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Bareilly News: जमुना की कांवड़ में गंगाजल, हुनर से कर रहे शिव का अभिषेक
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बरेली। सावन में श्रद्धालु शिव का जलाभिषेक करते हैं। शहर के कई लोग अपने हुनर को शिव को समर्पित कर रहे हैं। वह अपने हाथों से कांवड़ तैयार करते हैं और इसे ही भोले बाबा की भक्ति मानते हैं। वह पूरी तरह समर्पित होकर कांवड़ बनाते हैं और शिवभक्तों को बेहद वाजिब कीमत पर मुहैया कराते हैं।
मठ की चौकी के पास कांवड़ बनाने वाले कई कारीगर रहते हैं कई दशकाें से यह काम कर रहे हैं। जीवन के छह दशक पार कर चुके जमुना प्रसाद ने बताया कि उन्होंने 25 साल पहले कांवड़ बनाने का काम शुरू किया था। पहले शहर में कांवड़ नहीं बनती थी। सावन में शिव भक्त हरिद्वार जाकर कांवड़ खरीदते थे और वहीं से गंगाजल लाकर भोले बाबा का जलाभिषेक करते थे।
बताया कि उन्होंने एक बार कांवड चढ़ाई और उसके बाद कांवड़ बनाने का काम शुरू कर दिया। सबसे पहले कांवड़ तैयार की और उसे तीन सौ रुपये में बेचा। हालांकि, तब एक-दो कांवड़ ही बिक पाईं, लेकिन जैसे-जैसे लोगों को जानकारी होती गई, बिक्री भी बढ़ती गई। साल दर साल काम बढ़ता गया और वह डाक कांवड़ से लेकर बैकुंठी समेत अन्य कांवड़ बना रहे हैं।
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बताया कि सावन में भले ही कछला से जल लाकर भोलेनाथ को अभिषेक नहीं कर पाते, लेकिन कांवड़ बना कर ही वह बाबा का अभिषेेक कर रहे हैं। सावन के बाद वह भगवान की पोशाक सिलते हैं। मठ की चौकी के पास रहने वाले कारीगर नीरज राजपूत बताते हैं कि अब कांवड़ का चलन तेजी के साथ बढ़ा है। इसी के अनुसार सावन के पहले से ही तैयारी पूरी रखते हैं। सावन में अच्छा कारोबार हो जाता है। इस बार अभी तक 60 कांवड़ बेच चुके हैं। अभी और ऑर्डर आ रहे है, उनका काम चल रहा है। संवाद
ग्राहक कांवड़ को करा रहे कस्टमाइज
कारीगर संदीप बताते हैं दुकान पर आने वाले ग्राहक कांवड़ को अपने अनुसार कस्टमाइज करा रहे हैं। कांवड़ में तमाम रंग-बिरंगे कपड़े, लाइटें आदि लगवा रहे हैं। कुछ वर्षों से इस तरह की कांवड़ का चलन तेजी के साथ बढ़ा है। लोग इसे खूब पसंद कर रहे हैं। इस बार भी कई ऑर्डर आ चुके हैं। इनकी कीमत 1500 रुपये से शुरू होती है।
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मठ की चौकी के पास कांवड़ बनाने वाले कई कारीगर रहते हैं कई दशकाें से यह काम कर रहे हैं। जीवन के छह दशक पार कर चुके जमुना प्रसाद ने बताया कि उन्होंने 25 साल पहले कांवड़ बनाने का काम शुरू किया था। पहले शहर में कांवड़ नहीं बनती थी। सावन में शिव भक्त हरिद्वार जाकर कांवड़ खरीदते थे और वहीं से गंगाजल लाकर भोले बाबा का जलाभिषेक करते थे।
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बताया कि उन्होंने एक बार कांवड चढ़ाई और उसके बाद कांवड़ बनाने का काम शुरू कर दिया। सबसे पहले कांवड़ तैयार की और उसे तीन सौ रुपये में बेचा। हालांकि, तब एक-दो कांवड़ ही बिक पाईं, लेकिन जैसे-जैसे लोगों को जानकारी होती गई, बिक्री भी बढ़ती गई। साल दर साल काम बढ़ता गया और वह डाक कांवड़ से लेकर बैकुंठी समेत अन्य कांवड़ बना रहे हैं।
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बताया कि सावन में भले ही कछला से जल लाकर भोलेनाथ को अभिषेक नहीं कर पाते, लेकिन कांवड़ बना कर ही वह बाबा का अभिषेेक कर रहे हैं। सावन के बाद वह भगवान की पोशाक सिलते हैं। मठ की चौकी के पास रहने वाले कारीगर नीरज राजपूत बताते हैं कि अब कांवड़ का चलन तेजी के साथ बढ़ा है। इसी के अनुसार सावन के पहले से ही तैयारी पूरी रखते हैं। सावन में अच्छा कारोबार हो जाता है। इस बार अभी तक 60 कांवड़ बेच चुके हैं। अभी और ऑर्डर आ रहे है, उनका काम चल रहा है। संवाद
ग्राहक कांवड़ को करा रहे कस्टमाइज
कारीगर संदीप बताते हैं दुकान पर आने वाले ग्राहक कांवड़ को अपने अनुसार कस्टमाइज करा रहे हैं। कांवड़ में तमाम रंग-बिरंगे कपड़े, लाइटें आदि लगवा रहे हैं। कुछ वर्षों से इस तरह की कांवड़ का चलन तेजी के साथ बढ़ा है। लोग इसे खूब पसंद कर रहे हैं। इस बार भी कई ऑर्डर आ चुके हैं। इनकी कीमत 1500 रुपये से शुरू होती है।