर्ट के जज रवि कुमार दिवाकर की अदालत में पिछले दिनों मौलाना तौकीर रजा को लेकर कठोर टिप्पणी की गई थी और उन्हें दंगों का मास्टरमाइंड करार दिया गया था। तब से मौलाना फरार चल रहे हैं। इस मामले में पुलिस चार्जशीट लगा चुकी था जिसमें मौलाना का नाम नहीं था। विवेचक की गवाही के दौरान जानकारी मिलने पर कोर्ट ने स्वत: संज्ञान लिया। इसके साथ ही मौलाना तौकीर के खिलाफ पहले वारंट और फिर गैरजमानती वारंट जारी किए गए।
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इसी मामले में आरोपी शाहरुख ने जिला जज की कोर्ट में अर्जी दाखिल की थी कि एडीजे फास्ट ट्रैक कोर्ट से उन्हें न्याय की उम्मीद नहीं है, उनके मामले की सुनवाई किसी अन्य कोर्ट में ट्रांसफर कर दी जाए। जिला जज कोर्ट में इस बात को लेकर पिछली तारीख में दोनों पक्षों की बहस हुई थी और फैसला सुरक्षित कर लिया गया था। बृहस्पतिवार को कोर्ट ने यह फैसला सुनाया अब अब आगे की सुनवाई जिला जज कोर्ट में ही होगी। जिला शासकीय अधिवक्ता सुनिति कुमार पाठक ने बताया कि जिला जज ने फाइल ट्रांसफर के लिए दी गई अर्जी पर यह आदेश किया।
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- वर्ष 2010 के दंगों से जुड़ा यह मामला अभी तक एडीजे फास्ट ट्रैक रवि कुमार दिवाकर के कोर्ट में था। इस मामले में एक अप्रैल की तारीख सुनवाई के लिए तय है। जाहिर है कि अब जिला जज के कोर्ट में एक अप्रैल को मामले की सुनवाई की जाएगी।
पिछले दिनों एडीजे कोर्ट की नाराजगी और दो गैर जमानती वारंट जारी होने के बाद भी मौलाना की गिरफ्तारी नहीं हो सकी थी। कोर्ट ने मौलाना की गिरफ्तारी की जिम्मेदारी सीधे तौर पर एसएसपी को और कानून व्यवस्था दुरुस्त करने की जिम्मेदारी डीएम को दी थी। मौलाना की तलाश में दो सीओ के नेतृत्व में करीब दस टीम लगाई गई थीं। चार राज्यों में दबिश के बाद भी मौलाना का सुराग नहीं मिल सका था।
- ताबड़तोड़ दबिश और बरेली में समर्थकों पर सख्ती के बाद मौलाना तौकीर रजा ने हाईकोर्ट का रुख किया था। उम्मीद थी वहां से राहत मिल जाएगी, लेकिन ऐसा नहीं हो सका। सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने इस मामले में 27 मार्च तक मौलाना तौकीर को स्थानीय कोर्ट में हाजिर होने का निर्देश दिया है।
एडीजे फास्ट ट्रैक कोर्ट से केस हटने को मौलाना तौकीर रजा पक्ष राहत के रूप में देख रहा है। हालांकि उनकी पार्टी के नेता खुलकर कुछ कहने से बच रहे हैं। आईएमसी प्रवक्ता मुनीर इदरीशी से बात की तो उन्होंने बताया कि केस के अन्य आरोपी ने यह अर्जी दी थी जिस पर कोर्ट ने निर्णय लिया है। हाईकोर्ट के आदेश व जिला जज कोर्ट के फैसलों को लेकर उनके वकील कानूनी पक्ष देख रहे हैं। मौलाना तौकीर रजा खां कानून का सम्मान करते हैं। विधिवत जो सही होगा, वही किया जाएगा।