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Bareilly News: जीनोमिक चयन, जीन एडिटिंग से जलवायु अनुरूप कुक्कुट प्रजाति का होगा विकास

Fri, 30 Aug 2024 07:22 AM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Fri, 30 Aug 2024 07:22 AM IST
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Genomic selection and gene editing will lead to development of climate-friendly poultry species.
- गिनी फाउल, बटेर, टर्की और देसी मुर्गियों की उत्पादक क्षमता बढ़ाने पर हुआ मंथन
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बरेली। केंद्रीय पक्षी अनुसंधान संस्थान में विकसित मुर्गे, मुर्गियों की उन्नत प्रजाति को देश और विदेशों तक पहुंचाने के लिए उनमें जलवायु अनुरूप क्षमता का विकास करना जरूरी है। जिसे जीनोमिक चयन, जीन एडिटिंग के जरिए बढ़ाया जाएगा, ताकि पोल्ट्री फार्मर की आय बढ़े।
यह विचार केंद्रीय पक्षी अनुसंधान संस्थान इज्जतनगर में आयोजित वर्चुअल बैठक के दौरान देश के प्रमुख अनुसंधान वैज्ञानिक, विशेषज्ञ और उद्यमियों ने साझा किए। सीएआरआई प्रधान वैज्ञानिक डॉ. सिम्मी तोमर ने कहा कि आयोजन का उद्देश्य कुक्कुट प्रजातियों की उत्पादकता क्षमता को बढ़ाकर देश और दुनिया तक पहुंचाना रहा। कार्यवाहक निदेशक डॉ. संदीप सरन ने कुक्कुट प्रजातियों की प्रजनन रणनीति पर जोर दिया।
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कार्यक्रम की अध्यक्षता पशु उत्पादन एवं प्रजनन के सहायक महानिदेशक डॉ. ज्ञानेंद्र कुमार गौड़ ने, सह-अध्यक्षता हैदराबाद कुक्कुट अनुसंधान निदेशालय के निदेशक डॉ. आरएन चटर्जी ने की। पशु आनुवांशिकी एवं प्रजनन लुवास के डॉ. बीएल पंडेर ने बटेर की वृद्धि पर जोर दिया।
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कुक्कुट में वसा कम, प्रोटीन की प्रचुरता
वैज्ञानिकों के मुताबिक बाजार में अब कुक्कुट उत्पादों की मांग बढ़ रही है। क्योंकि इनमें वसा की मात्रा कम होती है और प्रोटीन की प्रचुरता है। औषधीय गुण भी होते हैं। तमिलनाडु पशु एवं पशु चिकित्सा विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति डॉ. आर प्रभाकरन ने कुक्कुट प्रजातियों की प्रजनन, आनुवांशिक द्वारा उनके उत्पादन क्षमता को बढ़ाने पर जानकारी साझा की।


इन्होंने भी प्रस्तुत किए व्याख्यान
भुवनेश्वर डीपीआर के विभागाध्यक्ष डॉ. एसके भांजा, सीएआरआई के पक्षी अनुवांशिकी व प्रजनन विभाग प्रमुख डॉ. राज नारायन, हैदराबाद इंडब्रो रिसर्च प्रबंध निदेशक डॉ. टी कोटीआ, तमिलनाडु पशु एवं पशु चिकित्सा विश्वविद्यालय के कुक्कुट विज्ञान के विभाग प्रमुख डॉ. आर रिचर्ड चर्चिल, पूर्व उप कुलपति तनुवास चेन्नई के डॉ. आर प्रभाकरन ने भी अलग-अलग विषयों पर व्याख्यान प्रस्तुत किए। इस दौरान डॉ. राजकुमार, डॉ. जयदीप रोकडे, डॉ. गौतम कोलुरी व अन्य वैज्ञानिक मौजूद रहे। अमर उजाला ब्यूरो
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