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एनीमिया पीड़ित वृद्धा को दो दिन दौड़ाया फिर भी नहीं किया भर्ती
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जिला अस्पताल में तमाम सख्ती के बाद भी दुत्कारे जा रहे मरीज
परेशान होकर इलाज के लिए प्राइवेट अस्पताल में ले गए परिजन
बरेली। सरकारी सिस्टम बेदम हो चुका है। स्वास्थ्य सेवाएं तो इस कदर बेहाल हैं कि जिला अस्पताल में मरीजों को इलाज की जगह दुत्कार मिल रही है। दो दिनों एनीमिया से पीड़ित 60 साल की वृद्धा दुलारी को जिला अस्पताल के डॉक्टर दौड़ाते रहे। बाद में खून उपलब्ध न होने की बात कहकर भर्ती करने से इनकार कर दिया। परेशान होकर घरवाले वृद्धा को प्राइेवट अस्पताल में ले गए।
बिशारतगंज क्षेत्र के गांव सासे निवासी सत्यपाल सोमवार को 60 वर्षीय मां दुलारी को लेकर जिला अस्पताल पहुंचे। यहां जांच के दौरान उन्हें एनीमिया पाया गया। हीमोग्लोबिन भी सिर्फ चार ग्राम था। हालत खराब होने के कारण वह चल भी नहीं पा रही थीं, लेकिन डॉक्टरों ने ब्लड न होने की बात कहकर भर्ती करने से मना कर दिया। कहा- मंगलवार को आना, तब भर्ती करेंगे। मंगलवार सुबह आठ बजे सत्यपाल मां को लेकर फिर अस्पताल पहुंचे तो उनसे कहा कि दो रक्तदाता लेकर आओ। सत्यपाल ने गांव से दो लोगों को बुला लिया लेकिन फिर भी डॉक्टरों ने उनकी मां को भर्ती नहीं किया। वह दिन भर बूढ़ी मां को लेकर भटकता रहे लेकिन किसी ने नहीं सुनी। सत्यपाल ने बताया कि दो दिनों से डॉक्टर टरका रहे थे। इस बीच मां की तबीयत ज्यादा बिगड़ गई तो उन्हें शहर के एक प्राइवेट अस्पताल में भर्ती कराया। इस बाबत सीएमएस डॉ. टीएस आर्या ने कहा कि मामला उनके संज्ञान में नहीं है। पीड़ित पक्ष शिकायत करे तो कार्रवाई की जाएगी।
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परेशान होकर इलाज के लिए प्राइवेट अस्पताल में ले गए परिजन
बरेली। सरकारी सिस्टम बेदम हो चुका है। स्वास्थ्य सेवाएं तो इस कदर बेहाल हैं कि जिला अस्पताल में मरीजों को इलाज की जगह दुत्कार मिल रही है। दो दिनों एनीमिया से पीड़ित 60 साल की वृद्धा दुलारी को जिला अस्पताल के डॉक्टर दौड़ाते रहे। बाद में खून उपलब्ध न होने की बात कहकर भर्ती करने से इनकार कर दिया। परेशान होकर घरवाले वृद्धा को प्राइेवट अस्पताल में ले गए।
बिशारतगंज क्षेत्र के गांव सासे निवासी सत्यपाल सोमवार को 60 वर्षीय मां दुलारी को लेकर जिला अस्पताल पहुंचे। यहां जांच के दौरान उन्हें एनीमिया पाया गया। हीमोग्लोबिन भी सिर्फ चार ग्राम था। हालत खराब होने के कारण वह चल भी नहीं पा रही थीं, लेकिन डॉक्टरों ने ब्लड न होने की बात कहकर भर्ती करने से मना कर दिया। कहा- मंगलवार को आना, तब भर्ती करेंगे। मंगलवार सुबह आठ बजे सत्यपाल मां को लेकर फिर अस्पताल पहुंचे तो उनसे कहा कि दो रक्तदाता लेकर आओ। सत्यपाल ने गांव से दो लोगों को बुला लिया लेकिन फिर भी डॉक्टरों ने उनकी मां को भर्ती नहीं किया। वह दिन भर बूढ़ी मां को लेकर भटकता रहे लेकिन किसी ने नहीं सुनी। सत्यपाल ने बताया कि दो दिनों से डॉक्टर टरका रहे थे। इस बीच मां की तबीयत ज्यादा बिगड़ गई तो उन्हें शहर के एक प्राइवेट अस्पताल में भर्ती कराया। इस बाबत सीएमएस डॉ. टीएस आर्या ने कहा कि मामला उनके संज्ञान में नहीं है। पीड़ित पक्ष शिकायत करे तो कार्रवाई की जाएगी।
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