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लहसुन बना सकता है सौंफ को निरोगी
ब्यूरो/अमर उजाला, बरेली
Updated Thu, 22 Dec 2016 01:59 AM IST
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Garlic may make Fennel is healing
- फोटो : बरेली, अमर उजाला
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सौंफ की फसल को कीटनाशक दवाइयों से ज्यादा आप लहसुन की कली के रस से बचा सकते हैं। इससे पैदावार में भी पचास फीसदी से ज्यादा इजाफा संभव है। बरेली कॉलेज के बॉटनी विभाग की रिसर्च स्टूडेंट प्रतिष्ठा पांडेय के ‘प्रोफाइलिंग एंड मैनेजमेंट ऑफ फंगल डिसीजीज ऑफ फैनेल इन बरेली डिस्ट्रिक’ नाम के शोध में यह बात साबित हुई है। वह 2009 से इस प्रोेजेक्ट पर कार्य कर रही थीं। दो दिन पूर्व ही उनको एमजेपी रुहेलखंड विश्वविद्यालय ने पीएचडी की उपाधि प्रदान की है।
बॉटनी विभाग के डॉ. आलोक खरे की देखरेख में हुए शोध में उन क्षेत्रों को लिया गया है जहां सौंफ की खेती होती थी। इसमें आलमपुर जाफराबाद, मगझवां, बहेड़ी, भोजीपुरा, बरेली के क्षेत्र को लिया गया। सौंफ की खेती में आठ तरह की बीमारी निकलकर आईं, जिसमें सबसे खतरनाक स्कैम गाल नाम की बीमारी मिली। इसके अलावा पाउडरी मिडयू और अल्टरमेरिया ब्लाइट नाम की बीमारी भी फसल को नुकसान पहुंचाती है। अब इन क्षेत्रों में नाममात्र ही सौंफ की खेती होती है। पहले यहां खूब सौंफ की खेती हुआ करती थी। सौंफ की फसल पर अलग-अलग तरह के प्रयोग किए गए, जिसमें साबित हुआ कि लहसुन की कली के जूस को पानी में मिलाकर अगर छिड़काव करें तो 70 फीसदी से ज्यादा बीमारियों का खात्मा संभव है।
एक हजार पीपीएम प्रति हेक्टेयर के हिसाब से किया प्रयोग
लहसुन की कली का सर निकालकर एक हजार पीपीएम (यानी एक ग्राम लहसुन के जूस को एक एमएल पानी में मिलाने पर एक पीपीएम बनता है) पानी का घोल बनाकर छिड़काव किया गया। पंद्रह पंद्रह दिन के अंतराल पर छिड़काव करने से 70 फीसदी से ज्यादा बीमारियों पर नियंत्रण हो गया। इसके अलावा सौंफ की फसल को धनिया और लहसुन के साथ उगाया गया। लहसुन के साथ जो सौंफ उगाई गई उसमें बीमारी नहीं लगी, जबकि धनिया वाली सौंफ में बीमारी मिली। प्रतिष्ठा पांडेय ने बताया कि शोध सफल रहा है और इसका प्रयोग करके रुहेलखंड क्षेत्र में सौंफ की पैदावार को बढ़ाया जा सकता है।
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बॉटनी विभाग के डॉ. आलोक खरे की देखरेख में हुए शोध में उन क्षेत्रों को लिया गया है जहां सौंफ की खेती होती थी। इसमें आलमपुर जाफराबाद, मगझवां, बहेड़ी, भोजीपुरा, बरेली के क्षेत्र को लिया गया। सौंफ की खेती में आठ तरह की बीमारी निकलकर आईं, जिसमें सबसे खतरनाक स्कैम गाल नाम की बीमारी मिली। इसके अलावा पाउडरी मिडयू और अल्टरमेरिया ब्लाइट नाम की बीमारी भी फसल को नुकसान पहुंचाती है। अब इन क्षेत्रों में नाममात्र ही सौंफ की खेती होती है। पहले यहां खूब सौंफ की खेती हुआ करती थी। सौंफ की फसल पर अलग-अलग तरह के प्रयोग किए गए, जिसमें साबित हुआ कि लहसुन की कली के जूस को पानी में मिलाकर अगर छिड़काव करें तो 70 फीसदी से ज्यादा बीमारियों का खात्मा संभव है।
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एक हजार पीपीएम प्रति हेक्टेयर के हिसाब से किया प्रयोग
लहसुन की कली का सर निकालकर एक हजार पीपीएम (यानी एक ग्राम लहसुन के जूस को एक एमएल पानी में मिलाने पर एक पीपीएम बनता है) पानी का घोल बनाकर छिड़काव किया गया। पंद्रह पंद्रह दिन के अंतराल पर छिड़काव करने से 70 फीसदी से ज्यादा बीमारियों पर नियंत्रण हो गया। इसके अलावा सौंफ की फसल को धनिया और लहसुन के साथ उगाया गया। लहसुन के साथ जो सौंफ उगाई गई उसमें बीमारी नहीं लगी, जबकि धनिया वाली सौंफ में बीमारी मिली। प्रतिष्ठा पांडेय ने बताया कि शोध सफल रहा है और इसका प्रयोग करके रुहेलखंड क्षेत्र में सौंफ की पैदावार को बढ़ाया जा सकता है।
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