{"_id":"59c6c3054f1c1b25688b622d","slug":"health-minister-all-say-good-sick-and-left-the-hospital","type":"story","status":"publish","title_hn":"स्वास्थ्य मंत्री बोले सब बढ़िया बीमार तंग आकर अस्पताल छोड़ गई","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
स्वास्थ्य मंत्री बोले सब बढ़िया बीमार तंग आकर अस्पताल छोड़ गई
बरेली
Updated Sun, 24 Sep 2017 01:54 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
आम आदमी को सरकारी अस्पतालों से भले ही तमाम शिकायतें हों। बीमार और उनके तीमारदार बिना पैसे दिए इलाज न होने, दवाएं न मिलने, स्टाफ के खराब व्यवहार और बाहर से दवाएं लेने को मजबूर करने की बात कहते रहे हों लेकिन स्वास्थ्य मंत्री को यहां सब कुछ ठीक मिला। वे जब मंडल भर के स्वास्थ्य अधिकारियों की बैठक लेकर सब कुछ बढ़िया बता रहे थे उसी दौरान जिला महिला अस्पताल स्टाफ के बुरे बर्ताव और ठीक इलाज न मिलने से तंग आकर एक प्रसूता अस्पताल छोड़कर चली गई।
पीलीभीत की छोटी मार्केट में रहने वाली तबस्सुम ने छह सितंबर को यहां जिला महिला अस्पताल में आपरेशन से बेटे को जन्म दिया था। तबस्सुम के मुताबिक, डॉक्टर ने जल्दबाजी में ठीक से टांके नहीं लगाए। 12 दिन बाद ही टांके खुल गए। तबस्सुम के भाई रिजवान ने इसकी शिकायत की तो किसी डॉक्टर ने उनकी नहीं सुनी। दोबारा टांके लगाने को कहा तो बेहोशी के डॉक्टर ने कह दिया कि ज्यादा सुविधाएं चाहिए तो निजी अस्पताल ले जाते यहां क्यों लाए। काफी देर खुशामद करने के बाद टांके लगाए गए लेकिन फिर ध्यान नहीं दिया गया। इससे तंग आकर शनिवार को दोपहर साढ़े 12 बजे तबस्सुम को परिवार वाले एक निजी अस्पताल ले गए। अब वहीं उसका इलाज चल रहा है।
कोट
तबस्सुम को छह सितंबर को भर्ती किया गया था। उसका पहला बच्चा भी आपरेशन से हुआ था। ऐसे मामले में दूसरा आपरेशन काफी जटिल होता है। इसमें टांके खुलने की संभावना बनी रहती है। हालांकि उसे दोबारा टांके लगा दिए गए हैं। सात दिन और रहने के बाद उसकी छुट्टी होती लेकिन तीमारदार उसे यहां से ले गए।
विज्ञापन
- डॉ. अलका शर्मा, चिकित्सा अधीक्षक, महिला अस्पताल
मुझे किसी ने इस बारे में अवगत नहीं कराया है। कोई शिकायत भी नहीं आई है। चिकित्सकों से इस बारे में पूछा जाएगा कि महिला क्यों गई।
- डॉ. विनीत शुक्ला, सीएमओ
कोट
मामला मेरे संज्ञान में नहीं आया है। इसके बारे में संबंधित डॉक्टरों से जानकारी ली जाएगी।
- सिद्धार्थ नाथ सिंह, स्वास्थ्य मंत्री
विज्ञापन
पीलीभीत की छोटी मार्केट में रहने वाली तबस्सुम ने छह सितंबर को यहां जिला महिला अस्पताल में आपरेशन से बेटे को जन्म दिया था। तबस्सुम के मुताबिक, डॉक्टर ने जल्दबाजी में ठीक से टांके नहीं लगाए। 12 दिन बाद ही टांके खुल गए। तबस्सुम के भाई रिजवान ने इसकी शिकायत की तो किसी डॉक्टर ने उनकी नहीं सुनी। दोबारा टांके लगाने को कहा तो बेहोशी के डॉक्टर ने कह दिया कि ज्यादा सुविधाएं चाहिए तो निजी अस्पताल ले जाते यहां क्यों लाए। काफी देर खुशामद करने के बाद टांके लगाए गए लेकिन फिर ध्यान नहीं दिया गया। इससे तंग आकर शनिवार को दोपहर साढ़े 12 बजे तबस्सुम को परिवार वाले एक निजी अस्पताल ले गए। अब वहीं उसका इलाज चल रहा है।
विज्ञापन
कोट
तबस्सुम को छह सितंबर को भर्ती किया गया था। उसका पहला बच्चा भी आपरेशन से हुआ था। ऐसे मामले में दूसरा आपरेशन काफी जटिल होता है। इसमें टांके खुलने की संभावना बनी रहती है। हालांकि उसे दोबारा टांके लगा दिए गए हैं। सात दिन और रहने के बाद उसकी छुट्टी होती लेकिन तीमारदार उसे यहां से ले गए।
विज्ञापन
- डॉ. अलका शर्मा, चिकित्सा अधीक्षक, महिला अस्पताल
मुझे किसी ने इस बारे में अवगत नहीं कराया है। कोई शिकायत भी नहीं आई है। चिकित्सकों से इस बारे में पूछा जाएगा कि महिला क्यों गई।
- डॉ. विनीत शुक्ला, सीएमओ
कोट
मामला मेरे संज्ञान में नहीं आया है। इसके बारे में संबंधित डॉक्टरों से जानकारी ली जाएगी।
- सिद्धार्थ नाथ सिंह, स्वास्थ्य मंत्री