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Bareilly News: आसान नहीं वोटर लिस्ट से थोक में नाम कटवाना, होगा सत्यापन

Fri, 23 Oct 2026 06:07 AM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Fri, 23 Oct 2026 06:07 AM IST
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Getting names removed from the voter list in bulk is not easy; verification will be required.
बरेली। मतदाता सूची से पात्र लोगों के नाम गलत तरीके से हटवाने की आशंका और थोक में आपत्तियां दाखिल करने की शिकायतों पर चुनाव आयोग ने फॉर्म-7 जमा करने की सीमा तय कर दी है। नाम काटने से पूर्व संबंधित मतदाता की सुनवाई और झूठी शिकायत पर कार्रवाई होगी।
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भारत निर्वाचन आयोग से जारी आदेश के तहत जिला निर्वाचन अधिकारी अविनाश सिंह ने सभी निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारी (ईआरओ) और सहायक निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारियों (एईआरओ) को निर्देश जारी किए हैं। इसके अनुसार, बिना पुख्ता प्रमाण के आपत्तियां दाखिल होने से संबंधित मतदाताओं को परेशानी होती है और कर्मचारियों पर काम का बोझ बढ़ता है।
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नए निर्देश की वजह नाम कटने की प्रक्रिया में पारदर्शिता और पात्र मतदाताओं के मताधिकार की सुरक्षा करना है। अब दावा-आपत्ति की अवधि में व्यक्तिगत मतदाता सिर्फ 10 फॉर्म-7 जमा कर सकेगा। बताया कि मतदाता सूची के पुनरीक्षण के दौरान यह सीमा एक महीने में पांच आवेदन होगी। ये नियम ऑनलाइन और ऑफलाइन, दोनों माध्यमों से जमा किए जाने वाले आवेदनों पर लागू होंगे।
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पांच से अधिक आपत्तियों पर होगा सत्यापन
निर्देशों के मुताबिक, कोई व्यक्ति पांच से अधिक मामलों में आपत्ति दर्ज कराता है तो ईआरओ व्यक्तिगत सत्यापन करेंगे। फॉर्म-7 पर आपत्तिकर्ता के हस्ताक्षर जरूरी हैं। हस्ताक्षर की मुहर मान्य नहीं होगी। अधूरी जानकारी से आवेदन पर कार्रवाई होगी। नाम हटाने की आपत्ति कर रहे व्यक्ति और जिस मतदाता का नाम हटाने की मांग होगी, दोनों के पक्ष सुनेंगे। वहीं, राजनीतिक दल के बूथ लेवल एजेंट (बीएलए) ड्राफ्ट मतदाता सूची के प्रकाशन से पहले बीएलओ को प्रतिदिन अधिकतम 50 और प्रकाशन के बाद अधिकतम 10 फॉर्म जमा कर सकते हैं।


अगर जांच में आवेदक जानबूझकर झूठा बयान या घोषणा करेगा तो उसके खिलाफ लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 की धारा 31 के तहत कार्रवाई होगी। दोष सिद्ध होने पर एक साल तक की कैद, जुर्माना या दोनों का प्रावधान है। जिला निर्वाचन अधिकारी ने कहा कि आयोग से जारी दिशानिर्देश का अनुपालन कराया जाएगा। शिथिलता मिलने पर कार्रवाई की जाएगी।
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