{"_id":"62c5f2f0e7629e655804527d","slug":"four-crore-scam-in-tender-advertisement-bareilly-news-bly4905805137","type":"story","status":"publish","title_hn":"विज्ञापनों के चार करोड़ के टेंडर पर नगर निगम अफसर फिर कटघरे में","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
विज्ञापनों के चार करोड़ के टेंडर पर नगर निगम अफसर फिर कटघरे में
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
बरेली। नगर निगम के अफसर विज्ञापन की टेंडर प्रक्रिया को लेकर फिर कटघरे में है। पार्षदों ने आरोप लगाया है कि टेंडर प्रक्रिया में जिन तीन एजेंसियों ने हिस्सा लिया है, उनमें दो विज्ञापन की हैं ही नहीं। अफसरों ने मनमानी एजेंसी को टेंडर देने के लिए दो फर्जी एजेंसियों को टेंडर प्रक्रिया में शामिल किया। उन्होंने टेंडर प्रक्रिया को रद्द न करने पर दोबारा प्रदेश सरकार से शिकायत करने की चेतावनी दी है।
नगर निगम ने कुछ दिनों पहले विज्ञापन के लिए टेंडर आमंत्रित किए थे। टेंडर प्रक्रिया का शहर की कई विज्ञापन एजेंसियों ने यह कहते हुए विरोध किया था कि अफसरों ने एक व्यक्ति को लाभ देने के लिए नियमों की अवहेलना की है। मुख्यमंत्री कार्यालय तक यह प्रकरण पहुंचने के बाद कमिश्नर को टेंडर प्रक्रिया में गड़बड़ी की जांच का निर्देश दिया गया था। कमिश्नर की जांच का तो कोई नतीजा सार्वजनिक नहीं हुआ लेकिन इस बीच नगर निगम की ओर से एक ही एजेंसी को यह टेंडर जारी कर दिया गया। करीब चार करोड़ का टेंडर जारी होने के बाद विज्ञापन एजेंसियाें और पार्षदों ने फिर विरोध शुरू कर दिया है।
पैसा जमा करने के लिए भी दे दी अवैध मोहलत
पार्षद सलीम पटवारी और मुकेश सिंघल का कहना है कि निविदा शर्तों के मुताबिक उसका आधा शुल्क एक सप्ताह के अंदर जमा किया जाना अनिवार्य होता है लेकिन इस अवधि में यह शुल्क जमा नहीं किया गया। नियमों के मुताबिक इस पर टेंडर स्वत: रद्द हो जाना चाहिए था लेकिन अफसरों ने एजेंसी को अवैध रूप से अतिरिक्त मोहलत दे दी। उन्होंने कहा कि टेंडर प्रक्रिया में दो ऐसी एजेंसियाें को जानबूझकर शामिल किया गया है जिनका विज्ञापन कारोबार से कोई लेना-देना नहीं है। अफसरों ने यह खेल एक एजेंसी को फायदा देने के उद्देश्य से किया है। पूरी टेंडर प्रक्रिया संदिग्ध है लिहाजा उसे रद्द कर नए सिरे से टेंडर आमंत्रित किए जाने चाहिए।
विज्ञापन
टेंडर प्रक्रिया नियमों के तहत ही की गई है। पूरी पारदर्शिता बरती गई है, फिर भी शिकायती पत्र के बाद अभिलेख देख लिए जाएंगे। - अभिषेक आनंद, नगर आयुक्त
विज्ञापन
नगर निगम ने कुछ दिनों पहले विज्ञापन के लिए टेंडर आमंत्रित किए थे। टेंडर प्रक्रिया का शहर की कई विज्ञापन एजेंसियों ने यह कहते हुए विरोध किया था कि अफसरों ने एक व्यक्ति को लाभ देने के लिए नियमों की अवहेलना की है। मुख्यमंत्री कार्यालय तक यह प्रकरण पहुंचने के बाद कमिश्नर को टेंडर प्रक्रिया में गड़बड़ी की जांच का निर्देश दिया गया था। कमिश्नर की जांच का तो कोई नतीजा सार्वजनिक नहीं हुआ लेकिन इस बीच नगर निगम की ओर से एक ही एजेंसी को यह टेंडर जारी कर दिया गया। करीब चार करोड़ का टेंडर जारी होने के बाद विज्ञापन एजेंसियाें और पार्षदों ने फिर विरोध शुरू कर दिया है।
विज्ञापन
पैसा जमा करने के लिए भी दे दी अवैध मोहलत
पार्षद सलीम पटवारी और मुकेश सिंघल का कहना है कि निविदा शर्तों के मुताबिक उसका आधा शुल्क एक सप्ताह के अंदर जमा किया जाना अनिवार्य होता है लेकिन इस अवधि में यह शुल्क जमा नहीं किया गया। नियमों के मुताबिक इस पर टेंडर स्वत: रद्द हो जाना चाहिए था लेकिन अफसरों ने एजेंसी को अवैध रूप से अतिरिक्त मोहलत दे दी। उन्होंने कहा कि टेंडर प्रक्रिया में दो ऐसी एजेंसियाें को जानबूझकर शामिल किया गया है जिनका विज्ञापन कारोबार से कोई लेना-देना नहीं है। अफसरों ने यह खेल एक एजेंसी को फायदा देने के उद्देश्य से किया है। पूरी टेंडर प्रक्रिया संदिग्ध है लिहाजा उसे रद्द कर नए सिरे से टेंडर आमंत्रित किए जाने चाहिए।
विज्ञापन
टेंडर प्रक्रिया नियमों के तहत ही की गई है। पूरी पारदर्शिता बरती गई है, फिर भी शिकायती पत्र के बाद अभिलेख देख लिए जाएंगे। - अभिषेक आनंद, नगर आयुक्त