UP: डिजिटल अरेस्ट करने वाले गिरोह के चार साइबर ठग गिरफ्तार, रिटायर्ड वैज्ञानिक से वसूले थे 1.29 करोड़ रुपये
बरेली में आईवीआरआई के रिटायर्ड वैज्ञानिक को डिजिटल अरेस्ट कर साइबर ठगों ने उनसे 1.29 करोड़ रुपये वसूले थे। पीड़ित ने साइबर थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई थी। साइबर पुलिस ने जांच शुरू की। एसटीएफ लखनऊ की मदद से चार आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया गया।
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बरेली में भारतीय पशु चिकित्सा अनुसंधान संस्थान (आईवीआरआई) के रिटायर्ड वैज्ञानिक को डिजिटल अरेस्ट कर 1.29 करोड़ रुपये दूसरे खातों में ट्रांसफर करने वाले साइबर ठग गिरोह के चार सदस्यों को गिरफ्तार कर लिया गया है। बरेली की साइबर थाना पुलिस ने लखनऊ में चारों आरोपियों की गिरफ्तारी की। इसमें डीजीपी के आदेश से लखनऊ एसटीएफ ने भी टीम की मदद की। गिरफ्तारी के बाद आरोपियों को बरेली लाया गया।
चारों आरोपियों में सुधीर कुमार चौरसिया, श्याम कुमार वर्मा, महेंद्र प्रताप सिंह लखनऊ के रहने वाले हैं जबकि रजनीश द्विवेदी गोंडा का निवासी है। इनसे चार चेकबुक, छह डेबिट कार्ड व छह मोबाइल फोन मिले हैं। महेंद्र नाम के शख्स के खाते में आए 12 लाख रुपये इन चारों ने बैंक जाकर निकाले और फिर क्रिप्टो करेंसी में बदलवाकर विदेश भेज दिए। एसपी क्राइम मनीष कुमार सोनकर ने शनिवार को मामले का खुलासा किया। इसके बाद चारों आरोपियों को कोर्ट में पेश किया गया, वहां से सभी को जेल भेजा गया है।
जानिए डिजिटल अरेस्ट का पूरा मामला
पश्चिमी बंगाल के मूल निवासी वैज्ञानिक कई साल से आईवीआरआई में तैनात थे। संस्थान परिसर में सरकारी आवास में वह परिवार समेत रहते हैं। जनवरी में वह रिटायर हुए हैं। उन्होंने साइबर थाना जाकर इंस्पेक्टर दिनेश कुमार शर्मा को बताया कि 17 जून को उनके मोबाइल नंबर पर व्हाट्सएप कॉल आई। कॉलर ने खुद को बंगलूरू सिटी पुलिस का अधिकारी बताया।
उसने कहा कि उनके आधार कार्ड से सिम निकालकर नौकरी के नाम पर धोखाधड़ी व मानव तस्करी जैसे गंभीर अपराध किए गए हैं। उनके यहां सदाकत खां नाम का शख्स पकड़ा गया है, जिसने उनका नाम लिया है। इससे वैज्ञानिक घबरा गए। जिस नंबर से कॉल आई उसकी व्हाट्सएप डीपी में पुलिस का लोगो लगा था तो वह उसे सच में पुलिस की कॉल मान बैठे।
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कॉल करने वाले ने उनको सीबीआई अधिकारी दया नायक के नाम पर एक मोबाइल नंबर देकर बात करने को कहा। वैज्ञानिक ने उस नंबर पर बात की तो खुद को दया नायक बता रहे कथित अधिकारी ने भी उन्हें डराया धमकाया। कहा कि उनके बैंक खातों में अवैध धन आया है। कितना धन सही और कितना गलत है, इसे चेक करने के लिए उन्हें अपने खाते का सारा धन एक खाते में ट्रांसफर करना होगा, जांच के बाद धन उनके खाते में लौटा दिया जाएगा।
वैज्ञानिक को भरोसे में लेने के लिए ठगों ने उनके ग्रामीण बैंक खाते में एक लाख रुपये लौटा भी दिए। 19 जून को ठगों ने उनके दो और खातों से 10 लाख और नौ लाख रुपये अपने इंडसइंड बैंक के खाते में ट्रांसफर करा लिए। इस पर आरोपियों ने अन्य खातों की रकम भी ट्रांसफर करने के लिए कहा। वैज्ञानिक को भरोसे में लेने के लिए ठगों ने उनके ग्रामीण बैंक खाते में एक लाख रुपये लौटा भी दिए। साइबर ठग इसी तरह रकम ट्रांसफर करात रहे।
संदेह होने पर बंगलूरू पुलिस से किया संपर्क तो खुली पोल
संदेह होने पर वैज्ञानिक ने संबंधित नंबरों को गूगल पर तलाशा, लेकिन कोई जानकारी नहीं मिली। तब उन्होंने बंगलूरू पुलिस का नंबर तलाश कर कॉल की। असली अधिकारी ने उनकी बात सुनी और बताया कि वह साइबर ठगी के शिकार हो गए हैं। तब उन्होंने रिपोर्ट दर्ज कराई थी।