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गरगईया के पूर्व प्रधान सहित छह के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज
ब्ययूराो, अमर उजाला बरेली।
Updated Fri, 10 Jun 2016 12:48 AM IST
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दमखोदा ब्लाक में मनरेगा से कराए गए कई करोड़ के कामों में परत दर परत घपले का खुलासा हो रहा है। पिछले सप्ताह जांच के दौरान इसी ब्लाक के गरगईयां गांव में मनरेगा के 18.42 लाख रुपये से कागजों में कराए गए निर्माण कार्यों की पोल खुली तो खंड विकास अधिकारी की ओर से देवरनियां थाने में पूर्व प्रधान सहित आठ कर्मचारियों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज करा दी गई है। इसी के आधार पर डीपीआरओ ने 20 गांवों का काम देखने वाले पंचायत सचिव करन सिंह को फिर से निलंबित कर दिया गया है। रोजगार सेवक को हटाने के लिए गांव सभा की खुली बैठक में प्रस्ताव लाया जाएगा। अन्य कर्मचारियों के खिलाफ कारवाई भी शुरू कर दी है।
मंडलीय आडिट टीम ने दमखोदा ब्लाक के गांवों में 1.57 करोड़ रुपये के घपले का खुलासा किया था। जिसे विकास भवन के अधिकारियों ने शुरू में तो गंभीरता से नहीं लिया। अमर उजाला ने आडिट रिपोर्ट को प्रमुखता से छापा तो घपला करने वालों के खिलाफ कार्रवाई करनी पड़ी। गरगईया गांव में जिला ग्राम्य विकास अभिकरण के परियोजना निदेशक की रिपोर्ट में 18.42 लाख रुपये के गबन की पुष्टि हुई। इसके आधार पर खंड विकास अधिकारी ने पूर्व प्रधान निसार अहमद, पंचायत सचिव करन सिंह, लेखाकार मनोज कुमार, तकनीकी सहायक राजेंद्र कुमार, रोजगार सेवक मसकूर, कंप्यूटर आपरेटर आशीष शर्मा तथा एडीओ एसआईबी भरत सिंह के खिलाफ थाना देवरनिया में एफआईआर दर्ज करा दी गई है।
इनमें से तकनीकी सहायक ने एक साल पहले इस्तीफा दे दिया है और वह दूसरे स्थान पर नौकरी कर रहे हैं। एडीओ आईएसबी रिटायर हो गए हैं। अन्य कर्मचारी कार्यरत हैं, उनके खिलाफ कार्रवाई की जा रही है। बीडीओ ने बताया कि रोजगार सेवक को हटाने के लिए गांव की बैठक बुलाई गई है। अन्य के खिलाफ कार्रवाई के लिए डीपीआरओ और डीडीओ को लिखा गया है। इनके खिलाफ भी शुक्रवार या फिर सोमवार तक निलंबन की कार्रवाई की जाएगी।
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ये है आरोप
जांच में खुलासा हुआ है कि 18.42 लाख रुपये निकाल लिए गए। काम नहीं हुआ, फर्जी मस्टररोल भरके मजदूरों के नाम से पैसा निकाल लिया था। मौके पर न तो तालाब का सौंदर्यीकरण हुआ और न चकरोड़ बने। गांव में नाली व खड़ंजा भी कागजों में बना दिखा दिया गया।
13 गांवों में होगी विशेष जांच
रिछा। दमखोदा ब्लाक के गांवों में तीन साल के दौरान मनरेगा के 1.57 करोड़ के घपले का आडिट में खुलासा होने के बाद पूर्व प्रधानों और मौजूदा प्रधानों में खलबली मच गई है। वर्तमान प्रधानों के साथ पूर्व प्रधान ब्लाक पर अपनी कमियों को सुधरवाने में लगे हैं। सूत्रों की माने तो वह मनरेगा का काम देख रहे मनोज कुमार के जरिए रिकार्ड दुरुस्त करने में लगे हुए हैं। आडिट रिपोर्ट में फंसे ब्लाक के तेरह गांव में जांच टीम के आने का डर भी सताने लगा है। इन गांवों के सचिव और पूर्व प्रधानों के खिलाफ आडिट रिपोर्ट उच्च अधिकारियों को भेज दी गई है।
दोषी बीडीओ को शासन देगा चार्जशीट
बरेली। आडिट रिपोर्ट में दमखोदा ब्लाक के दोषी तीन खंड विकास अधिकारियों को शासन स्तर से चार्जशीट दी जाएगी। उनके खिलाफ अनियमितताओं का ब्योरा तैयार करके सीडीओ और डीएम के माध्यम से शासन को भेज दिया गया है। इन पर आरोप है कि 1.57 करोड़ के कामों में करीब ढाई लाख रुपये का टीडीएस और वाणिज्यकर की कटौती नहीं की गई। इसके अलावा मनरेगा के लिए धनराशि मांगी लेकिन कराए गए कामों का ठीक से सत्यापन नहीं किया।
एक सप्ताह में मांगी 16 गांवों की रिपोर्ट
मुख्य विकास अधिकारी शिव सहाय अवस्थी ने बताया कि आडिट रिपोर्ट के बाद 10 लाख से अधिक का काम करने वाली 16 ग्राम पंचायतों में कराए गए विकास कार्यों के सत्यापन के लिए जिला स्तरीय अधिकारियों की टीम बनाई है। यह टीम एक सप्ताह में रिपोर्ट सौंपेगी, उसी रिपोर्ट के आधार पर कार्रवाई की जाएगी।
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मंडलीय आडिट टीम ने दमखोदा ब्लाक के गांवों में 1.57 करोड़ रुपये के घपले का खुलासा किया था। जिसे विकास भवन के अधिकारियों ने शुरू में तो गंभीरता से नहीं लिया। अमर उजाला ने आडिट रिपोर्ट को प्रमुखता से छापा तो घपला करने वालों के खिलाफ कार्रवाई करनी पड़ी। गरगईया गांव में जिला ग्राम्य विकास अभिकरण के परियोजना निदेशक की रिपोर्ट में 18.42 लाख रुपये के गबन की पुष्टि हुई। इसके आधार पर खंड विकास अधिकारी ने पूर्व प्रधान निसार अहमद, पंचायत सचिव करन सिंह, लेखाकार मनोज कुमार, तकनीकी सहायक राजेंद्र कुमार, रोजगार सेवक मसकूर, कंप्यूटर आपरेटर आशीष शर्मा तथा एडीओ एसआईबी भरत सिंह के खिलाफ थाना देवरनिया में एफआईआर दर्ज करा दी गई है।
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इनमें से तकनीकी सहायक ने एक साल पहले इस्तीफा दे दिया है और वह दूसरे स्थान पर नौकरी कर रहे हैं। एडीओ आईएसबी रिटायर हो गए हैं। अन्य कर्मचारी कार्यरत हैं, उनके खिलाफ कार्रवाई की जा रही है। बीडीओ ने बताया कि रोजगार सेवक को हटाने के लिए गांव की बैठक बुलाई गई है। अन्य के खिलाफ कार्रवाई के लिए डीपीआरओ और डीडीओ को लिखा गया है। इनके खिलाफ भी शुक्रवार या फिर सोमवार तक निलंबन की कार्रवाई की जाएगी।
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ये है आरोप
जांच में खुलासा हुआ है कि 18.42 लाख रुपये निकाल लिए गए। काम नहीं हुआ, फर्जी मस्टररोल भरके मजदूरों के नाम से पैसा निकाल लिया था। मौके पर न तो तालाब का सौंदर्यीकरण हुआ और न चकरोड़ बने। गांव में नाली व खड़ंजा भी कागजों में बना दिखा दिया गया।
13 गांवों में होगी विशेष जांच
रिछा। दमखोदा ब्लाक के गांवों में तीन साल के दौरान मनरेगा के 1.57 करोड़ के घपले का आडिट में खुलासा होने के बाद पूर्व प्रधानों और मौजूदा प्रधानों में खलबली मच गई है। वर्तमान प्रधानों के साथ पूर्व प्रधान ब्लाक पर अपनी कमियों को सुधरवाने में लगे हैं। सूत्रों की माने तो वह मनरेगा का काम देख रहे मनोज कुमार के जरिए रिकार्ड दुरुस्त करने में लगे हुए हैं। आडिट रिपोर्ट में फंसे ब्लाक के तेरह गांव में जांच टीम के आने का डर भी सताने लगा है। इन गांवों के सचिव और पूर्व प्रधानों के खिलाफ आडिट रिपोर्ट उच्च अधिकारियों को भेज दी गई है।
दोषी बीडीओ को शासन देगा चार्जशीट
बरेली। आडिट रिपोर्ट में दमखोदा ब्लाक के दोषी तीन खंड विकास अधिकारियों को शासन स्तर से चार्जशीट दी जाएगी। उनके खिलाफ अनियमितताओं का ब्योरा तैयार करके सीडीओ और डीएम के माध्यम से शासन को भेज दिया गया है। इन पर आरोप है कि 1.57 करोड़ के कामों में करीब ढाई लाख रुपये का टीडीएस और वाणिज्यकर की कटौती नहीं की गई। इसके अलावा मनरेगा के लिए धनराशि मांगी लेकिन कराए गए कामों का ठीक से सत्यापन नहीं किया।
एक सप्ताह में मांगी 16 गांवों की रिपोर्ट
मुख्य विकास अधिकारी शिव सहाय अवस्थी ने बताया कि आडिट रिपोर्ट के बाद 10 लाख से अधिक का काम करने वाली 16 ग्राम पंचायतों में कराए गए विकास कार्यों के सत्यापन के लिए जिला स्तरीय अधिकारियों की टीम बनाई है। यह टीम एक सप्ताह में रिपोर्ट सौंपेगी, उसी रिपोर्ट के आधार पर कार्रवाई की जाएगी।