फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Bareilly News ›   fraud

27 में से 25 मृत्यु प्रमाण पत्र फर्जी

Sat, 24 Jan 2015 01:11 AM IST
बरेली
बरेली Updated Sat, 24 Jan 2015 01:11 AM IST
विज्ञापन
fraud
मीरगंज तहसील में सरकारी मशीनरी की मिलीभगत से कई जालसाज सालों से पारिवारिक लाभ योजना में फर्जीवाड़े को अंजाम दे रहे थे। दुनका में पारिवारिक लाभ के लिए एक ही साल में 27 आवेदनों की शक की बिना पर की गई जांच में बड़ा खुलासा हुआ है। एसडीएम के स्थलीय निरीक्षण में 27 आवेदनों में से 25 में फर्जी मृत्यु प्रमाण पत्र लगाने का खुलासा हुआ है। निरीक्षण में ग्राम पंचायत अधिकारी ने 25 मृत्यु प्रमाण पत्रों को स्वयं द्वारा जारी नहीं करना बताया है।
विज्ञापन

जिलाधिकारी संजय कुमार ने पारिवारिक लाभ योजना में वर्ष 2012-13 और वर्ष 2013-14 में स्वीकृत दुनका की 27 और बैरमनगर की 13 लाभार्थियों की पात्रता संदिग्ध मानते हुए एसडीएम मीरगंज को स्थलीय जांच के निर्देश दिए थे। जांच के लिए एसडीएम कुंवर पंकज शुक्रवार को दुनका पहुंचे और कई घंटे रुककर सभी 27 लाभार्थियों को तलब किया। केवल 19 लाभार्थी ही एसडीएम के समक्ष पेश हो हुईं। सात नहीं आईं जबकि एक लाभार्थी बूंदन पत्नी बशीर अहमद की मृत्यु दो साल पहले योजना का लाभ मिलने के बाद हो चुकी है। एसडीएम की पूछताछ में पता चला है कि कई महिलाओं के पति पहले ही मर चुके थे और योजना का लाभ उन्होंने बाद में लिया है। महिलाओं को योजना के तहत सात से दस हजार रुपये मिले हैं। बाकी पैसे दलालों ने खा लिए। महिलाओं ने एसडीएम से बातचीत में तीन दलालों के नाम भी लिए हैं। इसमें एक पूर्व प्रधान, एक कोटा डीलर और बड़े जनप्रतिनिधि का खासमखास है।। प्राथमिक जांच में माया देवी पत्नी रोहताश रस्तोगी और चंपा देवी पत्नी तोताराम के ही पात्र होने की बात कही जा रही है। लाभार्थियों में रामदेई पत्नी होरीलाल, गुरुदासी पत्नी नरायन दास दुनकी की और बाकी सभी दुनका की हैं।
विज्ञापन


दस साल पहले मरे, लाभ अब लिया
बिलकीस के पति रईस अहमद की मृत्यु वास्तव में 20 अप्रैल 2012 को हुई थी लेकिन कागजात में 29 सितंबर 2013 दर्शाई गई है। दूसरी बिलकीस के शौहर का इंतकाल 22 अगस्त 2009 में हो गया था लेकिन योजना के दस्तावेजों में 27 मार्च 2013 दर्शाई गई है। वसीर अहमद की मृत्यु 22 अगस्त 2009 को हुई दिखाई गई 27 मार्च 2013 को। लालाराम की मृत्यु 12 मार्च 2011 को हुई दिखाई गई 12 मार्च 2013 को। राधेश्याम की मृत्यु 20 जून 2010 को हुई लेकिन दिखाई गई 12 दिसंबर 2011 को। इसी तरह कदीर बख्श की मृत्यु एक दिसंबर 2009 को हुई थी लेकिन प्रमाण पत्र 23 मार्च 2013 का है। सुराज अहमद की मृत्यु 29 सितंबर 2008 को हुई, दिखाई गई दो मार्च 2012 को। इसी तरह फकीर मोहम्मद, गप्पू शाह, वशीर अहमद, बिच्चे, महमूद, गंगाराम, रोहताश रस्तोग्री, इसराइल, कबीर अहमद, होरीलाल, भूरे, तोताराम, नियाज अहमद, झम्मनलाल, तोताराम, मोहम्मद करीम, छोटे, रामस्वरूप, सुगराती और नारायन की मौत भी कई वर्ष पहले हो गई और उन्हें योजना के लाभ लेने वाले वित्तीय वर्ष में दिखाया गया।
विज्ञापन
विज्ञापन


दलालों ने पैसे खाए
दुनका की मोबीन के पति इरशाद की मौत 13 जनवरी 2004 को हुई थी। फर्जी मृत्यु प्रमाणपत्र में मृत्यु 15 जनवरी 2013 दर्शाई गई है। बकौल मोबीन, बकैनिया वीरपुर के विष्णु शर्मा नाम के दलाल ने योजना के तहत उसे दस हजार रुपये दिए बाकी पैसे खुद हड़प गया। मीना देवी पत्नी गंगाराम और जुबैदा पत्नी मो. करीम ने एसडीएम के सामने महज सात हजार रुपये मिलने का दावा किया है। बाकी रकम दलाल खा गए। इसी तरह महिलाओं ने केसरी लाल पूर्व प्रधान गिरधरपुर और मुस्तफा बेग दुनका कोटेदार का भी नाम लिया।

जांच में 25 आवेदनों में मृत्यु प्रमाण पत्र फर्जी पाए गए हैं। हालांकि अभी अन्य तथ्यों की भी जांच हो रही है। महिलाओं ने दलालों के नाम भी बताए हैं। दो दिन में जांच पूरी कर सभी आरोपियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया जाएगा।
कुंवर पंकज
एसडीएम मीरगंज


दलालों के रैकेट को सियासी संरक्षण
बहेड़ी तहसील में ढाई महीने में जांच नहीं हो पाई पूरी
अमर उजाला ब्यूरो
बरेली। समाज कल्याण की राष्ट्रीय पारिवारिक लाभ योजना के फर्जीवाड़े में मीरगंज और फरीदपुर में जांच रिपोर्ट दी चुकी है वहीं बहेड़ी के एसडीएम ढाई महीने में जांच पूरी ही नहीं कर पाए। केवल पारिवारिक लाभ योजना ही नहीं बल्कि अल्पसंख्यक कल्याण विभाग की शादी अनुदान योजना की जांच भी लटकी हुई है। माना जा रहा है कि उन पर सियासी दबाव है और इसके चलते जांच लटकी हुई है। वहीं सूत्रों की मानें को बहेड़ी में अर्से से दलालों का राज है और शादी अनुदान योजना सहित कई लाभार्थी योजना में उनका पूरा दखल है। दलालों के इस समूह को सत्ता से जुड़े लोगों को संरक्षण प्राप्त है। इसके चलते अफसर उन पर हाथ डालने से बच रहे हैं। पारिवारिक लाभ योजना के 16 आवेदनों में फर्जी मृत्यु प्रमाण पत्र लगे थे वहीं शादी अनुदान में 44 फर्जी आय प्रमाणपत्र भी यहीं के पकड़े गए। इन फर्जी प्रमाणपत्रों पर तहसील से ही मुहर लगी। लेखपाल और कानूनगो ने फर्जी प्रमाणपत्रों को सही बताते हुए संस्तुति की, जिसके आधार पर पहले तहसीलदार फिर एसडीएम ने उस पर अपने हस्ताक्षर कर दिए थे। इसके बावजूद डीएम की ओर से दी गई जांच में एसडीएम और तहसीलदार की ओर हीलाहवाली हो रही है।


इतने व्यस्त हैं एसडीएम साहब
बहेड़ी तहसील के एसडीएम रामेश्वरनाथ तिवारी की व्यस्तता का आलम यह है कि ढाई महीने में भी उनको पारिवारिक लाभ योजना के 12 और शादी अनुदान के 44 फर्जी प्रमाणपत्रों की जांच के लिए वक्त नहीं मिला। अक्टूबर में उनको जांच मिली लेकिन इस महीने उनसे कई बार जांच के संबंध में बात की तो वह हर बार व्यस्तता का हवाला देकर टालमटोल करते रहे। अब दो दिन से वह 26 जनवरी तक की छुट्टी पर हैं और उनका चार्ज संभाले तहसीलदार एके उपाध्याय भी जांच के सवाल पर टालमटोल करते हुए कहते हैं कि इस बाबत एसडीएम ही बता पाएंगे। एसडीएम रामेश्वर नाथ तिवारी का कहना है कि जांच अभी चल रही है। अन्य कामों में व्यस्त होने की वजह से जांच पूरी नहीं कर पाए हैं। जल्द ही जांच पूरी कर लेंगे।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed