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ट्रैप में फंसेगी फल मक्खी तो सुरक्षित रहेगी अमरूद की फसल

Sat, 03 Oct 2020 02:01 AM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Sat, 03 Oct 2020 02:01 AM IST
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Fruit fly will be trapped in trap, guava crop will be safe
आईवीआरआई - फोटो : सोशल नेटवर्क

आईवीआरआई के कृषि विज्ञान केंद्र ने खोजा अमरूद उत्पादकों को फल मक्खी से निजात दिलाने का तरीका
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मंडल भर में हर साल बर्बाद होती है हजारों क्विंटल फसल

बरेली। अमरूद की बागवानी करने वालों को हर साल फल मक्खी से बड़े पैमान पर नुकसान पहुंचता है। केंद्रीय पशु चिकित्सा अनुसंधान संस्थान यानी आईवीआरआई में कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिक किसानों यह फार्मूला समझा रहे हैं कि वे इस किस तरह से इस प्रकोप कम या खत्म कर सकते हैं।
कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिक डॉ. रंजीत सिंह के मुताबिक अमरूद का मंडल भर में बड़े पैमाने पर उत्पादन होता है। इसमें काफी फसल को फल मक्खी बर्बाद कर देती है। फल मक्खी घरेलू मक्खी की ही तरह होती है जो पकने की अवस्था पर पहुंच रहे फल के छिलके के नीचे अंडे देती है। इन अंडों से निकलने वाली महीन सुड़ियां गूदा खाकर फल को खराब कर देती हैं। फल मक्खी का ज्यादा प्रकोप होने पर 50 से 60 फीसदी तक फसल खराब हो जाती है। फल मक्खी से बचाव के लिए किसान पकने जा रही फसल पर रासायनिक दवाओं का इस्तेमाल करते हैं जो अमरूद खाने वालों के स्वास्थ्य के लिए घातक होती हैं।
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डॉ. रंजीत के मुताबिक फल मक्खी के नियंत्रण के लिए कृषि विज्ञान केंद्र में विकसित तकनीक बहुत आसान और सस्ती है। एक एकड़ बाग में आठ से 10 ट्रैप लगाए जाते हैं जिनमें मौजूद एक ल्यूर से मादा मक्खी की महक निकलती है। इसी कारण नर मक्खी उसमें आकर फंस जाती हैं। इस तरह स्वत: जैविक नियंत्रण हो जाता है। अगर दो तीन सालों तक इस ट्रैप विधि का प्रयोग किया जाता है तो फल मक्खी की संख्या इतनी कम हो जाती है कि किसान को बिना ट्रैप लगाए फायदा हो जाता है।
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अमरूद की बागवानी करने वालों को प्रशिक्षण

कृषि विज्ञान केंद्र अमरूद की बागवानी करने वाले किसानों को ट्रेनिंग देने के साथ स्थानीय स्तर पर उन्हें फल मक्खी के ट्रैप उपलब्ध कराने की व्यवस्था भी कर रहा है। किसानों को सलाह दी है कि फल मक्खी के प्रबंधन के लिए खेत में खरपतवारों का नियंत्रण करते रहें। फलों को एक फुट गहरे गड्ढे में दबा दें। खेत में लगाए गए ट्रैप का ल्यूर भी हर 20 दिन बाद बदल दें।

फल-सब्जी रोगमुक्त रखने के लिए गाइड लाइन

राष्ट्रीय पादप स्वास्थ्य प्रबंधन संस्थान हैदराबाद और राष्ट्रीय जैविक प्रबंधन संस्थान दिल्ली ने फलों, सब्जियों में जैविक कीट बीमारी नियंत्रण को पूर्ण रूप से अपनाने की गाइड लाइन तैयार की है ताकि खाद्य पदार्थ, फल, सब्जियां जहरीले रसायनों से बच सकें।

बरेली-बदायूं और पीलीभीत में होता

है अमरूद का सर्वाधिक उत्पादन

बरेली के शीशगढ़, फतेहगंज, सीबीगंज, गोविंदापुर, फरीदपुर, भोजीपुरा और बदायूं के अलापुर, ककराला, उझानी, पीलीभीत के अमरिया, माधोटांडा क्षेत्र में बड़े पैमाने पर अमरूद की पैदावार की जाती है। ककराला का अमरूद देश भर में मशहूर है.
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