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श्रीराम मंदिर के लिए किसी ने छोड़ा एेशोआराम, तो किसी ने गवां दिया पद, कोई गया जेल
सार
देश का ऐसा कौन सा कोना था जहां 1990 में श्रीराम जन्मभूमि मुक्ति आंदोलन के दौरान भावनाओं का ज्वार नहीं उमड़ा। उस ऐतिहासिक दौर में बरेली में भी श्रीराम की भक्ति में आवेग के तमाम उफान आए। किसी ने श्रीराम मंदिर के लिए खुशी-खुशी अपना पद गंवा दिया तो कोई ऐशोआराम की जिंदगी का मोह छोड़कर जेल चला गया। जय श्रीराम के नारे गूंजने के साथ माहौल में उत्तेजना बढ़ जाती थी। अयोध्या आंदोलन के तमाम योद्धाओं का मानना है कि असल में वही दौर श्रीराम के भव्य मंदिर की नींव था। इसी आंदोलन के बाद यह मुद्दा देश में जन-जन तक पहुंचा और अब 30 साल बाद जाकर वह शुभ घड़ी आने जा रही है जिसकी प्रतीक्षा करोड़ों लोगों को थी। इसी मौके पर श्रीराम जन्मभूमि आंदोलन में हिस्सा लेने वाले कई लोगों ने अमर उजाला के साथ उस दौर की यादें साझा कीं।
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श्रीराम मंदिर की स्थापना से पहले सजा त्रिवटी नाथ मंदिर।
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, बरेली
विस्तार
कारसेवा के लिए गंवा दिया था नगर प्रमुख का पद मगर जरा भी अफसोस नहीं हुआ
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1990 में दिसंबर का महीना था जब मैंने नगर महापालिका के प्रमुख पद पर रहते हुए कारसेवा में भाग लिया था। रामपुर बाग में मेरे आवास से अस्सी से ज्यादा कार्यकर्ताओं के साथ अयोध्या कूच करते ही हम सबको गिरफ्तार करके दो सप्ताह के लिए शाहजहांपुर जेल भेज दिया गया। इस घटना के बाद मेरे विरोधी सभासदों और विपक्षी दलों को मौका मिला तो महानगर पालिका में सदन बुलाकर मेरे खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव रख दिया गया। भाजपा संगठन ने नगर प्रमुख और मंत्रियों को पद पर रहते हुए कारसेवा में शामिल होने की अनुमति नहीं दी थी। इसलिए मुझे पद छोड़ना पड़ा। हालांकि रिहा होने के बाद हमने फिर मेयर का चुनाव जीता। राम जन्मभूमि आंदोलन अब जाकर रंग लाया है। बेहद खुशी महसूस हो रही है। -राजकुमार अग्रवाल, पूर्व मेयर
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अटल, मुरली मनोहर और कल्याण सिंह के दौरों के बाद पूरी बरेली में उमड़ा था जोश
बरेली में अटल बिहारी वाजपेयी, मुरली मनोहर जोशी, कल्याण सिंह, साध्वी ऋतम्भरा और उमा भारती जैसे भाजपा के प्रमुख नेताओं के दौरों के बाद अयोध्या आंदोलन पूरे उफान पर आ गया था। इन नेताओं की सभाओं में कार्यकर्ताओं और आम लोगों में फर्क महसूस करना मुश्किल था। हर सभा में अपार भीड़ उमड़ती थी। इतना आवेग था कि विधायक और मंत्री होने के बाद भी मैंने आंदोलन में हिस्सा लिया था। प्रेमनगर पुलिस मुझे गिरफ्तार करने मेरे घर पहुंची लेकिन कार्यकर्ताओं की भीड़ देखकर उसका हौसला पस्त हो गया। तनाव बढ़ा तो पुलिस के साथ आए अफसर भी पसोपेश में पड़ गए। अंतत: तय हुआ कि हम सब पैदल ही थाने तक जाएंगे। इसके बाद पुलिस और सारे अफसर भी हम लोगों के पीछे पैदल चलकर थाने आए। - दिनेश जौहरी, पूर्व मंत्री
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याद है जब कल्याण सिंह के शपथ लेते ही सारे विधायक-मंत्री पहुंचे थे अयोध्या
1990 में अयोध्या में हुए कारसेवा आंदोलन में भाग लेने के दौरान मुझे गिरफ्तार कर लिया गया था और दो दिन बाद रिहाई हो पाई थी। 1991 में कल्याण सिंह सरकार बनी तब पूरी कैबिनेट और सारे विधायक अयोध्या दर्शन करने गए। मेरे साथ बरेली से सभी सात विधायक इनमें शामिल थे। उसी समय यह संकल्प लिया था कि अयोध्या में जब मंदिर का निर्माण शुरू होगा तभी बरेली के डोहरा रोड पर एक मंदिर के लिए कारसेवा करेंगे। आज जब अयोध्या में भगवान श्रीराम के भव्य मंदिर का शिलान्यास होने जा रहा है, डोहरा में भी पूरी तैयारी की गई है। एक लाख ईंट पहले ही मंगवा ली थीं क्योंकि मुझे पूरा विश्वास था कि एक न एक दिन श्रीराम का मंदिर जरूर बनेगा। कितने बरसों बाद देश के करोड़ों लोगों की उम्मीद पूरी हो पाई है। - सुभाष पटेल, पूर्व मेयर
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