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Bareilly News: फर्जीवाड़ा...जिला पंचायत की फर्म का अनुभव प्रमाणपत्र लगाकर लिया लाखों का ठेका
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बरेली। जिला पंचायत की एक फर्म का अनुभव प्रमाणपत्र लगाकर दूसरी फर्म ने नगर निगम से लाखों का ठेका ले लिया। मुख्यमंत्री पोर्टल पर शिकायत के बाद जिला पंचायत की ओर से नगर निगम प्रशासन को भेजी गई रिपोर्ट में इसका खुलासा हुआ है। अब नगर निगम के निर्माण विभाग के जेई से लेकर टेंडर प्रपत्रों की जांच करने वाली कमेटी के सदस्य तक जांच के घेरे में आ गए हैं।
मुख्यमंत्री पोर्टल पर की गई शिकायत में कहा गया है कि नेचरस इंटरप्राइजेज फर्म ने फर्जी दस्तावेजों के आधार पर नगर निगम में नाली, सीसी सड़क निर्माण के ठेके लिए हैं। इसके लिए फर्म ने जिला पंचायत के तीन कार्यों का अनुभव प्रमाणपत्र लगाया है, जो कि फर्जी हैं। शिकायत पर नगर निगम की ओर से अनुभव प्रमाणपत्र की जांच के लिए जिला पंचायत के अपर मुख्य अधिकारी को पत्र भेजा गया था। वहां से रिपोर्ट आई कि ये फर्म पंजीकृत ही नहीं है। न ही कोई अनुभव प्रमाणपत्र जारी किया गया है। अनुभव के तौर पर फर्म ने जो दस्तावेज लगाए हैं, वह कार्य दूसरी फर्म ने किए हैं।
जांच में फंसेंगे कई चेहरे... शासन को भेजी जाएगी रिपोर्ट
गलत दस्तावेजों पर फर्म को काम मिलने के मामले में कई लोग फंस सकते हैं। निगम के ठेकों में हो रही गड़बड़ियों को रोकने के लिए पूर्व नगर आयुक्त निधि गुप्ता वत्स ने मुख्य अभियंता, एक्सईएन और सहायक लेखाधिकारी की अगुवाई में टेंडर जांच कमेटी बनाई थी। इस जांच कमेटी का काम टेंडर में लगाए गए दस्तावेजों की जांच करना था। इस जांच के बाद भी फर्जी दस्तावेजों पर फर्म को ठेका दिया गया। इसलिए अब मामले की रिपोर्ट शासन को भेजने की तैयारी है। यह भी देखा जाएगा कि फर्म को फर्जी दस्तावेजों के आधार पर और कौन-कौन से काम मिले हैं? संवाद
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यह बड़ी लापरवाही है। इस मामले में टेंडर कमेटी, संबंधित जेई, एई से जवाब-तलब किया जाएगा। टेंडर देने में किसकी भूमिका रही, इसकी भी जांच होगी। मामले की रिपोर्ट शासन को भेजी जाएगी। किसी भी स्तर पर भ्रष्टाचारियों को बख्शा नहीं जाएगा। - उमेश गौतम, महापौर
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मुख्यमंत्री पोर्टल पर की गई शिकायत में कहा गया है कि नेचरस इंटरप्राइजेज फर्म ने फर्जी दस्तावेजों के आधार पर नगर निगम में नाली, सीसी सड़क निर्माण के ठेके लिए हैं। इसके लिए फर्म ने जिला पंचायत के तीन कार्यों का अनुभव प्रमाणपत्र लगाया है, जो कि फर्जी हैं। शिकायत पर नगर निगम की ओर से अनुभव प्रमाणपत्र की जांच के लिए जिला पंचायत के अपर मुख्य अधिकारी को पत्र भेजा गया था। वहां से रिपोर्ट आई कि ये फर्म पंजीकृत ही नहीं है। न ही कोई अनुभव प्रमाणपत्र जारी किया गया है। अनुभव के तौर पर फर्म ने जो दस्तावेज लगाए हैं, वह कार्य दूसरी फर्म ने किए हैं।
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जांच में फंसेंगे कई चेहरे... शासन को भेजी जाएगी रिपोर्ट
गलत दस्तावेजों पर फर्म को काम मिलने के मामले में कई लोग फंस सकते हैं। निगम के ठेकों में हो रही गड़बड़ियों को रोकने के लिए पूर्व नगर आयुक्त निधि गुप्ता वत्स ने मुख्य अभियंता, एक्सईएन और सहायक लेखाधिकारी की अगुवाई में टेंडर जांच कमेटी बनाई थी। इस जांच कमेटी का काम टेंडर में लगाए गए दस्तावेजों की जांच करना था। इस जांच के बाद भी फर्जी दस्तावेजों पर फर्म को ठेका दिया गया। इसलिए अब मामले की रिपोर्ट शासन को भेजने की तैयारी है। यह भी देखा जाएगा कि फर्म को फर्जी दस्तावेजों के आधार पर और कौन-कौन से काम मिले हैं? संवाद
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यह बड़ी लापरवाही है। इस मामले में टेंडर कमेटी, संबंधित जेई, एई से जवाब-तलब किया जाएगा। टेंडर देने में किसकी भूमिका रही, इसकी भी जांच होगी। मामले की रिपोर्ट शासन को भेजी जाएगी। किसी भी स्तर पर भ्रष्टाचारियों को बख्शा नहीं जाएगा। - उमेश गौतम, महापौर