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Bareilly News: जेट उड़ाने से लेकर ऑपरेशन सिंदूर की अगुवाई तक कर रहीं महिलाएं

Sun, 28 Sep 2025 09:58 AM IST
बरेली ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, बरेली
संवाद न्यूज एजेंसी, बरेली Updated Sun, 28 Sep 2025 09:58 AM IST
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From flying jets to leading Operation Sindoor, women are leading the charge.
बरेली। रोडवेज की महिला परिचालकों ने कहा कि भले समाज में पुरुष की प्रधानता हो, लेकिन जब तक महिलाएं सशक्त नहीं होगी तब तक कोई समाज तरक्की नहीं कर सकता। शनिवार को अमर उजाला कार्यालय में आयोजित संवाद में महिला परिचालकों ने अपनी नौकरी से जुड़े संघर्ष और अनुभवों को साझा किया। उन्होंने कहा कि जब महिलाएं फाइटर जेट उड़ा सकती हैं, ऑपरेशन सिंदूर की अगुवाई कर सकती हैं तो रोडवेज बसों में परिचालक क्यों नहीं हो सकतीं।
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पहली बार 2018 में की गई महिला परिचालकों की भर्ती में नियुक्त पाने वाली आयुषी मिश्रा ने बताया कि कुछ दिन समस्या रही। रोड पर जब वह यात्रियों के टिकट बनाती थीं तो उनको हैरत से देखा जाता था। कुछ समय तक नौकरी और परिवार के बीच सामंजस्य बनाने में समस्या हुई, लेकिन धीरे-धीरे सब सामान्य हो गया। करुणा शर्मा ने कहा कि काम लोगों के बीच ही करना है। कुछ समस्याएं तो हर नौकरी में होती हैं। बस आत्मविश्वास के साथ मुश्किलों का डटकर मुकाबला करने की जरूरत होती है। माहौल महिलाओं के मुफीद है। माधुरी शर्मा ने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर ने महिलाओं को प्रेरणा दी है। निशू कश्यप ने कहा कि कुछ परिचालकों की बसें पुरानी हैं। उनको नई बसें मिलनी चाहिए।
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ऊषा देवी ने कहा कि संविदा परिचालकों के किलोमीटर नीयत होते हैं। बेहतर होगा कि सरकार अच्छा काम करने वाली संविदा महिला परिचालकों को उनका रिकॉर्ड देखते हुए नियमित करने पर विचार करें। स्वाति चौहान ने बताया बरेली से एटा के लिए सुबह चार बजे निकलती हैं। रोजाना 289 किलोमीटर चलती हैं। अधिकारियों के साथ-साथ परिवार का पूरा सपोर्ट मिलता है। स्टेशन अधीक्षक रागिनी सक्सेना ने कहा कि देश भले पुरुष प्रधान हो, लेकिन राज महिलाओं का ही होता है। अनीता राना, रुचि शर्मा, माधुरी शर्मा, लक्ष्मी, संजना, प्रेमलता, पूनम सक्सेना ने भी विचार साझा किए।
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जिम्मेदारों को भी दिया संदेश
महिला परिचालकों ने रोडवेज के जिम्मेदारों को भी संदेश दिया। उन्होंने कहा कि हर रूट पर डग्गामारी होती है। सेटेलाइट, पुराना बस अड्डा, झुमका तिराहा, चौपुला के पास तमाम डग्गामार वाहन सवारियां बैठाते रहते हैं। अगर डग्गामारी बंद हो जाती है तो इससे रोडवेज की आय में सुधार होगा और बसों में सवारियां बैठाने को लेकर उनकी जद्दोजहद भी कम होगी। वह यात्रियों को आवाज लगाती रहती हैं और कम किराये में डग्गामार सवारियां बैठाकर ले जाते हैं। लोगों को भी समझना होगा कि रोडवेज में यात्रा भरोसेमंद और सुरक्षित है।
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