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Ram Mandir: अयोध्या जाते समय राम के नाम ने बचाई थी जान, अब पूर्व मेयर मंदिर में लगवाएंगे भगवान की मूर्ति

Fri, 19 Jan 2024 03:29 PM IST
मुकेश कुमार अमर उजाला ब्यूरो, बरेली
अमर उजाला ब्यूरो, बरेली Published by: मुकेश कुमार Updated Fri, 19 Jan 2024 03:29 PM IST
सार

बरेली के पूर्व मेयर कुंवर सुभाष पटेल भोजीपुरा से विधायक भी रहे हैं। उस वक्त वह कारसेवा के लिए अपने गनर और ड्राइवर के साथ अयोध्या के लिए निकले थे। शाहजहांपुर में उनकी कार दुर्घटनाग्रस्त हो गई थी। वह सभी लोग बाल-बाल बचे। तभी उन्होंने प्रण लिया था कि जब अयोध्या में राम मंदिर बनेगा, तो वह अपने पैतृक मंदिर में भगवान श्रीराम की मूर्ति लगवाएंगे।  

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Former Mayor of Bareilly Subhash Patel will install the idol of Shri Ram in the temple
पूर्व मेयर सुभाष पटेल, उनका पैतृक मंदिर - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

बरेली के पूर्व मेयर कुंवर सुभाष पटेल और उनके साथी राम मंदिर आंदोलन के अग्रदूत रहे। कारसेवा के लिए अयोध्या जाते समय सुभाष पटेल की कार दुर्घटनाग्रस्त हो गई थी। हादसे के वक्त कार में रामधुन बच रही थी। हादसे में उनकी जान बाल-बाल बची थी। उन्होंने तब पैतृक मंदिर में रामलला की प्रतिमा स्थापित कराने का जो निर्णय लिया था, वह जल्द पूरा होने जा रहा है। उनका कहना है कि राम के नाम ने उनकी जान बचाई थी। 

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जिले के वयोवृद्ध नेता कुंवर सुभाष पटेल और उनके साथियों ने राम मंदिर आंदोलन में क्रांतिकारी गतिविधियां की थीं। पटेल बताते हैं कि जब कल्याण सिंह की सरकार बनी तो भोजीपुरा से वह और नवाबगंज से भगवत सरन विधायक बने थे। मुख्यमंत्री ने राममंदिर आंदोलन को धार देनी शुरू की तो सभी विधायकों को अयोध्या आने का न्योता दिया गया। वह अपने गनर और ड्राइवर के साथ अयोध्या के लिए निकले थे। शाहजहांपुर से पहले ही उनकी कार एक बस से टकरा गई थी। 
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हादसे में वे लोग बाल-बाल बच गए। उन्होंने उसी दिन प्रण लिया था कि जब अयोध्या में राम मंदिर बनेगा तो डोहरा लालपुर रोड के अपने पैतृक मंदिर में भी रामलला की प्रतिमा स्थापित कराएंगे। पटेल बताते हैं कि वह अब मंदिर को नई प्रतिमा के लिहाज से तैयार करा रहे हैं। महीनेभर में वह यहां प्रतिमा स्थापित करा देंगे और स्थानीय लोग वहां रामजी का पूजन कर सकेंगे।

मालगाड़ी में छिपकर जा रहे रामभक्तों पर हुआ था अत्याचार
शहर के मढ़ीनाथ निवासी सतीश यादव उन दिनों युवा थे। वह बजरंग दल के महानगर सह संयोजक और विद्यार्थी परिषद के मंत्री थे। सतीश बताते हैं कि कुंवर सुभाष पटेल का नेकपुर हाथीखाना आवास उन लोगों का गोपनीय केंद्र था। वहां से कारसेवकों को अयोध्या भेजने का इंतजाम किया जा रहा था। योजना के तहत नौ अक्तूबर को 22 युवाओं का दस्ता जंक्शन यार्ड से लखनऊ जाने वाली मालगाड़ी से निकला था। रेल कर्मचारियों से तय हो गया था कि लखनऊ से अयोध्या दूसरी मालगाड़ी में छिपाकर भेज दिया जाएगा पर सूचना लीक होने पर पुलिस ने सभी को मालगाड़ी से गिरफ्तार कर बर्बरता की। बरेली सेंट्रल जेल में 28 दिन रखने के बाद रिहा किया गया।

कारसेवकों पर गोली चली तो जेल में गरमाया माहौल
सतीश यादव ने बताया कि दो नवंबर को जब अयोध्या में कारसेवकों पर गोली चलने की घटना टीवी पर दिखाई गई तो वह लोग सेंट्रल जेल में थे। इससे जेल में माहौल काफी तनावपूर्ण हो गया। बैरकों से जेल के अंदरूनी गेट तक आकर रामभक्तों ने प्रदर्शन और नारेबाजी की। पीएसी अंदर घुसी तो मामला और गरमा गया। तत्कालीन एडीएम सिटी मंजुल जोशी ने जेल में आकर उग्र बंदियों को बमुश्किल शांत कराया था।

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