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बलपूर्वक खाली कराए जाएंगे तीन सौ बेड अस्पताल से कब्जे
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300 बेड अस्पताल में बने परिसर - अमर उजाला
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बरेली। तीन सौ बेड कोविड चिकित्सालय में संविदा पर तैनात रहे स्वास्थ्यकर्मी कार्यमुक्त होने के चार माह बाद भी आवास खाली नहीं कर रहे हैं। नोटिस जारी होने पर भी आवास खाली न करने पर बिजली और पानी का कनेक्शन काट दिया गया है। अब 14 दिसंबर को बलपूर्वक आवास खाली कराने के निर्देश डीएम मानवेंद्र सिंह ने दिए हैं।
मार्च, 2021 में कोरोना की दूसरी लहर शुरू होने पर संविदा कर्मचारियों को तैनाती दी गई थी और उन्हें परिसर में बने आवास आवंटित कर दिए गए। मई में कोरोना की दूसरी लहर थमी तो जून में सभी कर्मचारियों को कार्यमुक्त कर आवास खाली करने को कहा गया। नोटिस के बावजूद चिकित्सक, स्टाफ नर्स, चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी किसी ने आवास खाली नहीं किए। आवास खाली कराने के लिए अब डीएम मानवेंद्र सिंह ने तीन सदस्यीय समिति गठित की है। इसमें एसीएम फर्स्ट, सीओ तृतीय और कोविड अस्पताल के सीएमएस शामिल हैं।
सीएमएस डॉ. सतीश चंद्रा ने बताया कि पिछले दिनों डीएम ने निरीक्षण के दौरान आवासों को कब्जा मुक्त कराने के निर्देश दिए थे, मगर कर्मचारियों ने अब तक आवास खाली नहीं किए हैं। लिहाजा, सीएमओ डॉ. बलबीर सिंह की ओर से जारी आदेश के तहत अब 14 दिसंबर को फोर्स की मौजूदगी में आवास खाली कराए जाएंगे। अगर कोई विरोध करेगा तो उसके खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई जाएगी।
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इन लोगों का है आवासों पर कब्जा
सीएमओ कार्यालय के लिपिक आरआर रिचर्ड, स्टाफ नर्स (सेवा समाप्त) वेशपाल यादव, जुगविंदर, दीपाली, प्रीती गंगवार, पूजा बोहरा, ममता शाक्य, संतोषिनी दिग्गल, सचिन कुमार भारद्वाज, रितु, रीता सचान, स्वीटी प्रसाद, दिव्या भारती, दीक्षा वर्मा, शालिनी मैसी, उषा, अभिषेक कुमार, पवन, जगदीश सरन, रवि, रीना, स्वराज मोहम्मद, प्रमोद, राकेश चंद्र, राम प्रताप, सुभाष शर्मा, संजीव कुमार दुबे अवैध कब्जेदार हैं।
हैंडओवर होना बाकी, होगी रिकवरी
कोविड चिकित्सालय के सीएमएस डॉ. सतीश चंद्रा के मुताबिक अस्पताल अभी स्वास्थ्य विभाग को हैंडओवर नहीं हुआ है। लिहाजा, अवैध कब्जा करने वालों से रिकवरी भी कराई जा सकती है। इसके लिए आवास के प्रकार के अनुसार सरकारी दर से वसूली की जा सकती है। आशंका है कि आवास में रह रहे कई संविदाकर्मी निजी अस्पतालों में कार्य कर रहे हैं मगर अवैध तरीके से सरकारी आवास पर कब्जा किए हैं।
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मार्च, 2021 में कोरोना की दूसरी लहर शुरू होने पर संविदा कर्मचारियों को तैनाती दी गई थी और उन्हें परिसर में बने आवास आवंटित कर दिए गए। मई में कोरोना की दूसरी लहर थमी तो जून में सभी कर्मचारियों को कार्यमुक्त कर आवास खाली करने को कहा गया। नोटिस के बावजूद चिकित्सक, स्टाफ नर्स, चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी किसी ने आवास खाली नहीं किए। आवास खाली कराने के लिए अब डीएम मानवेंद्र सिंह ने तीन सदस्यीय समिति गठित की है। इसमें एसीएम फर्स्ट, सीओ तृतीय और कोविड अस्पताल के सीएमएस शामिल हैं।
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सीएमएस डॉ. सतीश चंद्रा ने बताया कि पिछले दिनों डीएम ने निरीक्षण के दौरान आवासों को कब्जा मुक्त कराने के निर्देश दिए थे, मगर कर्मचारियों ने अब तक आवास खाली नहीं किए हैं। लिहाजा, सीएमओ डॉ. बलबीर सिंह की ओर से जारी आदेश के तहत अब 14 दिसंबर को फोर्स की मौजूदगी में आवास खाली कराए जाएंगे। अगर कोई विरोध करेगा तो उसके खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई जाएगी।
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इन लोगों का है आवासों पर कब्जा
सीएमओ कार्यालय के लिपिक आरआर रिचर्ड, स्टाफ नर्स (सेवा समाप्त) वेशपाल यादव, जुगविंदर, दीपाली, प्रीती गंगवार, पूजा बोहरा, ममता शाक्य, संतोषिनी दिग्गल, सचिन कुमार भारद्वाज, रितु, रीता सचान, स्वीटी प्रसाद, दिव्या भारती, दीक्षा वर्मा, शालिनी मैसी, उषा, अभिषेक कुमार, पवन, जगदीश सरन, रवि, रीना, स्वराज मोहम्मद, प्रमोद, राकेश चंद्र, राम प्रताप, सुभाष शर्मा, संजीव कुमार दुबे अवैध कब्जेदार हैं।
हैंडओवर होना बाकी, होगी रिकवरी
कोविड चिकित्सालय के सीएमएस डॉ. सतीश चंद्रा के मुताबिक अस्पताल अभी स्वास्थ्य विभाग को हैंडओवर नहीं हुआ है। लिहाजा, अवैध कब्जा करने वालों से रिकवरी भी कराई जा सकती है। इसके लिए आवास के प्रकार के अनुसार सरकारी दर से वसूली की जा सकती है। आशंका है कि आवास में रह रहे कई संविदाकर्मी निजी अस्पतालों में कार्य कर रहे हैं मगर अवैध तरीके से सरकारी आवास पर कब्जा किए हैं।