वन विभाग के एसडीओ वीके सिंह, रेंजर अनिल मिश्रा बुधवार को टीम के साथ अगरास पहुंचे और गांव के मुकेश यदुवंशी के पटेला लगे खेत में बाघ के ताजे पदचिह्न देखे। महीना भर पहले भी इसी खेत में बाघ के पगचिह्न देखे गए थे। हालांकि टीम को बाघ कहीं नहीं दिखा। किसी ग्रामीण ने भी बुधवार को बाघ को अपनी आंखों से देखने की तस्दीक नहीं की है। रेंजर ने बताया कि उच्चाधिकारियों से पिंजड़ा जल्द भिजवाने का आग्रह किया है। पिंजड़ा मिलते ही बाघ को पकड़वाने की पूरी कोशिश की जाएगी। उधर, पिछले महीने भर से कभी अगरास, कभी मढ़ौली के जंगल तो कभी रबर फैक्टरी ग्राउंड में बाघ दिखने से सोरहा, टिटौली, केरा, धौंर सतुइया, गौहाना, सतुइया खास, सोरहा, खिरका जगतपुर, रुकुमपुर माधौपुर, कुरतरा समेत कई गांवों में भारी दहशत है। किसान खेतों से पशुओं का चारा लाने समेत खेती-किसानी के काम भी नहीं निपटा पा रहे हैं। मार्निंग वाक के लिए भी लोग कम निकल रहे हैं।