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Bareilly News: नहीं उठा कूड़ा, सफाई भी धड़ाम, कार्रवाई की मांग पर अड़े निगम कर्मी
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महापौर बोले- घर का मामला, आपस में बैठ लो - कर्मचारियों ने कहा- एफआईआर व गिरफ्तारी हो
बरेली। स्मार्ट सिटी ऑडिटोरियम में अव्यवस्थाओं को लेकर उपजा विवाद तूल पकड़ गया है। मामले में न तो नगर निगम कर्मी झुकने के लिए तैयार हैं, न ही एबीवीपी के कार्यकर्ता। निगम कर्मियों की हड़ताल की वजह से शनिवार को शहर में न तो सफाई हुई, न ही कूड़े का उठान हुआ। सुबह से ही कर्मियों ने निगम कार्यालय परिसर में अनिश्चितकालीन धरना शुरू कर दिया। कूड़ा गाड़ियां सड़क पर लगा दीं। अपराह्न दो बजे नारेबाजी करते हुए निगम कार्यालय में ही महापौर से मुलाकात की, जो बेनतीजा रही। कर्मचारी एबीवीपी कार्यकर्ताओं के विरुद्ध एफआईआर और गिरफ्तारी की मांग कर रहे हैं।
निगम कर्मियों का कहना है कि शुक्रवार को जिस तरह अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) के कार्यकर्ताओं ने नगर आयुक्त और कर्मियों के साथ अभद्रता और मारपीट की, उससे जाहिर है कि ये लोग गुंडे हैं। उनके विरुद्ध एफआईआर और गिरफ्तारी हो, तभी वह काम पर लौटेंगे। महापौर उमेश गौतम ने इस विवाद को घर का मामला बताया और आपस में बात कर सुलह करने का सुझाव दिया। दूसरी ओर, नगर निगम कर्मचारी संघ के अध्यक्ष मिशन पाल ठाकुर, उप्र स्थानीय निकाय कर्मचारी संघ के महामंत्री राजकुमार, उप्र सफाई मजदूर संघ के जिला महासचिव राजेंद्र समदर्शी ने कहा कि वह महापौर की बात से संतुष्ट नहीं हैं। पंकज बाबू वाल्मीकि ने कहा कि पूरी घटना सीसी कैमरों में रिकॉर्ड है। धरने में भारतीय वाल्मीकि धर्म समाज, शिक्षणेत्तर कर्मचारी संघ के पदाधिकारी भी शामिल रहे।
इस पर महापौर ने आंदोलित कर्मियों से कहा कि यदि आप के पास एबीवीपी कार्यकर्ताओं के वीडियो हैं तो एबीवीपी वालों के पास भी आप लोगों के वीडियो हैं। उनके पास मौजूद वीडियो निगम कर्मियों की कार्यशैली पर सवाल खड़े कर रहे हैं। यह घर का मामला है और आपस में बात कर इसे निस्तारित कर लिया जाए तो बेहतर है। उन्होंने कहा कि वह नगर आयुक्त, डीएम और एबीवीपी कार्यकर्ताओं से बात कर मामले को निस्तारित कराएंगे।
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नगर आयुक्त से भी हड़ताल खत्म करने से इन्कार
नगर आयुक्त संजीव कुमार मौर्य भी शाम को कार्यालय आए और कर्मियों को बुलाकर हड़ताल खत्म करने के लिए कहा। शहर की 13-14 लाख आबादी के प्रभावित होने का हवाला भी दिया, लेकिन कर्मियों ने हड़ताल समाप्त करने से इन्कार किया। कहा, कार्यालय में आकर एबीवीपी के लोगों ने अभद्रता की है, इसलिए कार्रवाई जरूरी है। संवाद
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मुख्य मार्गों से लेकर गली-माेहल्लों तक बिखरा कूड़ा
निगम कर्मियों के साथ ही सफाई कर्मचारियों की हड़ताल का पहले दिन ही व्यापक असर दिखा। शहर के किसी हिस्से में झाड़ू नहीं लगी। मुख्य मार्गों से लेकर गली-मोहल्लों की सड़कों पर कूड़ा बिखरा रहा। डोर-टू-डोर कूड़ा कलेक्शन भी ठप रहा। हड़ताल में निगम के सभी वाहनों के चालक भी शामिल रहे। इसलिए सभी 800 वाहनों के पहिये थमे रहे। रोज शहर से करीब 3000 टन कूड़ा निकलता है।
हमारी लड़ाई निगम कर्मियों से नहीं, समस्याओं से है : अवनि
एबीपीपी की विभाग संगठन मंत्री अवनि यादव का कहना है कि उनकी लड़ाई निगम कर्मियों से नहीं, समस्याओं से है। नगर आयुक्त ने समस्याओं को न तो सुना, न ही सुलझाया। उनके कक्ष में आसपास कुर्सियों पर बैठे लोग ही उल्टी बहस करने लगे थे। इसके बाद हम चैंबर से बाहर आकर धरने पर बैठ गए थे। उसी बीच विश्व हिंदू परिषद के विभाग संगठन मंत्री देवेंद्र अपनी समस्या लेकर आए तो उनके साथ भी नगर निगम कर्मियों ने अभद्रता की। नगर आयुक्त की गाड़ी पर जो बैठा था, वह एबीवीपी का कार्यकर्ता नहीं है। हमारी मांग थी कि ऑडिटोरियम बुक कराने के लिए जो 69 हजार रुपये दिए थे, उसकी रसीद हमें मिले और बरेली कॉलेज बरेली के आसपास लाइटें लग जाएं, ताकि वहां अंधेरा न रहे। नगर आयुक्त ने इन समस्याओं को सुना ही नहीं। हम अपनी समस्या का समाधान चाहते हैं।
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नगर निगम मामले में किसी पक्ष से कोई तहरीर नहीं आई है और न ही अपर आयुक्त का कोई पत्र मिला है। - अमित पांडेय, प्रभारी निरीक्षक, कोतवाली
रविवार से सफाई कर्मी काम पर लौट आएं, इसके लिए बातचीत जारी है। शुक्रवार को जो हुआ, वह आपत्तिजनक तो है, लेकिन शहर में नागरिक सुविधाएं न प्रभावित हों, हमें इसका भी ध्यान रखना है। जिन्होंने शु्क्रवार को कार्यालय में आकर हंगामा किया है, उनके विरुद्ध विधिक कार्रवाई होगी। - संजीव कुमार मौर्य, नगर आयुक्त
नगर आयुक्त, कर्मियों, डीएम और छात्र-छात्राओं सभी से कह दिया है कि शहर की प्रगति के लिए सब लोग मिलकर प्रयास करें। आपस का मनमुटाव खत्म करना होगा। शहर में दो दिन से कूड़ा नहीं उठा है, स्थित खराब है। हड़ताल का कोई औचित्य नहीं है। वैसे भी प्रदेश में हड़ताल के लिए प्रतिबंध है। - उमेश गौतम, महापौर
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बरेली। स्मार्ट सिटी ऑडिटोरियम में अव्यवस्थाओं को लेकर उपजा विवाद तूल पकड़ गया है। मामले में न तो नगर निगम कर्मी झुकने के लिए तैयार हैं, न ही एबीवीपी के कार्यकर्ता। निगम कर्मियों की हड़ताल की वजह से शनिवार को शहर में न तो सफाई हुई, न ही कूड़े का उठान हुआ। सुबह से ही कर्मियों ने निगम कार्यालय परिसर में अनिश्चितकालीन धरना शुरू कर दिया। कूड़ा गाड़ियां सड़क पर लगा दीं। अपराह्न दो बजे नारेबाजी करते हुए निगम कार्यालय में ही महापौर से मुलाकात की, जो बेनतीजा रही। कर्मचारी एबीवीपी कार्यकर्ताओं के विरुद्ध एफआईआर और गिरफ्तारी की मांग कर रहे हैं।
निगम कर्मियों का कहना है कि शुक्रवार को जिस तरह अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) के कार्यकर्ताओं ने नगर आयुक्त और कर्मियों के साथ अभद्रता और मारपीट की, उससे जाहिर है कि ये लोग गुंडे हैं। उनके विरुद्ध एफआईआर और गिरफ्तारी हो, तभी वह काम पर लौटेंगे। महापौर उमेश गौतम ने इस विवाद को घर का मामला बताया और आपस में बात कर सुलह करने का सुझाव दिया। दूसरी ओर, नगर निगम कर्मचारी संघ के अध्यक्ष मिशन पाल ठाकुर, उप्र स्थानीय निकाय कर्मचारी संघ के महामंत्री राजकुमार, उप्र सफाई मजदूर संघ के जिला महासचिव राजेंद्र समदर्शी ने कहा कि वह महापौर की बात से संतुष्ट नहीं हैं। पंकज बाबू वाल्मीकि ने कहा कि पूरी घटना सीसी कैमरों में रिकॉर्ड है। धरने में भारतीय वाल्मीकि धर्म समाज, शिक्षणेत्तर कर्मचारी संघ के पदाधिकारी भी शामिल रहे।
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इस पर महापौर ने आंदोलित कर्मियों से कहा कि यदि आप के पास एबीवीपी कार्यकर्ताओं के वीडियो हैं तो एबीवीपी वालों के पास भी आप लोगों के वीडियो हैं। उनके पास मौजूद वीडियो निगम कर्मियों की कार्यशैली पर सवाल खड़े कर रहे हैं। यह घर का मामला है और आपस में बात कर इसे निस्तारित कर लिया जाए तो बेहतर है। उन्होंने कहा कि वह नगर आयुक्त, डीएम और एबीवीपी कार्यकर्ताओं से बात कर मामले को निस्तारित कराएंगे।
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नगर आयुक्त से भी हड़ताल खत्म करने से इन्कार
नगर आयुक्त संजीव कुमार मौर्य भी शाम को कार्यालय आए और कर्मियों को बुलाकर हड़ताल खत्म करने के लिए कहा। शहर की 13-14 लाख आबादी के प्रभावित होने का हवाला भी दिया, लेकिन कर्मियों ने हड़ताल समाप्त करने से इन्कार किया। कहा, कार्यालय में आकर एबीवीपी के लोगों ने अभद्रता की है, इसलिए कार्रवाई जरूरी है। संवाद
मुख्य मार्गों से लेकर गली-माेहल्लों तक बिखरा कूड़ा
निगम कर्मियों के साथ ही सफाई कर्मचारियों की हड़ताल का पहले दिन ही व्यापक असर दिखा। शहर के किसी हिस्से में झाड़ू नहीं लगी। मुख्य मार्गों से लेकर गली-मोहल्लों की सड़कों पर कूड़ा बिखरा रहा। डोर-टू-डोर कूड़ा कलेक्शन भी ठप रहा। हड़ताल में निगम के सभी वाहनों के चालक भी शामिल रहे। इसलिए सभी 800 वाहनों के पहिये थमे रहे। रोज शहर से करीब 3000 टन कूड़ा निकलता है।
हमारी लड़ाई निगम कर्मियों से नहीं, समस्याओं से है : अवनि
एबीपीपी की विभाग संगठन मंत्री अवनि यादव का कहना है कि उनकी लड़ाई निगम कर्मियों से नहीं, समस्याओं से है। नगर आयुक्त ने समस्याओं को न तो सुना, न ही सुलझाया। उनके कक्ष में आसपास कुर्सियों पर बैठे लोग ही उल्टी बहस करने लगे थे। इसके बाद हम चैंबर से बाहर आकर धरने पर बैठ गए थे। उसी बीच विश्व हिंदू परिषद के विभाग संगठन मंत्री देवेंद्र अपनी समस्या लेकर आए तो उनके साथ भी नगर निगम कर्मियों ने अभद्रता की। नगर आयुक्त की गाड़ी पर जो बैठा था, वह एबीवीपी का कार्यकर्ता नहीं है। हमारी मांग थी कि ऑडिटोरियम बुक कराने के लिए जो 69 हजार रुपये दिए थे, उसकी रसीद हमें मिले और बरेली कॉलेज बरेली के आसपास लाइटें लग जाएं, ताकि वहां अंधेरा न रहे। नगर आयुक्त ने इन समस्याओं को सुना ही नहीं। हम अपनी समस्या का समाधान चाहते हैं।
नगर निगम मामले में किसी पक्ष से कोई तहरीर नहीं आई है और न ही अपर आयुक्त का कोई पत्र मिला है। - अमित पांडेय, प्रभारी निरीक्षक, कोतवाली
रविवार से सफाई कर्मी काम पर लौट आएं, इसके लिए बातचीत जारी है। शुक्रवार को जो हुआ, वह आपत्तिजनक तो है, लेकिन शहर में नागरिक सुविधाएं न प्रभावित हों, हमें इसका भी ध्यान रखना है। जिन्होंने शु्क्रवार को कार्यालय में आकर हंगामा किया है, उनके विरुद्ध विधिक कार्रवाई होगी। - संजीव कुमार मौर्य, नगर आयुक्त
नगर आयुक्त, कर्मियों, डीएम और छात्र-छात्राओं सभी से कह दिया है कि शहर की प्रगति के लिए सब लोग मिलकर प्रयास करें। आपस का मनमुटाव खत्म करना होगा। शहर में दो दिन से कूड़ा नहीं उठा है, स्थित खराब है। हड़ताल का कोई औचित्य नहीं है। वैसे भी प्रदेश में हड़ताल के लिए प्रतिबंध है। - उमेश गौतम, महापौर