UP News: बरेली में चार डकैतों को उम्रकैद की सजा, 12 साल पहले स्टेशन मास्टर के दफ्तर में डाला था डाका
Bareilly News: दबतरा रेलवे स्टेशन पर 14 अक्तूबर 2012 को हथियारबंद छह बदमाशों ने स्टेशन मास्टर के दफ्तर में धावा बोलकर 57 हजार रुपये लूट लिए थे। इस डकैती के मामले में मंगलवार को कोर्ट ने चार दोषियों को उम्रकैद की सजा सुनाई। एक आरोपी की 2016 में हो गई मौत हो गई थी, छठे आरोपी की पहचान ही नहीं सकी थी।
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दबतरा रेलवे स्टेशन के स्टेशन मास्टर दफ्तर में 12 साल पहले हुई करीब 57 हजार रुपये की डकैती के मामले में फास्ट ट्रैक कोर्ट के अपर सत्र न्यायाधीश प्रथम रवि कुमार दिवाकर ने चार दोषियों को उम्रकैद की सजा सुनाई है। चारों पर 50-50 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया है। वारदात को हथियारबंद छह बदमाशों ने अंजाम दिया था। इनमें से एक की मौत हो चुकी है, जबकि एक की पहचान नहीं हो सकी थी। चारों दोषी बदायूं के रहने वाले हैं और अलग-अलग जिलों से हिस्ट्रीशीटर भी रहे हैं।
दबतरा स्टेशन के तत्कालीन स्टेशन मास्टर खचेड़ू सिंह ने रिपोर्ट दर्ज कराई थी। इसमें बताया था कि 14 अक्तूबर 2012 की सुबह करीब 3:55 बजे ड्यूटी पर थे। इसी दौरान किसी के खटखटाने पर उन्होंने दरवाजा खोला तो तीन बदमाश तमंचा दिखाकर अंदर घुस आए। तीन दरवाजे के पास ही खड़े रहे। अंदर आए एक आते ही उनका गला दबाकर और तमंचा निकालकर उसकी कनपटी पर रख दिया।
वहीं, दूसरे व्यक्ति ने टोपो संजय कुमार को पकड़ लिया और तीसरे ने दरवाजा बंद कर दिया। जान से मारने की धमकी देते हुए कैश सेफ की चाबी मांगने लगे। मना करने पर बाहर खड़े तीन लोगों को बुलाकर कैश सेफ की चाबी ढूंढने लगे। चाबी टिकट ट्यूब का ताला तोड़कर निकाल ली। इस दौरान सेफ खोलकर उसमें रखे 56865 रुपये निकाल लिए और टिकट ट्यूब में रखे 310 रुपये भी निकाल लिए। जब टोपो संजय कुमार ने विरोध किया, तो उनमें से एक ने संजय की नाक व सिर पर तमंचे वट मारकर उसे लहुलूहान कर दिया।
केतली में लगी थी गोली
दूसरे बदमाश ने जान से मारने की नीयत से गोली चलाई, तो संजय ने हाथ मारकर तमंचा साइड में कर दिया और गोली पास में रखी केतली में सुराख करते हुए निकल गई। इसका बुलट जीआरपी ने अपने कब्जे में ले लिया। आरोपी जान से मारने की धमकी देते हुए कंट्रोल रूम का ताला तोड़कर भाग निकले। साथ ही निजी मोबाइल फोन भी ले गए। सभी आरोपियों ने चेहरे को ढक रखा था।
वारदात को अंजाम देते समय एक बदमाश के चेहरे से कपड़ा हट गया। जिसका नाम दीमक ऊर्फ दीमका ऊर्फ नजारिक खां था। पुलिस ने इसी आरोपी के माध्यम से अन्य आरोपियों की पहचान कर ली। पुलिस ने मामले की तहरीर के आधार पर रिपोर्ट दर्ज कर ली। पुलिस ने 27 नवंबर 2013 को विवेचना कर आरोप पत्र न्यायालय में दाखिल किए। वर्ष 2016 में दीमका की मौत हो गई।
पुलिस ने पेश किए 40 साक्ष्य
पुलिस ने सभी आरोपियों की निशानदेही पर साक्ष्यों को बरामद किया गया। न्यायालय के समक्ष सुनवाई के दौरान साक्ष्यों के रूप में कुल 40 साक्ष्य प्रस्तुत किए गए और आठ गवाह पेश किए गए। न्यायालय ने साक्ष्यों का अवलोकन करने, गवाहों को सुनने और पत्रावलियों के अध्ययन करने के बाद चार दोषियों शादाब, आशिक अली, इजहार और निसार अहमद को सजा सुनाई है।
तीन दोषियों का अन्य जनपदों में रहा है आपराधिक इतिहास
डकैती डालने की घटना को अंजाम देने वाले दोषी शादाब, आशिक और निसार का अन्य जनपदों में आपराधिक इतिहास रहा है। तीनों का नाम बरेली, बदायूं और संभल के विभिन्न थानों में हिस्ट्रीशीटर की सूची में नाम दर्ज है।