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स्वच्छता सर्वेक्षण के बीच आधे शहर का सीवर जाम, शिकायतों की भरमार

Sun, 16 Feb 2020 03:17 AM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Sun, 16 Feb 2020 03:17 AM IST
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Half of city sewer jam, lots of complaints amid cleanliness survey
स्मार्ट सिटी - फोटो : डेमो फोटो
बरेली। बरेलीवासियों को स्मार्ट सिटी का सपना दिखाने वाले नगर निगम के प्रशासनिक अधिकारियों को शहर की मूल समस्याओं से कुछ लेना देना नहीं। शायद यही वजह है कि दशकों से शहर से कूड़ा उठान व सीवर लाइनों की सुविधा व इसके विस्तारीकरण का काम नहीं किया गया, जिसके चलते शहर में हर ओर गंदगी दिखाई देती है। सीवर का गंदा पानी और मल गलियों की नालियों मेें बहते देखा जा सकता है। इसके अलावा आधे शहर में जहां सीवर लाइनें पहले से हैं, वहां या तो सीवर लाइन ओवरफ्लो कर रही हैं या चोक हो गई हैं। हर रोज निगम में ऐसी एक ना एक शिकायत जरूर आती है। पर निगम के अधिकारी इसका कोई ठोस समाधान निकालते नहीं दिखाई देते हैं। अधिकारियों का पूरा ध्यान शहर को स्वच्छता सर्वेक्षण में अव्वल स्थान दिलाना है, भले ही इसके लिए कोई भी जोड़ तोड़ करनी पड़े। इस दुर्दशा के बीच शहर के लोग स्मार्ट सिटी का तमगा लेकर ही संतोष करते नजर आते हैं।
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सीवर लाइन में मिल रहा नालों का पानी-कूड़ा, कर रहा चोक

शहर में करीब 60 साल पहले सीवर लाइनें डाली गई थीं। अब ये सभी गल रही हैं। इन्हीं सीवर लाइनोें में सीवर का गंदा पानी समेत नाले और नालियों का पानी भी बहाया जा रहा है। नालों में डाले जा रहे कूड़े और पॉलिथीन आदि बहकर सीवर लाइनों को रोजाना चोक कर रहे हैं। पर निगम के अधिकारी ना तो नालों की सफाई करा रहे हैं और ना ही सीवर लाइनों में इन नालों के पानी के बहाव को ही बंद कर रहे हैं।
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नई नहीं, पुरानी लाइनों को ही बदल रहा जल निगम

पिछले कुछ महीनों से चौपुला से लेकर जंक्शन, कचहरी से चौपुला और अब ईसाई पुलिया से कालीबाड़ी आदि रोड पर चल रहा सीवर ट्रंक लाइन का कार्य नई लाइनें डालने का कार्य नहीं है। पुरानी लाइनें ही बदली जा रही हैं। जल निगम द्वारा यह कार्य किया जा रहा है। इस दौरान नए चेंबर आदि जरूर बनाए जा रहे हैं। इसके बाद करीब 434 करोड़ की लागत से गलियों के लिए छोटी सीवर लाइनें भी बिछाई जानी हैं।
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हर रोज निकलता है 142 एमएलडी गंदा पानी

शहर में हर रोज 142 एमएलडी गंदा पानी निकलता है। इसमें सीवर, नाले और नालियों का पानी शामिल है। पर इस पानी को भी सीवर ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) ना होने से सीधे नदियों मेें डाल दिया जाता है। इसमें नकटिया और किला नदी आदि शामिल हैं। इतनी बड़ी मात्रा में नदियों में पानी गिराने के चलते यह नदियां काली पड़ चुकी हैं। वहीं, प्रदूषण नियंत्रण विभाग और अन्य सरकारी महकमा इसे लेकर खामोश है। कई साल की जद्दोजहद के बाद शहर में सराय तल्फी में एक एसटीपी बनाने की कवायद हुई है। जल निगम इसे बना रहा है। पर यह एसटीपी भी अगले दो तीन सालों में बनकर तैयार हो पाएगा, ऐसा अनुमान है। ऐसे में सम्यक निकासी के अभाव में नदियां यूं ही प्रदूषित होती रहेंगी।

पिछले एक महीने में निगम में आईं शिकायतें

- बिहारीपुर कहरवान में मकान संख्या 312 के सामने लगा डिप चोक है, कुछ निजी लाइनें भी चोक हैं।
- गली आर्य समाज में सभी नाले नालियां दुकानदारों ने स्लैप डालकर बंद किए हुए हैं, सीवर भी चोक है।
- राजेंद्र नगर में शहीद पंकज अरोड़ा पार्क कॉलोनी में सीवर लाइन चोक।
- जगतपुर पुराना शहर में मकान नंबर 30/5 से 30/2 तक सीवर लगातार ओवरफ्लो कर रहा है।
- स्टेडियम रोड आशापुरम् 12 रामायण विहार कॉलोनी में सीवर लाइन चोक।
- लोधी टोला में सीवर लाइन चोक, सफाई की दरकार।
- शाहबाद पुलिस चौकी के पास सीवर लाइन चोक।
- मलूकपुर में शराब की चट्टी के सामने सीवर लाइन चोक।
- गुलाबनगर गौरी शंकर मंदिर के पास नवीन चंद्र मिठान के सामने सीवर लाइन चोक।
- माधौबाड़ी में सीवर लाइन चोक होने से लोगों को परेशानी।
- आजाद नगर नौदीप कॉलोनी के पास सीवर लाइन चोक।
- रामायण विहार आशा पुरम स्टेडियम रोड पर सीवर लाइन चोक।
- कालीबाड़ी के पास बताशे वाली गली में सीवर लाइन चोक।
- स्टेडियम रोड पर सेंट्रल स्टेट कॉलोनी में सीवर लाइन चोक।

शहर की सीवर लाइन में नाले और नालियों का पानी बह कर आ रहा है। इसमें पालिथीन आदि होने से अक्सर सीवर लाइनें चोक हो जा रही हैं। जहां से भी शिकायत आ रही है, वहां तुरंत समाधान किया जा रहा है।
- तारकेश्वर पांडेय, एई, जलकल विभाग, नगर निगम
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