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जीएसटी: ब्रांडेड पर बिल.. दुकानों पर पर्ची
बरेली
Updated Thu, 12 Oct 2017 01:50 AM IST
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दिवाली-धनतेरस की खरीदारी करने जा रहे ग्राहकों को बता दें कि ज्यादातर दुकानदार जीएसटी का खौफ दिखाकर पक्के बिल नहीं काट रहे हैं। ग्राहकों के पूछने पर कहते हैं कि कच्ची पर्ची में ही उनका फायदा है वर्ना टैक्स लग जाएगा। यह तो ग्राहक को फायदा पहुंचाने के लिए करते हैं। अगर ग्राहक ने ध्यान नहीं दिया तो टैक्स चोरी का फायदा दुकानदार की जेब में जाता है।
ग्राहकों को सबसे ज्यादा ध्यान रखने की बात यह है कि बाजार में कीमत टैक्स जोड़कर ही बतायी जाती है। हालांकि बड़े और ब्रांडेड शो रूम में पक्के बिल दिए जा रहे हैं। यह घालमेल सराफा, गारमेंट, इलेक्ट्रानिक्स, बर्तन, पटाखा, ड्राईफ्रूट, मिठाई, नमकीन, आचार, किराना समेत सभी प्रमुख बाजारों में लाइव सर्वे में अमर उजाला टीम ने पकड़ा है। बाजारों में ज्यादातर लेनदेन कैश में ही हो रहा है। जानकारी के लिए पढ़ें यह लाइव रिपोर्ट।
सौफुटा रोड: दिवाली है तो जाहिर है कि बच्चे आतिशबाजी मांगेंगे ही। इन दिनों सौफुटा रोड पर पटाखा बाजार सजा है। आप कितनी भी खरीदारी करें, लेकिन दुकानदार आपको पक्का बिल नहीं देगा। वीर सावरकर निवासी आरके गौड़ अपने पड़ोसी पंकज अग्रवाल के साथ बुधवार शाम पटाखे खरीदने गए। जब दुकानदार से पक्का बिल मांगा तो देने से मना कर दिया जबकि इन ग्राहकों ने ब्रांडेड पटाखे खरीदे थे। मजबूरी में कच्चे बिल पर ही भुगतान कर दिया।
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सराफा बाजार: साहूकारा और शिवाजी मार्ग स्थित सराफा बाजार में गिने चुके दुकानदार ही पक्के बिल दे रहे हैं। दिवाली पर खरीदारी करने पहुंच रहे ग्राहकों को कच्चा बिल (पर्चा) थमाया जा रहा है। सिविल लाइंस स्थित ब्रांडेड और नामीगिरामी शोरूम ग्राहकों को बाकायदा पक्के बिल जारी हो रहे हैं। सराफ संदीप अग्रवाल ने बताया कि शोरूम से खरीदारों को पक्का बिल जेवरात गारंटी के साथ दिया जा रहा है।
इलेक्ट्रानिक्स और क्राकरी बाजार: सिविल लाइंस, प्रेमनगर, राजेंद्रनगर, डीडी पुरम, सुभाषनगर, पुराना शहर, बड़ा बाजार, कुतुबखाना आदि बाजारों में गिने चुने दुकानदार ही पक्का बिल दे हैं। ब्रांडेड आइटमों का भी भुगतान पर्चे पर लिया जा रहा है। इन दिनों त्योहारों पर इन बाजारोें में भीड़भाड़ है। बर्तन, किराना और ड्राई फ्रूट बाजार में तो एक भी बिल पक्का नहीं मिल पा रहा है।
मिठाई व नमकीन: त्योहार में मिठाई और नमकीन कारोबार ज्यादा होता है। शहर में दर्जनों मिठाई आदि के बड़े बड़े प्रतिष्ठान हैं। सर्वे में ज्यादातर शोरूम पर पक्का बिल जारी होता नहीं मिला। अपने प्रिंट किए गए पर्चों जारी हो रहे हैं। कुछ दुकानों से जारी पर्चों पर जीएसटी ब्योरा जरूर लिखा मिला। लेकिन वह कहां जमा हो रहा है, इसका पता नहीं।
‘कारोबार पक्के बिलों पर ही वैध है। पटाखा, सराफा, मिठाई, नमकीन, इलेक्ट्रानिक्स आदि बाजारों से शिकायतें मिल रही हैं। जीएसटी के नाम पर भ्रम फैलाया जा रहा है। जिले में बड़ी तादाद में पटाखे आए हैं, उनका स्टाक और सेल चेक कराएंगे।’
- एके गुप्ता, एडिशनल कमिश्नर, वाणिज्यकर
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ग्राहकों को सबसे ज्यादा ध्यान रखने की बात यह है कि बाजार में कीमत टैक्स जोड़कर ही बतायी जाती है। हालांकि बड़े और ब्रांडेड शो रूम में पक्के बिल दिए जा रहे हैं। यह घालमेल सराफा, गारमेंट, इलेक्ट्रानिक्स, बर्तन, पटाखा, ड्राईफ्रूट, मिठाई, नमकीन, आचार, किराना समेत सभी प्रमुख बाजारों में लाइव सर्वे में अमर उजाला टीम ने पकड़ा है। बाजारों में ज्यादातर लेनदेन कैश में ही हो रहा है। जानकारी के लिए पढ़ें यह लाइव रिपोर्ट।
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सौफुटा रोड: दिवाली है तो जाहिर है कि बच्चे आतिशबाजी मांगेंगे ही। इन दिनों सौफुटा रोड पर पटाखा बाजार सजा है। आप कितनी भी खरीदारी करें, लेकिन दुकानदार आपको पक्का बिल नहीं देगा। वीर सावरकर निवासी आरके गौड़ अपने पड़ोसी पंकज अग्रवाल के साथ बुधवार शाम पटाखे खरीदने गए। जब दुकानदार से पक्का बिल मांगा तो देने से मना कर दिया जबकि इन ग्राहकों ने ब्रांडेड पटाखे खरीदे थे। मजबूरी में कच्चे बिल पर ही भुगतान कर दिया।
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सराफा बाजार: साहूकारा और शिवाजी मार्ग स्थित सराफा बाजार में गिने चुके दुकानदार ही पक्के बिल दे रहे हैं। दिवाली पर खरीदारी करने पहुंच रहे ग्राहकों को कच्चा बिल (पर्चा) थमाया जा रहा है। सिविल लाइंस स्थित ब्रांडेड और नामीगिरामी शोरूम ग्राहकों को बाकायदा पक्के बिल जारी हो रहे हैं। सराफ संदीप अग्रवाल ने बताया कि शोरूम से खरीदारों को पक्का बिल जेवरात गारंटी के साथ दिया जा रहा है।
इलेक्ट्रानिक्स और क्राकरी बाजार: सिविल लाइंस, प्रेमनगर, राजेंद्रनगर, डीडी पुरम, सुभाषनगर, पुराना शहर, बड़ा बाजार, कुतुबखाना आदि बाजारों में गिने चुने दुकानदार ही पक्का बिल दे हैं। ब्रांडेड आइटमों का भी भुगतान पर्चे पर लिया जा रहा है। इन दिनों त्योहारों पर इन बाजारोें में भीड़भाड़ है। बर्तन, किराना और ड्राई फ्रूट बाजार में तो एक भी बिल पक्का नहीं मिल पा रहा है।
मिठाई व नमकीन: त्योहार में मिठाई और नमकीन कारोबार ज्यादा होता है। शहर में दर्जनों मिठाई आदि के बड़े बड़े प्रतिष्ठान हैं। सर्वे में ज्यादातर शोरूम पर पक्का बिल जारी होता नहीं मिला। अपने प्रिंट किए गए पर्चों जारी हो रहे हैं। कुछ दुकानों से जारी पर्चों पर जीएसटी ब्योरा जरूर लिखा मिला। लेकिन वह कहां जमा हो रहा है, इसका पता नहीं।
‘कारोबार पक्के बिलों पर ही वैध है। पटाखा, सराफा, मिठाई, नमकीन, इलेक्ट्रानिक्स आदि बाजारों से शिकायतें मिल रही हैं। जीएसटी के नाम पर भ्रम फैलाया जा रहा है। जिले में बड़ी तादाद में पटाखे आए हैं, उनका स्टाक और सेल चेक कराएंगे।’
- एके गुप्ता, एडिशनल कमिश्नर, वाणिज्यकर