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समितियों के आयोजन स्थगित घरों में ही विराजेंगे गणपति
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गणेश प्रतिमा की खरीदारी करतीं महिलाएं।
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, बरेली
बरेली। कोरोना महामारी के चलते गणेश महोत्सव आयोजन समितियों ने इस बार आयोजन स्थगित कर दिए हैं। सभी लोग घर पर ही गणपति को विराजमान करेंगे। प्रशासन की अनुमति मिलने पर मूर्तियां रामंगगा नदी में विसर्जित की जा सकेंगी।
शहर में कोरोना संक्रमण तेजी से बढ़ रहा है। गणेश महोत्सव में गणपति भक्तों की काफी भीड़ होती है। श्री गणेश महोत्सव आयोजन समिति के अध्यक्ष अभय भटनागर और सचिव अमित सक्सेना ने बताया कि प्रशासन से हुई वार्ता के बाद कोई भी आयोजन नहीं करने का निर्णय लिया गया है। अबकी बार घर पर ही गणपति को विराजमान करके पूजा अर्चना की जाएगी। जिला प्रशासन की अनुमति मिलने पर मूर्तियां रामगंगा नदी में विसर्जित की जा सकेंगी।
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मराठा बुलियान एसोसिएशन और श्री गणेश महोत्सव समिति भी हर साल गणेशोत्सव धूमधाम से मनाती आई है। हालांकि उनकी ओर से इस बार कोई कार्यक्रम आयोजित नहीं किया जाएगा। अध्यक्ष अनिल पाटिल ने बताया कि हर साल महाराष्ट्र के सागली जिले से प्रतिमाएं मंगाई जाती थीं। महाराष्ट्र से ही बैंड भी आता था, लेकिन इस बार ऐसी कोई व्यवस्था नहीं की गई है। लोग गणेश जी का पूजन घरों में ही सीमित संख्या में करेंगे। कोरोना संकट टलने के बाद अगले साथ गणेश महोत्सव धूमधाम से मनाया जाएगा। उन्होंने कहा कि 25 साल पहले शहर में रहने वाले मराठा परिवारों ने यह उत्सव शुरू किया था, धीरे-धीरे कार्यक्रम में स्थानीय लोग भी जुड़ते चले गए। अब गणेश महोत्सव ने भव्य आयोजन का स्वरूप ले लिया है। आयोजन समितियों के पंडाल न लगने से इस साल गणेश जी की बड़ी मूर्तियां भी नहीं बनाई गई हैं।
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शहर में कोरोना संक्रमण तेजी से बढ़ रहा है। गणेश महोत्सव में गणपति भक्तों की काफी भीड़ होती है। श्री गणेश महोत्सव आयोजन समिति के अध्यक्ष अभय भटनागर और सचिव अमित सक्सेना ने बताया कि प्रशासन से हुई वार्ता के बाद कोई भी आयोजन नहीं करने का निर्णय लिया गया है। अबकी बार घर पर ही गणपति को विराजमान करके पूजा अर्चना की जाएगी। जिला प्रशासन की अनुमति मिलने पर मूर्तियां रामगंगा नदी में विसर्जित की जा सकेंगी।
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मराठा बुलियान एसोसिएशन और श्री गणेश महोत्सव समिति भी हर साल गणेशोत्सव धूमधाम से मनाती आई है। हालांकि उनकी ओर से इस बार कोई कार्यक्रम आयोजित नहीं किया जाएगा। अध्यक्ष अनिल पाटिल ने बताया कि हर साल महाराष्ट्र के सागली जिले से प्रतिमाएं मंगाई जाती थीं। महाराष्ट्र से ही बैंड भी आता था, लेकिन इस बार ऐसी कोई व्यवस्था नहीं की गई है। लोग गणेश जी का पूजन घरों में ही सीमित संख्या में करेंगे। कोरोना संकट टलने के बाद अगले साथ गणेश महोत्सव धूमधाम से मनाया जाएगा। उन्होंने कहा कि 25 साल पहले शहर में रहने वाले मराठा परिवारों ने यह उत्सव शुरू किया था, धीरे-धीरे कार्यक्रम में स्थानीय लोग भी जुड़ते चले गए। अब गणेश महोत्सव ने भव्य आयोजन का स्वरूप ले लिया है। आयोजन समितियों के पंडाल न लगने से इस साल गणेश जी की बड़ी मूर्तियां भी नहीं बनाई गई हैं।