{"_id":"5d87b82c8ebc3e012f280a8a","slug":"health-bareilly-news-bly377253011","type":"story","status":"publish","title_hn":"प्रसूता की मौत पर निजी अस्पताल में हंगामा, दो थानों की पुलिस पहुंची","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
प्रसूता की मौत पर निजी अस्पताल में हंगामा, दो थानों की पुलिस पहुंची
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बदायूं। बिना रजिस्ट्रेशन चल रहे एक निजी अस्पताल में ऑपरेशन से प्रसव के बाद पहले बच्चे और दो दिन बाद जच्चा की मौत हो गई। परिवार वालों ने डॉक्टर पर मनमानी और लापरवाही का आरोप लगाते हुए रविवार को जमकर हंगामा किया। मामला बिगड़ता देखकर डॉक्टर और स्टाफ के लोग वहां से खिसक लिए। कोतवाली और सिविल लाइंस थाना पुलिस ने मौके पर पहुंच कर मामला शांत कराया। रिपोर्ट दर्ज कराने को तहरीर दी गई है।
सिविल लाइंस थाना क्षेत्र में एक निजी अस्पताल है। यह अस्पताल जिला महिला अस्पताल में कार्यरत रह चुकीं एक महिला चिकित्सक चलाती हैं। कुंवरगांव थाने के गांव कासमपुर के बबलू ने अपनी पत्नी महरूम को प्रसव के लिए 19 सितंबर को यहां भर्ती कराया था। महरूम ने ऑपरेशन से बच्चे को जन्म दिया, लेकिन अगले दिन ही बच्चे की मौत हो गई। परिवार वालों ने हंगामा किया तो डॉक्टर ने समझा दिया कि अगर आपरेशन न किया जाता तो जच्चा की भी जान चली जाती। किसी तरह महरूम के परिवार वाले शांत हो गए। शनिवार को महरूम की हालत भी बिगड़ने लगी। इस पर डॉक्टर ने उसे खून की कमी बताई। महरूम का देवर साजिद बरेली से खून लेकर आया। डॉक्टर ने उसे खून चढ़ा भी दिया। इसके बावजूद हालत मेें सुधार नहीं हुआ। परिजन के मुताबिक शनिवार शाम से महिला की हालत ज्यादा बिगड़ने लगी। बकौल साजिद रात करीब 12 बजे तक वह डॉक्टर को फोन करता रहा, लेकिन वह नहीं आईं। इसके बाद परिवार वाले महरूम को बरेली ले जा रहे थे। वहां पहुंचने पर निजी अस्पताल में डॉक्टर ने मृत घोषित कर दिया।
रविवार को शव लेकर परिवार के लोग अस्पताल पर पहुंचे और जमकर हंगामा किया। डॉक्टर और स्टाफ के लोग मौके से भाग निकले। सूचना पर सिविल लाइंस और कोतवाली पुलिस ने पहुंच कर हंगामा जैसे तैसे शांत कराया। रिपोर्ट दर्ज कराने को तहरीर दी गई।
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प्रभारी सीएमओ बोले-चोरी छिपे चल रहा था अस्पताल
बदायूं। बरेली रोड पर निजी अस्पताल में जच्चा-बच्चा की मौत के बाद जिम्मेदार अपनी गर्दन बचाने में जुट गए हैं। प्रभारी सीएमओ डॉ. मंजीत सिंह ने माना है कि अस्पताल बिना रजिस्ट्रेशन चल रहा था। तीन दिन पहले ही टीम ने छापा भी मारा था, लेकिन उस वक्त कुछ नहीं मिला था।
बिना रजिस्ट्रेशन अस्पताल और झोलाछाप को लेकर जिला काफी बदनाम रहा है। निजी अस्पताल की डॉक्टर जिला महिला अस्पताल में तैनाती के दौरान भी काफी विवादित रहीं थीं। इस निजी अस्पताल में पहले भी इस तरह के कई मामले सामने आ चुके हैं। डेढ़ साल पहले डीएम के आदेश पर रिपोर्ट भी दर्ज कराई गई थी। इसके बावजूद बिना रजिस्ट्रेशन के यहां न सिर्फ प्रसव बल्कि जटिल प्रसव के आपरेशन भी किए जा रहे थे। सीएमओ डॉ. मंजीत सिंह का कहना है कि तीन दिन पहले टीम ने यहां छापा मारा था। उस वक्त अस्पताल में स्टाफ, आपरेशन से जुड़ा सामान, दवाएं या अन्य कुछ ऐसा नहीं मिला था जिससे यह साफ हो सके कि यहां अस्पताल चल रहा है। जांच कराई जा रही है।
जब महिला की डिलीवरी हुई तो वह ठीक थी। उसके बाद उसकी अचानक सांस फूलने लगी थी, जिस पर उसे दवाएं और ऑक्सीजन दी गई। हालत बिगड़ने पर उसे बरेली रेफर कर दिया था, वहीं से पता चला कि महिला की मौत हो गई है। परिजन द्वारा फोन किए जाने के बाद भी न आने की बात गलत है। वह वहीं पर सोती हैं। ऐसे में न आने का तो सवाल ही नहीं उठता। अस्पताल का रजिस्ट्रेशन इसलिए नहीं हो पाया है क्योंकि फायर वाले एनओसी देने के लिए 20-25 हजार मांगते हैं। एनओसी न होने के कारण ही कागज अटके हुए हैं।
- अस्पताल संचालक
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सिविल लाइंस थाना क्षेत्र में एक निजी अस्पताल है। यह अस्पताल जिला महिला अस्पताल में कार्यरत रह चुकीं एक महिला चिकित्सक चलाती हैं। कुंवरगांव थाने के गांव कासमपुर के बबलू ने अपनी पत्नी महरूम को प्रसव के लिए 19 सितंबर को यहां भर्ती कराया था। महरूम ने ऑपरेशन से बच्चे को जन्म दिया, लेकिन अगले दिन ही बच्चे की मौत हो गई। परिवार वालों ने हंगामा किया तो डॉक्टर ने समझा दिया कि अगर आपरेशन न किया जाता तो जच्चा की भी जान चली जाती। किसी तरह महरूम के परिवार वाले शांत हो गए। शनिवार को महरूम की हालत भी बिगड़ने लगी। इस पर डॉक्टर ने उसे खून की कमी बताई। महरूम का देवर साजिद बरेली से खून लेकर आया। डॉक्टर ने उसे खून चढ़ा भी दिया। इसके बावजूद हालत मेें सुधार नहीं हुआ। परिजन के मुताबिक शनिवार शाम से महिला की हालत ज्यादा बिगड़ने लगी। बकौल साजिद रात करीब 12 बजे तक वह डॉक्टर को फोन करता रहा, लेकिन वह नहीं आईं। इसके बाद परिवार वाले महरूम को बरेली ले जा रहे थे। वहां पहुंचने पर निजी अस्पताल में डॉक्टर ने मृत घोषित कर दिया।
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रविवार को शव लेकर परिवार के लोग अस्पताल पर पहुंचे और जमकर हंगामा किया। डॉक्टर और स्टाफ के लोग मौके से भाग निकले। सूचना पर सिविल लाइंस और कोतवाली पुलिस ने पहुंच कर हंगामा जैसे तैसे शांत कराया। रिपोर्ट दर्ज कराने को तहरीर दी गई।
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प्रभारी सीएमओ बोले-चोरी छिपे चल रहा था अस्पताल
बदायूं। बरेली रोड पर निजी अस्पताल में जच्चा-बच्चा की मौत के बाद जिम्मेदार अपनी गर्दन बचाने में जुट गए हैं। प्रभारी सीएमओ डॉ. मंजीत सिंह ने माना है कि अस्पताल बिना रजिस्ट्रेशन चल रहा था। तीन दिन पहले ही टीम ने छापा भी मारा था, लेकिन उस वक्त कुछ नहीं मिला था।
बिना रजिस्ट्रेशन अस्पताल और झोलाछाप को लेकर जिला काफी बदनाम रहा है। निजी अस्पताल की डॉक्टर जिला महिला अस्पताल में तैनाती के दौरान भी काफी विवादित रहीं थीं। इस निजी अस्पताल में पहले भी इस तरह के कई मामले सामने आ चुके हैं। डेढ़ साल पहले डीएम के आदेश पर रिपोर्ट भी दर्ज कराई गई थी। इसके बावजूद बिना रजिस्ट्रेशन के यहां न सिर्फ प्रसव बल्कि जटिल प्रसव के आपरेशन भी किए जा रहे थे। सीएमओ डॉ. मंजीत सिंह का कहना है कि तीन दिन पहले टीम ने यहां छापा मारा था। उस वक्त अस्पताल में स्टाफ, आपरेशन से जुड़ा सामान, दवाएं या अन्य कुछ ऐसा नहीं मिला था जिससे यह साफ हो सके कि यहां अस्पताल चल रहा है। जांच कराई जा रही है।
जब महिला की डिलीवरी हुई तो वह ठीक थी। उसके बाद उसकी अचानक सांस फूलने लगी थी, जिस पर उसे दवाएं और ऑक्सीजन दी गई। हालत बिगड़ने पर उसे बरेली रेफर कर दिया था, वहीं से पता चला कि महिला की मौत हो गई है। परिजन द्वारा फोन किए जाने के बाद भी न आने की बात गलत है। वह वहीं पर सोती हैं। ऐसे में न आने का तो सवाल ही नहीं उठता। अस्पताल का रजिस्ट्रेशन इसलिए नहीं हो पाया है क्योंकि फायर वाले एनओसी देने के लिए 20-25 हजार मांगते हैं। एनओसी न होने के कारण ही कागज अटके हुए हैं।
- अस्पताल संचालक