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Bareilly News: राजकीय आयुर्वेदिक कॉलेज को चार नए पाठ्यक्रमों की मंजूरी मिली
Sun, 08 Nov 2026 01:06 AM IST
बरेली ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बरेली
संवाद न्यूज एजेंसी, बरेली
Updated Sun, 08 Nov 2026 01:06 AM IST
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बरेली। एसआरएम राजकीय आयुर्वेदिक मेडिकल कॉलेज को चार परास्नातक पाठ्यक्रम संचालित करने के लिए राज्य स्तर पर एनओसी मिल गई है। महाविद्यालय का निरीक्षण होने के बाद ही नेशनल काउंसिल ऑफ इंडियन मेडिकल सिस्टम (एनसीआईएसएम) महाविद्यालय में सीटों की संख्या निर्धारित करेगी।
प्राचार्य प्रीति शर्मा के अनुसार, चार परास्नातक पाठ्यक्रमों में कौमारभ्रत्य, रसशास्त्र, शरीर संरचना में एमएस व शल्य चिकित्सा में एमडी का कोर्स शुरू होगा। शासन स्तर से शुक्रवार को कॉलेज को अनापत्ति पत्र मिला है। चार नए कोर्स संचालित करने के लिए पर्याप्त मानकों को पूरा करना एक बड़ी चुनौती साबित होने वाला है।
इस समय महाविद्यालय में पर्याप्त शिक्षक हैं। 14 विभाग हैं। हर विभाग में प्रोफेसर, रीडर अथवा एसोसिएट प्रोफेसर व असिस्टेंट प्रोफेसरों की संख्या 42 है। आगामी दिनों में एनसीआईएसएम की टीम जब महाविद्यालय आएगी, तब वह निरीक्षण के बाद सीटों का निर्धारण करेगी।
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बता दें कि पूर्व प्राचार्य डीके मौर्य के समय में भी परास्नातक कोर्स संचालित करने के लिए शासन स्तर पर प्रयास चल रहा था। इस बार शिक्षकों को यह कामयाबी मिली है। अब तक स्नातक स्तर पर करीब 66 सीटों के साथ बीएएमएस का कोर्स संचालित किया जा रहा है। वहीं, ओपीडी में भी प्रतिदिन चार सौ मरीज आ रहे हैं।
जर्जर इमारत बड़ी चुनौती
एसआरएम राजकीय आयुर्वेदिक मेडिकल कॉलेज की इमारत व छात्रावास का भवन जर्जर हो चुका है। इसके चलते ही बीते वर्ष छात्रावास को एनसीआईएसएम के मानकों में खरा न उतरने के कारण मानकों से बाहर कर दिया गया। अब मात्र महाविद्यालय की ही इमारत संचालित है। ऐसे में चार नए कोर्स संचालित करने के लिए पर्याप्त प्रयोगशालाएं व कक्षाएं लाना चुनौती होगी। प्राचार्य प्रीति शर्मा का कहना है कि लंबे समय से कॉलेज की इमारत बनवाने के लिए जमीन लेने का प्रयास किया गया। जिला प्रशासन के साथ ही राजनीतिक हस्तियों से भी संपर्क साधा गया, लेकिन बात नहीं बनी है। फिलहाल मरम्मत कराने की कोशिश की जा रही है। उम्मीद है एनसीआईएसएम के निरीक्षण से पहले सभी तरह के मानक पूरे कर लेंगे।
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प्राचार्य प्रीति शर्मा के अनुसार, चार परास्नातक पाठ्यक्रमों में कौमारभ्रत्य, रसशास्त्र, शरीर संरचना में एमएस व शल्य चिकित्सा में एमडी का कोर्स शुरू होगा। शासन स्तर से शुक्रवार को कॉलेज को अनापत्ति पत्र मिला है। चार नए कोर्स संचालित करने के लिए पर्याप्त मानकों को पूरा करना एक बड़ी चुनौती साबित होने वाला है।
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इस समय महाविद्यालय में पर्याप्त शिक्षक हैं। 14 विभाग हैं। हर विभाग में प्रोफेसर, रीडर अथवा एसोसिएट प्रोफेसर व असिस्टेंट प्रोफेसरों की संख्या 42 है। आगामी दिनों में एनसीआईएसएम की टीम जब महाविद्यालय आएगी, तब वह निरीक्षण के बाद सीटों का निर्धारण करेगी।
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बता दें कि पूर्व प्राचार्य डीके मौर्य के समय में भी परास्नातक कोर्स संचालित करने के लिए शासन स्तर पर प्रयास चल रहा था। इस बार शिक्षकों को यह कामयाबी मिली है। अब तक स्नातक स्तर पर करीब 66 सीटों के साथ बीएएमएस का कोर्स संचालित किया जा रहा है। वहीं, ओपीडी में भी प्रतिदिन चार सौ मरीज आ रहे हैं।
जर्जर इमारत बड़ी चुनौती
एसआरएम राजकीय आयुर्वेदिक मेडिकल कॉलेज की इमारत व छात्रावास का भवन जर्जर हो चुका है। इसके चलते ही बीते वर्ष छात्रावास को एनसीआईएसएम के मानकों में खरा न उतरने के कारण मानकों से बाहर कर दिया गया। अब मात्र महाविद्यालय की ही इमारत संचालित है। ऐसे में चार नए कोर्स संचालित करने के लिए पर्याप्त प्रयोगशालाएं व कक्षाएं लाना चुनौती होगी। प्राचार्य प्रीति शर्मा का कहना है कि लंबे समय से कॉलेज की इमारत बनवाने के लिए जमीन लेने का प्रयास किया गया। जिला प्रशासन के साथ ही राजनीतिक हस्तियों से भी संपर्क साधा गया, लेकिन बात नहीं बनी है। फिलहाल मरम्मत कराने की कोशिश की जा रही है। उम्मीद है एनसीआईएसएम के निरीक्षण से पहले सभी तरह के मानक पूरे कर लेंगे।