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60 हजार गोलियां बंट गईं, तब भरा गया सैंपल
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बरेली। यूपी मेडिकल सप्लाई कारपोरेशन से भेजी गईं शुगर की डेढ़ लाख टेबलेट में साठ हजार बंट जाने के बाद जिला अस्पताल इसकी जांच कराने की याद आई है। बीस दिसंबर को सैंपल लेकर जांच को भेजा गया है। अब तक रिपोर्ट नहीं आई है।
बीते एक माह में दो दवा के सैंपल फेल हो चुके हैं। रिपोर्ट आने तक काफी दवा बांट भी दी गई थी, लेकिन जिला अस्पताल ने इससे कोई सबक नहीं सीखा। नवंबर माह में मेडिकल कारपोरेशन ने जिला अस्पताल को शुगर की दवा मेडकार्मिड और ग्लिन प्राइड की डेढ़ लाख गोलियां भेजी थीं। बेहतर तो ये होता कि सैंपल जांच के बाद ही दवा रोगियों को बांटीं जाती, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। अब स्वास्थ्य विभाग ने ऐसे वक्त में दवा का सैंपल भरा है, जबकि 60 हजार गोलियां मरीजों को बंट चुकी हैं। सीएमओ डॉ. विनीत कुमार शुक्ल ने बताया कि यूपी मेडिकल सप्लाई कारपोरेशन से जब दवाइयां आती है तो उसके साथ में प्रमाण पत्र भी लगकर आता है। इसलिए हम दवा का प्रयोग शुरू कर देते हैं। लेकिन बीच-बीच में कई बार कुछ दवाओं के सैंपल लेकर जिला स्तर से भी उनकी जांच कराते रहते हैं।
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बीते एक माह में दो दवा के सैंपल फेल हो चुके हैं। रिपोर्ट आने तक काफी दवा बांट भी दी गई थी, लेकिन जिला अस्पताल ने इससे कोई सबक नहीं सीखा। नवंबर माह में मेडिकल कारपोरेशन ने जिला अस्पताल को शुगर की दवा मेडकार्मिड और ग्लिन प्राइड की डेढ़ लाख गोलियां भेजी थीं। बेहतर तो ये होता कि सैंपल जांच के बाद ही दवा रोगियों को बांटीं जाती, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। अब स्वास्थ्य विभाग ने ऐसे वक्त में दवा का सैंपल भरा है, जबकि 60 हजार गोलियां मरीजों को बंट चुकी हैं। सीएमओ डॉ. विनीत कुमार शुक्ल ने बताया कि यूपी मेडिकल सप्लाई कारपोरेशन से जब दवाइयां आती है तो उसके साथ में प्रमाण पत्र भी लगकर आता है। इसलिए हम दवा का प्रयोग शुरू कर देते हैं। लेकिन बीच-बीच में कई बार कुछ दवाओं के सैंपल लेकर जिला स्तर से भी उनकी जांच कराते रहते हैं।
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