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संचारी रोग की मीटिंग में 87 के बजाय आए सिर्फ एक प्रधान
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बरेली। जानलेवा बुखार से कई लोगों की जान जा चुकी है और हजारों लोगों की जिंदगी दांव पर लगी हुई है लेकिन सरकारी सिस्टम को इससे भी कोई खास फर्क नहीं पड़ रहा। अफसर इन हालात में भी चिट्ठी-चिट्ठी खेल रहे हैं। हालत यह है कि संचारी रोग नियंत्रण अभियान के तहत ब्लॉक मुख्यालयों पर बुलाई गई बैठकों में ग्राम प्रधानों को सूचना देकर बुलाने की जिम्मेदारी भी अफसरों ने एक-दूसरे पर टाल दी। नतीजा यह हुआ ज्यादातर ब्लॉकों में इस वजह से नाममात्र के लिए ही प्रधान पहुंचे। हद तो तब हो गई जब मझगवां ब्लॉक की बैठक में 87 ग्राम प्रधानों में से सिर्फ एक प्रधान हिस्सा लेने पहुंचा। अफसरों की लापरवाही का यह मामला डीएम तक पहुंचने के बाद सीडीओ ने डीपीआरओ को नोटिस दिया है। हालांकि डीपीआरओ ने इसके लिए स्वास्थ्य विभाग के अफसरों की लापरवाही को जिम्मेदार बताया है।
कुछ सालों से बरेली जिला बुखार से मौतों को लेकर संवेदनशील होता जा रहा है। पिछले साल फैल्सीपेरम मलेरिया से जिले में दो सौ से ज्यादा मौत हुई थीं। इस बार भी यह बुखार पिछले साल जैसी महामारी बनता नजर आ रहा है। अब तक फैल्सीपेरम मलेरिया से जिले में दर्जन भर से ज्यादा मौत होने की सूचनाएं हैं और हजारों लोग इसकी गिरफ्त में हैं और सरकारी अस्पतालों में डॉक्टरों और संसाधनों की कमी से उन्हें सही इलाज भी नहीं मिल पा रहा है। आंवला तहसील क्षेत्र जहां पिछले साल फैल्सीपेरम मलेरिया से सर्वाधिक जानें गईं थीं, वहीं से यह बुखार शुरू होकर इस बार भी लगभग पूरे जिले में लोगों को चपेट में ले चुका है। हालात पहले से गंभीर हैं और सिस्टम की बेपरवाही उन्हें और गंभीर बना रही है। मुख्यमंत्री की ओर से संचारी रोग नियंत्रण अभियान चलाए जाने का निर्देश दिए जाने के बावजूद अफसर कागजी खानापूरी करने से बाज नहीं आ रहे हैं।
पिछले हफ्ते इस अभियान के तहत ब्लॉक मुख्यालयों पर अफसरों की ग्राम प्रधानों के साथ बैठकें होनी थीं जिनमें उन्हें संचारी रोगों से बचाव के साथ स्वच्छता और मच्छरनाशक दवाओं के छिड़काव के बारे में निर्देश दिए जाने थे लेकिन इन बैठकों की सूचना ही प्रधानों तक नहीं पहुंची। बैठकों के तय कार्यक्रम के मुताबिक स्वास्थ्य विभाग के अफसर तो ब्लॉकों में पहुंचे लेकिन किसी बैठक में दो-चार ग्राम प्रधान आए तो किसी में बमुश्किल दर्जन भर। मझगवां ब्लॉक जो पिछले साल फैल्सीपेरम मलेरिया के प्रकोप की वजह से सर्वाधिक संवेदनशील रहा था, वहां तो 87 में से सिर्फ एक ही ग्राम प्रधान आया। स्वास्थ्य विभाग की ओर से इस बारे में डीएम को लिखा गया जिसके बाद सीडीओ सत्येंद्र कुमार ने इस मामले में डीपीआरओ चंद्रिका प्रसाद को नोटिस देकर दो दिन के अंदर स्पष्टीकरण मांगा है।
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स्वास्थ्य विभाग ने सूचना नहीं दी: डीपीआरओ
संचारी रोग नियंत्रण अभियान के लिए स्वास्थ्य विभाग ने पहले मुझे कोई जानकारी दिए बगैर ही ब्लॉकों पर प्रधानों की बैठक बुला ली थी। इसी वजह से ही इन बैठकों में प्रधानों की संख्या बहुत कम रही। डीएम ने भी इस बारे में मुझसे जानकारी मांगी थी, मैंने उन्हें इसकी वजह भी बता दी थी। इसके बाद इस अभियान के तहत ब्लॉकों में फिर बैठक बुलाई गई। इन बैठकों में ग्राम प्रधानों की भागेदारी ठीक रही। उन्हें संचारी रोगों पर नियंत्रण के लिए शासन की कार्ययोजना की विस्तार से जानकारी दे दी गई है। -चंद्रिका प्रसाद, डीपीआरओ
पत्र भेजा फिर आपत्ति भी जताई: सीएमओ
इस अभियान को लेकर शासन से आदेश आए थे जिनमें पंचायत राज विभाग की भी भूमिका साफ की गई है। संचारी रोग नियंत्रण अभियान के तहत बैठक मीटिंग बुलाने के लिए स्वास्थ्य विभाग की ओर से जो पत्र जारी किए गए थे, उनकी प्रतिलिपि डीपीआरओ दफ्तर को भी भेजी गई थी, लेकिन इसके बाद भी ज्यादातर ब्लॉकों में हुई बैठकों में ग्राम प्रधान नहीं पहुंचे। इस स्थिति पर डीपीआरओ के समक्ष आपत्ति भी जाहिर कर दी गई थी। हालांकि रविवार को दोबारा बुलाई गई बैठक में संतोषजनक संख्या में ग्राम प्रधान शामिल हुए थे।
- डॉ. विनीत शुक्ल, सीएमओ
संचारी रोग नियंत्रण अभियान की बैठक की ग्राम प्रधानों को जानकारी ही नहीं दी गई। इस वजह से ज्यादातर ब्लॉकों में हुई बैठक में कोई योजना ही नहीं बन सकी। इन बैठकों के लिए दोबारा सूचना जारी करानी पड़ी। इस मामले में लापरवाही दिखाने पर डीपीआरओ से स्पष्टीकरण मांगा है। -सत्येंद्र कुमार, सीडीओ
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कुछ सालों से बरेली जिला बुखार से मौतों को लेकर संवेदनशील होता जा रहा है। पिछले साल फैल्सीपेरम मलेरिया से जिले में दो सौ से ज्यादा मौत हुई थीं। इस बार भी यह बुखार पिछले साल जैसी महामारी बनता नजर आ रहा है। अब तक फैल्सीपेरम मलेरिया से जिले में दर्जन भर से ज्यादा मौत होने की सूचनाएं हैं और हजारों लोग इसकी गिरफ्त में हैं और सरकारी अस्पतालों में डॉक्टरों और संसाधनों की कमी से उन्हें सही इलाज भी नहीं मिल पा रहा है। आंवला तहसील क्षेत्र जहां पिछले साल फैल्सीपेरम मलेरिया से सर्वाधिक जानें गईं थीं, वहीं से यह बुखार शुरू होकर इस बार भी लगभग पूरे जिले में लोगों को चपेट में ले चुका है। हालात पहले से गंभीर हैं और सिस्टम की बेपरवाही उन्हें और गंभीर बना रही है। मुख्यमंत्री की ओर से संचारी रोग नियंत्रण अभियान चलाए जाने का निर्देश दिए जाने के बावजूद अफसर कागजी खानापूरी करने से बाज नहीं आ रहे हैं।
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पिछले हफ्ते इस अभियान के तहत ब्लॉक मुख्यालयों पर अफसरों की ग्राम प्रधानों के साथ बैठकें होनी थीं जिनमें उन्हें संचारी रोगों से बचाव के साथ स्वच्छता और मच्छरनाशक दवाओं के छिड़काव के बारे में निर्देश दिए जाने थे लेकिन इन बैठकों की सूचना ही प्रधानों तक नहीं पहुंची। बैठकों के तय कार्यक्रम के मुताबिक स्वास्थ्य विभाग के अफसर तो ब्लॉकों में पहुंचे लेकिन किसी बैठक में दो-चार ग्राम प्रधान आए तो किसी में बमुश्किल दर्जन भर। मझगवां ब्लॉक जो पिछले साल फैल्सीपेरम मलेरिया के प्रकोप की वजह से सर्वाधिक संवेदनशील रहा था, वहां तो 87 में से सिर्फ एक ही ग्राम प्रधान आया। स्वास्थ्य विभाग की ओर से इस बारे में डीएम को लिखा गया जिसके बाद सीडीओ सत्येंद्र कुमार ने इस मामले में डीपीआरओ चंद्रिका प्रसाद को नोटिस देकर दो दिन के अंदर स्पष्टीकरण मांगा है।
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स्वास्थ्य विभाग ने सूचना नहीं दी: डीपीआरओ
संचारी रोग नियंत्रण अभियान के लिए स्वास्थ्य विभाग ने पहले मुझे कोई जानकारी दिए बगैर ही ब्लॉकों पर प्रधानों की बैठक बुला ली थी। इसी वजह से ही इन बैठकों में प्रधानों की संख्या बहुत कम रही। डीएम ने भी इस बारे में मुझसे जानकारी मांगी थी, मैंने उन्हें इसकी वजह भी बता दी थी। इसके बाद इस अभियान के तहत ब्लॉकों में फिर बैठक बुलाई गई। इन बैठकों में ग्राम प्रधानों की भागेदारी ठीक रही। उन्हें संचारी रोगों पर नियंत्रण के लिए शासन की कार्ययोजना की विस्तार से जानकारी दे दी गई है। -चंद्रिका प्रसाद, डीपीआरओ
पत्र भेजा फिर आपत्ति भी जताई: सीएमओ
इस अभियान को लेकर शासन से आदेश आए थे जिनमें पंचायत राज विभाग की भी भूमिका साफ की गई है। संचारी रोग नियंत्रण अभियान के तहत बैठक मीटिंग बुलाने के लिए स्वास्थ्य विभाग की ओर से जो पत्र जारी किए गए थे, उनकी प्रतिलिपि डीपीआरओ दफ्तर को भी भेजी गई थी, लेकिन इसके बाद भी ज्यादातर ब्लॉकों में हुई बैठकों में ग्राम प्रधान नहीं पहुंचे। इस स्थिति पर डीपीआरओ के समक्ष आपत्ति भी जाहिर कर दी गई थी। हालांकि रविवार को दोबारा बुलाई गई बैठक में संतोषजनक संख्या में ग्राम प्रधान शामिल हुए थे।
- डॉ. विनीत शुक्ल, सीएमओ
संचारी रोग नियंत्रण अभियान की बैठक की ग्राम प्रधानों को जानकारी ही नहीं दी गई। इस वजह से ज्यादातर ब्लॉकों में हुई बैठक में कोई योजना ही नहीं बन सकी। इन बैठकों के लिए दोबारा सूचना जारी करानी पड़ी। इस मामले में लापरवाही दिखाने पर डीपीआरओ से स्पष्टीकरण मांगा है। -सत्येंद्र कुमार, सीडीओ