राज्यपाल आनंदीबेन बोलीं: चार अंक कम आएं ठीक... पर देशभक्ति कम नहीं होनी चाहिए; दिल्ली की घटना का किया जिक्र
रुहेलखंड विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह में राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने कहा कि चार अंक कम आएं तो चलेंगे, लेकिन देशभक्ति कम नहीं होनी चाहिए। ऐसी शिक्षा का कोई अर्थ नहीं रह जाता है, जो हमारे विचार पलट दे। राज्यपाल ने दिल्ली हुई घटना पर चिंता जताई।
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बरेली में रुहेलखंड विश्वविद्यालय के अटल सभागार में बृहस्पतिवार को आयोजित 23वें दीक्षांत समारोह में कुलाधिपति राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने मेधावियों और पीएचडी धारकों को सम्मानित किया। उन्हें उज्जवल भविष्य की शुभकामनाएं दी। विद्यार्थियों को देशभक्ति का संदेश भी दिया। राज्यपाल ने दिल्ली में हुई घटना पर चिंता जताई। कहा कि आज पढ़े-लिखे लोग भी आतंकवादी प्रवृत्ति में शामिल हो रहे हैं। राज्यपाल ने कहा कि चार अंक कम आएंगे तो चलेंगे, लेकिन देशभक्ति हमारे खून में भरी होना चाहिए। ऐसी शिक्षा का कोई अर्थ नहीं रह जाता है, जो हमारे विचार पलट दे।
आनंदीबेन पटेल ने कहा कि दिल्ली में घटना हुई है। पहली बार यह हुआ, जिसमें पढ़े-लिखे लोग आतंकवादी प्रवृत्ति में शामिल हुए। डॉक्टर, इंजीनियर शामिल हुए। क्या पढ़े होंगे वे लोग। उन लोगों ने क्या पढ़ाया होगा। लोगों को पता ही नहीं चला। सरकारों को भी पता नहीं चला। आतंकवादियों की मंशा भारत का उड़ा देने की थी। ऐसे लोगों से हमें लड़ना है। देश को बचाना है। इसलिए हमें चारों ओर दृष्टि रखनी पड़ेगी। सभी की गतिविधियों पर नजर रखनी पड़ेगी।
देशभक्ति हमारे खून में भरी होनी चाहिए- राज्यपाल
राज्यपाल ने कहा कि भारत आगे बढ़ रहा है। दुनिया के कई देशों को पसंद नहीं होगा। ऐसे विचार वाले लोग आतंकवादी प्रवृत्ति में शामिल हुए हैं। जो अध्यापक पढ़ाते थे, वही उसी में शामिल हैं। राज्यपाल ने विद्यार्थियों से कहा कि चार अंक कम आएंगे तो चलेंगे, लेकिन देशभक्ति हमारे खून में भरी होनी चाहिए। आज लोग छोटी-छोटी चीजों के लिए लड़ रहे हैं। जेल में कई लोग बंद हैं, क्या वे शिक्षित हैं।
विद्यार्थियों को बताए सफलता के सूत्र
राज्यपाल ने कहा कि जीवन स्वयं निरंतर सीखने की यात्रा है। सीखना केवल शिक्षा तक सीमित नहीं है। यह विचार, अनुभव और व्यवहार की निरंतर साधना है। अर्जित ज्ञान को समाज के कल्याण, मानवता के उत्थान और राष्ट्र के निर्माण में लगाना चाहिए। अपने सपने को जीवित रखिए। अपनी आंकाक्षाओं को ऊचाइयों तक ले जाइए। बड़ा सोचिए, सशक्त संकल्प कीजिए और कर्म को अपना धर्म बनाइए। यही सफलता के सूत्र हैं।
'निरंतर नई ऊचाइयां छू रहीं छात्राएं'
राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने कहा कि छात्राएं शिक्षा और अनुसंधान में निरंतर नई ऊचाइयां छू रही हैं। शिक्षा के प्रतिस्पर्धा के दौर में संतुलन की स्थिति बने रहे हैं। छात्र और छात्राओं दोनों को समान अवसर, प्रोत्साहन और संसाधन प्राप्त हों। यही समाज के संतुलित विकास की पहचान है। सबको समान अवसर और संसाधन मिलते हैं, लेकिन छात्रों से छात्राएं आगे निकल रही हैं। मुझे तो खुशी होगी, क्योंकि महिलाएं आगे बढ़ें, लेकिन छात्रों को भी पीछे नहीं रहना चाहिए।
राज्यपाल ने कहा कि रुहेलखंड विश्वविद्यालय द्वारा आरंभ की गई नई पहल लाइफटाइम अचीवमेंट अवार्ड अपने आप में एक प्रेरक परंपरा का सूत्रपात है। इस सम्मान के प्रथम प्राप्तकर्ता झारखंड के राज्यपाल संतोष गंगवार का चयन सराहनीय है।
ऐसी कोई शिक्षा नहीं जो हाथों में कलम की जगह बम थमाए- उपाध्याय
प्रदेश के उच्च शिक्षा मंत्री योगेंद्र उपाध्याय ने दिल्ली के आतंकी हमले की निंदा की। उन्होंने कहा कि ऐसी कौन सी शिक्षा है जो हमें आतंकवाद सिखाती है या जिहादी बनाती है। शिक्षा वह नहीं है जो बच्चों के हाथों में कलम या कंप्यूटर की जगह बम या पत्थर थमाए। कोरोना काल में जिन डॉक्टरों ने अपनी परवाह किए बिना लोगों की जान बचाई, वो मानवता की मिसाल बने।
उन्होंने कहा कि ऐसी कौन सी शिक्षा है जो डॉक्टरों को आतंकी बना देती है। केवल एक पुस्तक हमें ज्ञान नहीं दे सकती। इसलिए आवश्यक है कि हम हर क्षेत्र के अच्छे व बुरे पहलू को समझें। दीक्षांत का अर्थ शिक्षांत नहीं है। शिक्षा निरंतर चलती रहती है। स्वामी विवेकानंद ने कहा था कि समाज को संस्कारपूर्ण शिक्षा की आवश्यकता है।